खाड़ी में शांति आने के साथ ही अब इजरायल और हिजबुल्लाह ने भी शुक्रवार को लेबनान में एक संघर्ष विराम को फिर से लागू करने पर सहमति जताई गई है। यह फैसला 24 घंटे की भारी लड़ाई के बाद लिया गया, जिसमें दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ। यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए नए समझौते के लिए शुरुआती चुनौती बन गई।
अमेरिका-ईरान बैठक रद्द
रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बैठक रद्द कर दी गई। यह बैठक नए समझौते को लागू करने के बारे में बात करने के लिए तय की गई थी। बैठक रद्द होने की वजह दक्षिणी लेबनान में हुई झड़पें थीं। हिज़बुल्लाह ने चार इज़रायली सैनिकों को मार दिया था। जिसके जवाब में इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम 47 लोग मारे गए।
समझौते की पृष्ठभूमि
कुछ दिन पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इसमें ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर 60 दिनों में स्थायी बातचीत करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन फिर शुरू करने की बात थी। समझौते में सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने का भी प्रावधान था, जिसमें लेबनान भी शामिल था। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने कहा कि समझौते का कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते का बचाव करते हुए कहा कि ईरान कमजोर हुआ है और उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा।
लेबनान में क्या हुआ
हिज़बुल्लाह, जो ईरान का करीबी माना जाता है, ने दक्षिणी लेबनान के नबातिएह के पास इज़राइली सैनिकों पर रॉकेट और ड्रोन से हमला किया। इज़राइल ने जवाब में हवाई हमले किए, जिनमें लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कम से कम 18 लोग मारे गए और 33 घायल हुए। शाम तक लड़ाई थम गई। एक इज़राइली अधिकारी ने कहा कि अगर हिज़बुल्लाह हमला नहीं करेगा तो हमारे लिए युद्ध का समय नहीं है। हिज़बुल्लाह के दो सूत्रों ने भी नए संघर्षविराम की पुष्टि की।
इज़राइल की स्थिति
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि सैनिकों या क्षेत्र पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और हिज़बुल्लाह को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इज़राइल दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र में बने रहने की बात कर रहा है, ताकि उत्तरी इलाकों की सुरक्षा बनी रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग़विर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। नेतन्याहू घरेलू आलोचना का सामना कर रहे हैं और कुछ महीनों में चुनाव भी होने वाले हैं।
गौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच हुए इस युद्ध की शुरुआत मार्च में हुई थी, जब हिज़बुल्लाह ने इज़राइल पर रॉकेट दागे थे। तब से लेबनान में 3,900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। पूरे क्षेत्रीय युद्ध में अब तक 7,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटा दी है, लेकिन युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद रहेंगे।












