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भारत सरकार का कन्‍वर्जन पर वार, एफसीआरए के नए नियमों से विदेशी चंदे पर शिकंजा कसा

वर्षों से यह आरोप लगते रहे हैं और कई मामलों में उक्‍त आरोप सही भी पाए गए कि कुछ विदेशी फंड प्राप्त गैर-सरकारी संगठन (NGOs), धार्मिक संस्थाएं और मिशनरी नेटवर्क सामाजिक सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर विदेशी धन का उपयोग धार्मिक परिवर्तन के लिए कर रहे थे।

Written byडॉ. मयंक चतुर्वेदीडॉ. मयंक चतुर्वेदी
Jun 25, 2026, 05:24 pm IST
inभारत
केंद्रीय गृहमंत्री, अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री, अमित शाह

भारत सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत वर्ष 2026 में किए गए नए संशोधनों के माध्यम से विदेशी धन के उपयोग पर अभूतपूर्व नियंत्रण स्थापित किया है। जैसा कि गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में संकेत दिया था, उसी के अनुरूप गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विदेशी धन का उपयोग अब धर्मांतरण (Conversion) संबंधी गतिविधियों में नहीं किया जा सकेगा।

दरअसल, वर्षों से यह आरोप लगते रहे हैं और कई मामलों में उक्‍त आरोप सही भी पाए गए कि कुछ विदेशी फंड प्राप्त गैर-सरकारी संगठन (NGOs), धार्मिक संस्थाएं और मिशनरी नेटवर्क सामाजिक सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर विदेशी धन का उपयोग धार्मिक परिवर्तन के लिए कर रहे थे। अनेक जांचों और कानूनी कार्रवाइयों के बाद केंद्र सरकार ने एफसीआरए नियमों को और सख्त करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा को केंद्र में रखा है।

उल्‍लेखनीय है कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम पहली बार 1976 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विदेशी स्रोतों से आने वाला धन भारत की राजनीति, सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्रीय हितों को प्रभावित न कर सके। वर्ष 2010 में इसे नए स्वरूप में लागू किया गया तथा बाद में 2020 और 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। एफसीआरए के अंतर्गत विदेशी स्रोतों से धन प्राप्त करने वाले संगठनों को गृह मंत्रालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। यह पंजीकरण पांच वर्षों के लिए वैध रहता है और इसके बाद नवीनीकरण कराना पड़ता है।

पहले की तुलना में अधिक पारदर्शि‍ता व्‍यवस्‍था रहेगी

संशोधित एफसीआरए नियमों पर बात करते हुए ‘सेवा इंटरनेशल’के राष्‍ट्रीय कोषाध्‍यक्ष राकेश मित्‍तल का कहना है, “केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में जो संशोधन किए गए हैं, निश्‍चित ही उसका स्‍वागत होना चाहिए। अब पहले की तुलना में अधिक पारदर्शि‍ता रहेगी, क्‍योंकि पंजीकरण प्रमाणपत्र अथवा नए पंजीकरण के लिए आवेदन में उन उद्देश्यों का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा, जिनके लिए पंजीकरण मांगा या प्रदान किया जा रहा है। ये उद्देश्य नियमों के साथ संलग्न अनुसूची में निर्धारित सूची में से ही चुने जाने होंगे।”

उनके अनुसार, इसके अतिरिक्त, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को उन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों का भी विवरण देना होगा, जहां वे अपनी गतिविधियां संचालित करना चाहते हैं। स्‍वभाविक है कि इस बदलाव से सिस्‍टम में अधिक पारदर्श‍िता आएगी।

राकेश मित्‍तल ने बताया, “जिन संगठनों के पास पहले से एफसीआरए पंजीकरण है, उन्हें एक वर्ष के भीतर अपने पंजीकरण में उल्लिखित उद्देश्यों को अद्यतन कर केंद्र सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। संशोधित नियमों में विभिन्न गतिविधियों को स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया है तथा कुछ मामलों में राजनीतिक या वैचारिक गतिविधियों पर विशेष प्रतिबंध लगाए गए हैं। जिसमें कि शैक्षिक उद्देश्यों के अंतर्गत 22 प्रकार की गतिविधियां शामिल की गई हैं। यहां संवैधानिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों और नागरिक जिम्मेदारियों पर जागरूकता कार्यक्रम संबंधी प्रावधान के साथ यह शर्त जोड़ी गई है कि ऐसी गतिविधियां “पूर्णतः गैर-राजनीतिक प्रकृति” की हों।”

मुख्‍य पांच श्रेणियों में कई श्रेणियां बनाई गईं

मित्‍तल के अनुसार, “सांस्कृतिक उद्देश्यों की 18 श्रेणियों में “भारतीय परंपराओं से प्रेरित समकालीन कलाओं को बढ़ावा देना” शामिल है, लेकिन इसके साथ “राजनीतिक या वैचारिक सामग्री को छोड़कर” की शर्त भी निर्धारित की गई है। धार्मिक उद्देश्यों के अंतर्गत 16 प्रकार की गतिविधियों को अनुमति दी गई है। इनमें धार्मिक शिक्षा, नैतिक उपदेश, सत्संग, प्रवचन, ध्यान-साधना (धर्मांतरण को छोड़कर) तथा कब्रिस्तान एवं श्मशान भूमि के विकास और रखरखाव जैसी गतिविधियां शामिल हैं।”

