संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को “फ्रेंकस्टीन देश” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह वह देश है जो तब चौंक जाता है जब उसका अपना बनाया राक्षस ही उस पर हमला कर देता है। यह टिप्पणी बुधवार को हुई जब पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाया।
पाकिस्तान पर आतंकवाद का आरोप
अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देता है, उन्हें प्रशिक्षण देता है और तैनात करता है। उन्होंने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का जिक्र करते हुए कहा कि वह इस नीति पर गर्व भी करते हैं। फिर भी पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है। भारत ने पाकिस्तान द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया। सिंह ने स्पष्ट कहा कि भारत को जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसे भी पढ़ें: इजरायल-हिजबुल्लाह में फिर संघर्ष विराम, अमेरिका-ईरान बैठक रद्द
जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्थिति
भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया। अनुपमा सिंह ने कहा कि यह क्षेत्र भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। केवल एक अनसुलझा मुद्दा है – पाकिस्तान का भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा और उसका वापस लौटना। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्रों की लालसा छोड़कर अपने घर को पहले व्यवस्थित करना चाहिए। वहां बुनियादी स्वतंत्रताओं का इंकार इतना बढ़ गया है कि लोग रोटी, बिजली, अधिकार और गरिमा की मांग करते हैं तो उनके साथ गोलियां और क्रूरता का व्यवहार होता है।
सिंधु जल संधि पर बात
अनुपमा सिंह ने सिंधु जल संधि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह 1960 की पुरानी संधि है। विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी यह संधि स्थायी अधिकार नहीं मानी जा सकती। भारत की स्थिति साफ है – एक देश जो आतंकवाद को नीति के रूप में निर्यात करता है, वह मित्रता और सहयोग के आधार पर विशेषाधिकार की मांग नहीं कर सकता। सिंह ने कहा कि कोई भी तकनीकी व्यवस्था समय के साथ नहीं टिक सकती जब उसके आसपास की दुनिया बदल रही हो। यह संधि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित कर दी गई थी।

















