India US D-2 Alliance: क्या है भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित डी-2 गठबंधन? जानें वैश्विक सुरक्षा पर इसका असर
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India US D-2 Alliance: क्या है भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित डी-2 गठबंधन? जानें वैश्विक सुरक्षा पर इसका असर

अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर जानिए भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित डी-2 गठबंधन (D-2 Alliance) के बारे में, जो हिंद-प्रशांत में चीन की विस्तारवादी चुनौतियों का सामना करेगा।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत) — edited by Shivam Dixit
Jul 5, 2026, 01:47 am IST
inभारत, विश्व, विश्लेषण
India US Proposed D2 Alliance PM Modi President Joe Biden Geopolitics Quad

04 जुलाई 2026 को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस घोषणा की ऐतिहासिक 250वीं वर्षगांठ है। यह दिन उस क्षण को चिह्नित करता है, जब 13 अमेरिकी उपनिवेशों ने औपचारिक रूप से खुद को ब्रिटिश शासन से मुक्त घोषित कर दिया था। उस दिन से आज का संयुक्त राज्य अमेरिका एकमात्र महाशक्ति, सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सबसे उन्नत सैन्य शक्ति और लोकतंत्र के चैंपियन के रूप में जाना जाता है। अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ मनाने के लिए राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों की मेजबानी कर रहा है। इसी तरह, भारत ने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र (लगभग 140 करोड़ की आबादी) है और अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र (लगभग 35 करोड़ की आबादी) है।

स्वतंत्र भारत और अमेरिका के शुरुआती संबंध

आदर्श रूप से, एक नए स्वतंत्र भारत को अमेरिका के साथ अधिक निकटता से जुड़ना चाहिए था। 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका विजयी हुआ था और दुनिया भर में ब्रिटिश शासन का पतन हो रहा था। 1950 के दशक के मध्य तक अधिकांश औपनिवेशिक ब्रिटिश साम्राज्य पर सूरज डूब चुका था और अमेरिका अब एक महाशक्ति था।

यह तथ्य 1956 के स्वेज नहर संकट में साबित हुआ, जब अमेरिका ने मध्यस्थ और प्रवर्तक के रूप में निर्णायक भूमिका निभाई। जब ब्रिटेन, फ्रांस और इज़राइल (अमेरिकी सहयोगियों) ने अक्टूबर 1956 में स्वेज नहर पर नियंत्रण हासिल करने के लिए मिस्र के खिलाफ आक्रमण किया, तो अमेरिका ने युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया। इसके बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की तैनाती सुनिश्चित हुई। इस घटना ने कमोबेश अमेरिका को वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर दिया।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन और बढ़ता अविश्वास

स्वतंत्र भारत और अमेरिका ने अपने संबंधों की शुरुआत एक सतर्क नोट पर की और कुछ समान मूल्यों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। लेकिन भारत 1961 में Non-Aligned Movement का संस्थापक सदस्य बन गया और इसने भारत-अमेरिका संबंधों में एक निश्चित तनाव पैदा कर दिया।

इसके बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास तब बढ़ गया, जब पूर्ववर्ती सोवियत संघ के साथ शीत युद्ध के दौरान अमेरिका पाकिस्तान की ओर झुक गया। जब भारत ने सोवियत संघ के साथ 1971 की संधि पर हस्ताक्षर किए, तो अविश्वास और बढ़ गया।

भारत-अमेरिका संबंधों का सबसे खराब दौर 1998 के पोखरण-2 परीक्षणों के बाद आया, जिसके कारण अमेरिकी प्रतिबंध लगे थे। मार्च 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा के दौरान संबंधों में निर्णायक बदलाव आया। जुलाई 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते ने भारत के परमाणु अलगाव को समाप्त कर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में संबंधों को मिली नई दिशा

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी व्यक्तिगत शैली की कूटनीति (Personal Style Diplomacy) से भारत-अमेरिका संबंधों को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने अमेरिका के साथ एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक गठबंधन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

तब से संबंध संयुक्त सैन्य अभ्यास, रसद समझौतों, खुफिया साझाकरण, अंतरिक्ष सहयोग, समुद्री निगरानी और तकनीकी सहयोग तक विस्तारित हुए हैं। इंडो-पैसिफिक के लिए क्वाड पहल में भारत सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी है।

