कुछ दिनों पहले कई मीडिया रिपोर्ट्स आईं कि राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल सरकार का एंटी-गूंडा बिल वापस कर दिया है। PIB फैक्ट चेक और गृह मंत्रालय ने इस खबर को गलत बताया है।
बिल क्या है
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने जून 2026 में “द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026” पास किया था। इसे आम भाषा में एंटी-गूंडा बिल कहा जा रहा है। इसमें असामाजिक गतिविधियों, संगठित अपराध, तोड़फोड़, अवैध खनन जैसी चीजों पर लगाम लगाने के प्रावधान हैं। एक साल तक प्रिवेंटिव डिटेंशन का भी प्रावधान है।
विधानसभा से पास होने के बाद राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए रिजर्व कर दिया। इसके बाद यह केंद्र सरकार के पास गया। गृह मंत्रालय ने इसे संबंधित मंत्रालयों और विभागों को भेजा ताकि वे इसकी जांच करें और अपनी राय दें।
MISLEADING and FALSE Media Reports
❌ Misleading media reports state that the President of India has returned the “West Bengal Anti-Goonda Bill.”
✅ The Ministry of Home Affairs, Government of India , has clarified that The West Bengal Public Safety and Control of Anti-Social… https://t.co/qEW5EK55cL pic.twitter.com/QmjH5PPjYv
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) September 26, 2026
मीडिया में क्या छपा
इंडियन एक्सप्रेस, द वायर, इकोनॉमिक टाइम्स, द टेलीग्राफ और पीटीआई जैसी कई जगहों पर खबर आई कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिल वापस कर दिया है। कारण बताया गया कि यह केंद्रीय नारकोटिक्स कानून (एनडीपीएस एक्ट) से ओवरलैप करता है।
गृह मंत्रालय ने इसे भ्रामक बताया
वहीं मामले की जांच के बाद गृह मंत्रालय और PIB फैक्ट चेक ने साफ कहा है कि ये रिपोर्ट्स भ्रामक और गलत हैं। बिल अभी भी जांच के दौर में है। राष्ट्रपति ने इसे वापस नहीं किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बिल अभी संबंधित मंत्रालयों में परीक्षाधीन है। बिल केंद्र सरकार के पास है और जांच जारी है। कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

















