दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान हुई हिंसा में शामिल लोगों की जांच में 989 ऐसे व्यक्ति मिले हैं जिन पर पहले से गंभीर अपराधों के मामले दर्ज थे। इनमें 101 हत्या के आरोपी, 284 डकैती और लूट के मामले वाले, और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के 92 आरोपी शामिल हैं। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से सरकार को दी गई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
पुलिस ने कुल 2,873 लोगों की जांच की जो पुलिस पर हमला करने, गाड़ियां तोड़ने और हिंसा में शामिल पाए गए। इनमें से 989 लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया।
पहचान कैसे हुई?
पुलिस ने FRS कैमरों, सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों द्वारा ली गई वीडियो और आम लोगों की वीडियो के जरिए इन लोगों की पहचान की। जांच में पता चला कि हिंसा वाले इलाकों में कई लोग पत्थर फेंक रहे थे, पुलिस पर हमला कर रहे थे, सरकारी गाड़ियां क्षति पहुंचा रहे थे और सार्वजनिक संपत्ति तोड़ रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन स्थल के आसपास मौजूद कई लोग सिर्फ छोटे-मोटे अपराधी नहीं थे, बल्कि आदतन अपराधी और बार-बार अपराध करने वाले थे। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती-लूट, बलात्कार, महिलाओं के खिलाफ अपराध, आर्म्स एक्ट, अपहरण, छीना झपटी और नशीले पदार्थों से जुड़े मामले शामिल थे।
आपराधिक रिकॉर्ड के आंकड़े
हत्या के मामले: 101 आरोपी। इनमें से 42 पर दो या इससे ज्यादा मामले दर्ज थे। 12 लोगों का आपराधिक इतिहास 10 या उससे ज्यादा मामलों का था।
हत्या के प्रयास: 62 आरोपी। इनमें 25 पर एक से ज्यादा मामले थे।
डकैती और लूट: 284 आरोपी। इनमें 155 पर दो या ज्यादा मामले, और 31 पर 10 या उससे ज्यादा मामले दर्ज थे।
बलात्कार: 61 आरोपी। इनमें 8 पर एक से ज्यादा मामले।
छेड़छाड़: 25 आरोपी। इनमें 6 दोबारा अपराधी।
POCSO एक्ट: 6 आरोपी।
आर्म्स एक्ट: 229 आरोपी।
छीनझपटी: 135 आरोपी।
अपहरण: 19 आरोपी।
NDPS (नशीले पदार्थ): 67 आरोपी। इनमें 9 दोबारा अपराधी।
प्रदर्शन की अनुमति और घटना
पुलिस के अनुसार, केवल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, संसद की ओर मार्च की नहीं। फिर भी प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए संसद के बहुत करीब पहुंच गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। पुलिस का कहना है कि बार-बार चेतावनी देने के बाद ही बल प्रयोग किया गया। कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घायल हुए, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक संयम रखा।
पुलिस ने बाद में पूरी घटना की समीक्षा की। इसमें यह भी देखा गया कि असली प्रदर्शनकारियों के साथ कुछ बदमाश कैसे घुस आए थे। पुलिस का कहना है कि कई पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन स्थिति पूरी तरह बेकाबू नहीं हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई, गिरफ्तारी और जांच जारी रहेगी। छात्रों के मामलों में छूट दी जा सकती है।

















