देहरादून: उत्तराखंड में यह पहला केस है जब एक आईपीएस लोकेश्वर सिंह को पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने मानवाधिकार हनन का दोषी ठहराया है। आरोप है कि एक आईपीएस ने अपने पद पर रहते हुए एक आम व्यक्ति को मर्यादाओं की सारी सीमाओं को तोड़कर उत्पीड़न कर मानवता को लहू-लुहान करने का काम किया। पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने पिथौरागढ़ के लक्ष्मीदत्त जोशी की शिकायत के मामले में गृह विभाग और उत्तराखड शासन से लोकेश्वर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। 12 पेज के इस आदेश के बाद लोकेश्वर की मुसीबतें बढ़ गयी हैं।
पुलिस की नौकरी छोड़ संयुक्त राष्ट्र गए आईपीएस
खबर है कि आई पी एस लोकेश्वर सिंह ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है और वे संयुक्त राष्ट्र की नौकरी पर चले गए है। उनके नौकरी से इस्तीफा देने के बाद प्राधिकरण का ये फैसला आया है ऐसे में उक्त पूर्व अधिकारी के खिलाफ क्या और कैसे कारवाई की जाएगी ये सवाल भी पूछा जा रहा है।
अपने ही जाल में फंसा अधिकारी
दरअसल, लोकेश्वर अपने ही बुने जाल में फंस गए। लगभग दो साल तक चले इस केस में लोकेश्वर सिंह एक बार भी प्राधिकरण के सामने पेश नहीं हुआ। इस दौरान उसने प्राधिकरण को तीन एफिडेविट दिये। तीनों ही अलग-अलग थे और एक-दूसरे के विरोधाभासी। बस, लोकेश्वर सिंह अपने ही बुने जाल में फंस गए। लक्ष्मीदत्त जोशी को नग्न कर पिटाई न करने के संबंध में दो पत्रकारों ने लोकेश्वर सिंह का समर्थन किया था। प्राधिकरण ने उसका भी संज्ञान लिया उनके समर्थन में लिखी गई एक जैसी भाषा को पकड़ लिया। बताया जाता है कि पिथौरागढ़ के पुराना बाजार में छोटी सी कपड़ों की दुकान चलाने वाले लक्ष्मीदत्त जोशी को उक्त पुलिस अधिकारी ने बहुत परेशान किया था।
एससी/एसटी एक्ट का किया दुरुपयोग
उन पर एसटी एक्ट, गुंडा एक्ट लगाया गया और उसके वाहन का 10 हजार का चालान भी काटा। उसे आतंकित किया गया। अहम बात यह है कि 6 फरवरी 2023 को जिस दिन उनको नंगा कर पिटाई होने की शिकायत थी तो प्राधिकरण ने पाया कि एसपी कार्यालय की वीडियो फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गयी। जबकि कोतवाली से वीडियो फटेज मिल गयी थी। प्राधिकरण ने यह भी माना कि शिकायतकर्त्ता ने कोतवाली पुलिस पर कोई आरोप नहीं लगाया, जबकि एसपी कार्यालय के पुलिसकर्मियों पर ही आरोप लगाये गये थे।
बता दें कि लोकेश्वर सिंह के सशर्त इस्तीफा देने की बात सामने आ रही है, लेकिन प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि पुलिस विभाग ने प्राधिकरण को जो पत्र दिया है उसमें उन्हें छुट्टी पर बताया गया है। यह उल्लेखनीय है कि आईएएस-आईपीएस यदि सशर्त इस्तीफा देते हैं तो वो बाद में कभी भी दोबारा सर्विस ज्वाइन कर सकते हैं। प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एनएस धानिक, सदस्य दयाशंकर पांडे, पुष्पकज्योति, अजय जोशी और मोहन तिवाड़ी को इस फैसले के लिए साधुवाद। यह फैसला एक नजीर साबित होने जा रहा है।

















