महाराष्ट्र में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति पुणे जिले के मावल क्षेत्र में देखने को मिली, जहां भारी वर्षा के कारण हुए भूस्खलन ने कई परिवारों को संकट में डाल दिया। पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक ढहने से करीब पांच घर मलबे में दब गए। आशंका है कि तीन लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इस आपदा में अब तक 13 लोगों की मौत की खबर है।
भूस्खलन के बाद राहत अभियान तेज
पुलिस के अनुसार, मावल के एक दूरस्थ गांव में तीन स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। इनमें पाटन गांव सबसे अधिक प्रभावित हुआ, जहां एक मकान पूरी तरह मलबे में समा गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत अभियान शुरू किया और प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। जिला प्रशासन के अनुरोध पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की पुणे स्थित पांचवीं बटालियन की 30 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंच गई है। टीम आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रही है। हालांकि लगातार हो रही बारिश के कारण बचाव कार्य में बाधाएं आ रही हैं।
भारी बारिश का असर सड़क यातायात पर भी पड़ा है। सुरक्षा कारणों से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अगले आदेश तक रोक दी गई है। कई स्थानों पर जलभराव और पहाड़ियों से मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही मुंबई और पुणे के बीच यात्रा करें तथा प्रशासन द्वारा जारी ट्रैफिक और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखें। इस बीच, मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे और रायगढ़ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई है। वहीं, जलभराव और पटरियों पर पानी भरने के कारण रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटा है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें, ताकि किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रहा जा सके।













