अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ा है। इसका असर ये हुआ है कि मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी स्थिर हुईं। पिछले एक हफ्ते में सबसे बड़ी गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 74 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में दिख रही प्रगति है।
अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों में 60 दिन की ढील दी
अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत को अमेरिका ने सकारात्मक बताया। इस फैसले से ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कुछ खास बिक्री और परिवहन को मंजूरी मिल गई है। यह छूट ईरान के लिए आर्थिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। इससे दुनिया भर के खरीदार, खासकर अमेरिकी रिफाइनरियां, ईरानी तेल खरीद सकेंगी और भुगतान भी कर सकेंगी। बाजार में उम्मीद बढ़ गई है कि जल्द ही ज्यादा ईरानी तेल उपलब्ध हो जाएगा, जिससे सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें दबाव में रहेंगी।
दोनों पक्षों के बयानों में थोड़ा अंतर
वार्ता के पहले दौर को दोनों देशों के अधिकारियों ने रचनात्मक और सकारात्मक माना है। फिर भी कुछ मुद्दों पर अभी मतभेद बाकी हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को अपने यहां आने की अनुमति देने को तैयार हो गया है। लेकिन ईरान ने इस दावे से इनकार कर दिया।
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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आवाजाही वापस पटरी पर
रणनीतिक रूप से बहुत जरूरी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जलमार्ग पर हाल के संघर्ष के दौरान जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इससे फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई ठप्प जैसी हो गई थी और इस साल की शुरुआत में कीमतें बहुत ऊंची चली गई थीं। अब स्थिति में सुधार दिख रहा है। ईरान ने पिछले हफ्ते 3 करोड़ बैरल (30 मिलियन बैरल) से ज्यादा कच्चा तेल शिपमेंट भेजा। कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे दूसरे उत्पादक देश भी वैकल्पिक रास्ते इस्तेमाल कर रहे हैं। कतर ने भी हॉर्मुज से ज्यादा एलएनजी टैंकर भेजने शुरू कर दिए हैं, जो इस बात का संकेत है कि यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।
बहरहाल आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच और बातचीत होने वाली है। मुख्य मुद्दे ये हैं — ईरान का परमाणु कार्यक्रम, लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम को स्थायी बनाना, और हॉर्मुज जलमार्ग से सुरक्षित नौवहन के लिए लंबे समय की सुरक्षा व्यवस्था। बाजार अभी इन वार्ताओं पर नजर रखे हुए है। अगर बातचीत आगे बढ़ी और तेल की सप्लाई और बढ़ी तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।