‘सेवा इंटरनेशनल’ के राष्‍ट्रीय कोषाध्‍यक्ष के अनुसार, इसमें आर्थिक उद्देश्यों के लिए 19 श्रेणियां तथा सामाजिक उद्देश्यों के लिए 30 गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। संशोधित नियमों का उद्देश्य विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों की गतिविधियों को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और निर्धारित उद्देश्यों तक सीमित रखना है। उनका कहना है कि एफसीआरए में धन लेने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पहले से ही पांच श्रेणियां बनाई हुई हैं, जिनमें धर्म, संस्‍कृति, समाज, शिक्षा और आर्थ‍िकी शामिल हैं। ये सभी उपश्रेणिया इन्‍हीं पांच श्रेणियों में बटी हुई हैं।

राकेश मित्‍तल साथ में यह भी बताते हैं कि एफसीआरए के नए नियमों में सभी स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपना उद्देश्य और कार्यक्षेत्र घोषित करें। प्रत्येक संस्था को यह बताना होगा कि वह किस उद्देश्य से विदेशी धन प्राप्त कर रही है और किन राज्यों में उसका उपयोग करेगी। जिन संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों में विदेशी नागरिक शामिल होंगे, उन्हें सामान्यतः एफसीआरए पंजीकरण नहीं मिलेगा। विदेशी फंड की अगली किश्त तभी मिलेगी जब पहले प्राप्त धन का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो चुका हो। संस्थाओं को अपने सोशल मीडिया अकाउंट, वेबसाइट और प्रकाशनों की जानकारी सरकार को देनी होगी। अब ट्रस्टी, निदेशक, साझेदार, पदाधिकारी और संगठन संचालन से जुड़े सभी प्रमुख व्यक्तियों को कानूनी जवाबदेही के दायरे में लाया गया है।

नए नियमों में धर्मांतरण पर स्पष्ट रोक

मित्‍तल कहते हैं, “संशोधित नियमों में पहली बार धार्मिक गतिविधियों की स्पष्ट श्रेणी निर्धारित की गई है। 22 जून 2026 की देर रात सामने आए इन संशोधनों में सरकार ने धार्मिक शिक्षा, नैतिक उपदेश, सत्संग, प्रवचन, ध्यान शिविर, धार्मिक साहित्य का प्रकाशन, पूजा स्थलों का निर्माण और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं जैसी गतिविधियों को अनुमति दी है, लेकिन नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी भी गतिविधि को अनुमति नहीं होगी।”

इसके साथ ही सुधारों का स्‍वागत करते हुए विश्‍व हिन्‍दू परिषद (विहिप) के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता विनोद बंसल ने कहा, “जांच एजेंसियों की रिपोर्टों और विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों के अनुसार कई बार धर्मांतरण की गतिविधियों को सीधे धार्मिक कार्यक्रमों के बजाय सामाजिक सेवा की आड़ में संचालित किया जाता पाया गया है और अब भी पाया जा रहा है, शिक्षा और छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से धार्मिक प्रभाव। स्वास्थ्य सेवाओं और मुफ्त चिकित्सा शिविरों के माध्यम से संपर्क। गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता और रोजगार का प्रलोभन। आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक प्रचार। विदेशी धन से संचालित धार्मिक साहित्य और प्रचार सामग्री का वितरण। स्‍वभाविक है कि नए नियमों से कन्‍वर्जन में रोक लगेगी।”

नियमों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना

संगठन सेवा भारती के राष्‍ट्रीय मंत्री रामेन्‍द्र सिंह ने गृह मंत्रालय के हवाले से कहा, कि नए नियमों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनाना है। सरकार का मानना है कि विदेशी धन का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए जिसके लिए उसे अनुमति दी गई है। धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच स्पष्ट सीमांकन आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार की अवैध या भ्रामक गतिविधि को रोका जा सके।

रामेंद्र सिंह कहते हैं, “केंद्र सरकार ने जिस प्रकार निगरानी तंत्र को मजबूत किया है, उससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों को पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्य करना होगा। अब एफसीआरए सिर्फ वित्तीय विनियमन का कानून नहीं रह गया है, वह राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और संस्थागत जवाबदेही का महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है।”

कितने संगठनों के लाइसेंस रद्द हुए?

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में हजारों संस्थाओं के एफसीआरए पंजीकरण रद्द या नवीनीकरण से वंचित किए गए हैं। विगत वर्षों (2015 से लेकर अब तक) में भारत सरकार ने विभिन्न नियमों के उल्लंघन और अनिवार्य Annual Return दाखिल न करने के कारण 20,000 से अधिक (लगभग 21,933) गैर-सरकारी NGOs के FCRA लाइसेंस रद्द कर दिए है। इन रद्द किए गए लाइसेंसों वाले एनजीओ अब विदेश से धन प्राप्त नहीं कर सकते।

कुल मिलाकर एफसीआरए नियमों में 2026 के संशोधन भारत में विदेशी फंडिंग व्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं। पहली बार धर्मांतरण को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित गतिविधियों की श्रेणी में रखा गया है तथा धन के उपयोग, संगठन के उद्देश्य, कार्यक्षेत्र और जिम्मेदार पदाधिकारियों की जवाबदेही को स्पष्ट किया गया है।

Topics: धर्मांतरणगृह मंत्रालयFCRAविदेशी अंशदानमिशनरी नेटवर्क
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