पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरता चरम पर पहुंच गई है। असहिष्णुता ऐसी कि वहां फारूकाबाद में 125 साल पुरानी गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को तोड़ दिया। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी निंदा की है। इसे “टारगेटेड वंडलिज्म” यानी जानबूझकर की गई तोड़फोड़ बताया गया है। MEA ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि दोषियों को जल्दी पकड़कर सजा दी जाए और तोड़े गए हिस्सों को जल्दी से जल्दी बहाल किया जाए।
MEA का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने मीडिया को बताया कि रिपोर्ट्स देखकर बहुत दुख हुआ। उन्होंने कहा, “हम इस पवित्र गुरुद्वारे के साथ हुई इस घटना की मजबूती से निंदा करते हैं। स्थानीय प्रशासन और ETPB की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई न होने की खबर भी चिंता की बात है।”
मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों पर हमले का सिलसिला लगातार चल रहा है। भारत ने पाकिस्तान से अपील की कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाए, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करे और वहां धार्मिक असहिष्णुता और हिंसा का माहौल खत्म करे।
कब की है घटना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फारूकाबाद में गुरुद्वारा सिंह सभा (जो गुरुद्वारा सच्चा सौदा के पास है) के कुछ हिस्सों को 24-25 जून की रात अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया। पाकिस्तान के ननकाना साहिब से सिख प्रतिनिधि भूपिंदर सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह मुहर्रम के आठवें-नौवें दिन की रात हुई। यह गुरुद्वारा ऐतिहासिक महत्व का है। सिंह सभा आंदोलन यहीं से मजबूत हुआ था। यह आंदोलन 1873 में अमृतसर से शुरू हुआ और 1879 में लाहौर में औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। इसने सिख धर्म और संस्कृति को फिर से जीवंत करने में बड़ी भूमिका निभाई।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी का रुख
इस घटना पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमिटी (DSGMC) ने भी चिंता जताई। कमिटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सरकार से मांग की कि गुरुद्वारे को और नुकसान न पहुंचे, तोड़े गए हिस्सों को तुरंत बहाल किया जाए और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। भूपिंदर सिंह ने यह भी कहा कि यह अकेली घटना नहीं है। पहले भी गुरुद्वारा चोबाचा साहिब (धारमपुरा) को तोड़ा गया था, जो छठे सिख गुरु से जुड़ा है। उस समय भी ETPB की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई।











