अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी में चल रही तनातनी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। कहा जा रहा है कि यह मध्य पूर्व में फिर से हुई हमलों की वजह से यह हुआ है। इससे दोनों देशों के बीच के अस्थायी शांति समझौते की कमजोरी सामने आई और होर्मुज स्ट्रेट में ऊर्जा वाले जहाजों की आवाजाही भी धीमी हो गई।
कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 52 सेंट यानी 0.67 प्रतिशत बढ़कर 72.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट यानी 1.03 प्रतिशत ऊपर 69.94 डॉलर प्रति बैरल पर था। पिछले हफ्ते ब्रेंट क्रूड 10.6 प्रतिशत गिरा था। यह लगातार तीसरा हफ्ता था जब कीमतें घटीं। उस समय होर्मुज स्ट्रेट से क्रूड शिपमेंट्स बढ़ गए थे, जो फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष के बाद सबसे ज्यादा थे।
जहाजों पर हमले और जवाबी कार्रवाई
लेकिन गुरुवार से स्ट्रेट में जहाजों पर फिर हमले शुरू हो गए। इनमें एक कतर से जुड़ा ऑयल टैंकर भी शामिल था। इससे अमेरिका और ईरान दोनों तरफ से हमले हुए, जो अस्थायी शांति समझौते के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।
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शांति की कोशिशें
हालांकि कीमतों की बढ़ोतरी पर अंकुश लगा क्योंकि ईरान और अमेरिका ने हाल के हमलों को रोकने और कतर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने विवाद को लेकर बातचीत फिर शुरू करने पर सहमति जताई।
सऊदी आरामको की गतिविधियां
सऊदी आरामको ने शुक्रवार को अपने रास तनुरा टर्मिनल पर क्रूड ऑयल लोडिंग फिर शुरू कर दी। यह टर्मिनल होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में है। करीब चार महीने रुकी रहने के बाद लोडिंग शुरू हुई। मध्य पूर्व के उत्पादक देश अस्थायी समझौते से पहले ऑयल और गैस उत्पादन बढ़ा रहे थे, उसी के साथ यह कदम आया।
ANZ एनालिस्ट्स का कहना है कि भले ही अमेरिका-ईरान डील ने तेल बाजार के लिए मोड़ लाया हो, लेकिन असल सप्लाई अभी भी टैंकर बैकलॉग, क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्शन बंद होने की वजह से प्रभावित है। उनका अनुमान है कि सप्लाई को पहले वाले स्तर पर पहुंचने में साल के बाकी महीने लग सकते हैं।

