लेकिन फिर भी अविश्वास की कुछ कमी दिखाई देती है, जैसा कि भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत से स्पष्ट है। इस वर्ष जून में फ्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बात पर प्रकाश डाला था, जब उन्होंने कहा था कि आपसी विश्वास की कमी और संकीर्ण हितों के लिए व्यापार और प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग ने वैश्विक “विश्वास की कमी” पैदा कर दी है। डी-2 गठबंधन (D-2 Alliance) ऐसे अविश्वास को समाप्त कर सकता है।

डी-2 गठबंधन की आवश्यकता क्यों?

इसलिए समय आ गया है कि भारत और अमेरिका “स्वाभाविक सहयोगी” की परिभाषा से आगे निकलें। अभी तक इन दोनों देशों में अपने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुलवादी समाजों और आपसी रणनीतिक हितों की बात होती रहती है, लेकिन परिणाम हमेशा सार्थक नहीं होते हैं।

इसलिए यह प्रस्ताव किया जाता है कि भारत और अमेरिका एक विशिष्ट डी-2 गठबंधन (दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच) में प्रवेश करें, जहां दोनों साझेदार दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने, वैश्विक आतंकवाद का मुकाबला करने, मुक्त समुद्री नेविगेशन सुनिश्चित करने और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करें।

टैरिफ जैसे मुद्दों को भारत की विविधता और विशिष्ट आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देने के साथ आर्थिक हितों को बढ़ावा देना चाहिए। सीधे शब्दों में कहें तो प्रस्तावित डी-2 गठबंधन के तहत भारत और अमेरिका एक-दूसरे के महत्वपूर्ण और आवश्यक हितों को प्राथमिकता दें।

वैश्विक चुनौतियां और भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी नेतृत्व वैश्विक वास्तविकताओं और आगे आने वाली चुनौतियों से अवगत है। चीन अब अमेरिकी नेतृत्व और उसकी कूटनीति के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। एक बार जब चीन ताइवान पर नियंत्रण कर लेता है, तो दुनिया उसके कम्युनिस्ट शासन के विस्तारवादी एजेंडे को देखने जा रही है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र संघर्ष का अगला प्रमुख रंगमंच बनने जा रहा है। चल रहे पश्चिम एशिया संघर्ष ने अमेरिकी सशस्त्र बलों की अजेयता को नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर असममित युद्ध का खतरा मंडरा सकता है। नाटो गठबंधन की एकरूपता भी कमजोर हो गई है। आतंकवाद से खतरा एक पूरी तरह से अलग आयाम प्राप्त कर सकता है।

इन परिस्थितियों में अमेरिकी सेना को भारत जैसी बड़ी सैन्य शक्ति के समर्थन की आवश्यकता है। भारत का कोई विस्तारवादी एजेंडा नहीं है और अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग एक स्थिर और शांतिपूर्ण दुनिया की शुरुआत कर सकता है।

भारत-अमेरिका संबंधों का भविष्य

अतीत को पीछे छोड़कर भारत-अमेरिका संबंध अब दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच डी-2 गठबंधन को मजबूत करने पर विचार कर सकते हैं। दोनों देशों को एक-दूसरे की ताकत का सम्मान करना चाहिए और वास्तविक आपसी विश्वास, आर्थिक विकास, रणनीतिक साझेदारी तथा लोगों के बीच घनिष्ठ संपर्क के आधार पर संबंध बनाना चाहिए।

प्रस्तावित डी-2 गठबंधन के साथ भारत-अमेरिका संबंधों की संभावनाओं को उच्चतम स्तर पर ले जाया जा सकता है। अमेरिकी लोगों को उनकी स्वतंत्रता की ऐतिहासिक 250वीं वर्षगांठ पर बधाई और शुभकामनाएँ।

Topics: हिंद प्रशांत चीन ताइवान संकटक्वाड कूटनीति क्वाड पहलपोखरण 2 परीक्षण इतिहासस्वेज नहर संकट 1956Panchjanya newsglobal geopolitics newsIndia US D-2 Allianceभारत अमेरिका डी-2 गठबंधनअमेरिकी स्वतंत्रता 250वीं वर्षगांठ
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