हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था, आखिर हल्दीघाटी किसके नाम रही? जानें सच
August 3, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था, आखिर हल्दीघाटी किसके नाम रही? जानें सच

अलीगढ़ स्कूल ऑफ थॉट के इतिहासकारों ने हमारे साथ छल किया और सीधे-सीधे अकबर को विजेता घोषित कर दिया

Written byविवेक कुमार सिंहविवेक कुमार सिंह
Jun 18, 2026, 08:37 pm IST
in भारत, राजस्थान
महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास की सबसे प्रसिद्ध और शौर्यपूर्ण लड़ाइयों में से एक है। यह युद्ध 18 जून 1576 को नाथद्वारा के नजदीक हल्दीघाटी नाम की जगह पर लड़ा गया था। आज हल्दीघाटी युद्ध को 450 वर्ष हो गए हैं । इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था। हल्दीघाटी किसके नाम रही।

अलीगढ़ स्कूल ऑफ थॉट के इतिहासकारों ने हमारे साथ छल किया और सीधे-सीधे अकबर को विजेता घोषित कर दिया, क्योंकि उन्हें हिंदुओं को हारा हुआ दिखाना था। हमारे मन में एहसास-ए-कमतरी का भाव भरना था, ताकि हम भी यही मानने लगें कि हम सिर्फ हारे हैं। हमें ऐसा लगने लगे कि हम विजय योग्य हैं ही नहीं। लेकिन कहानी कुछ और है।

1572 में राणा उदय सिंह के देहांत के बाद कुंवर प्रताप मेवाड़ के नए महाराणा बनते हैं। उनका राज्याभिषेक होता है। राज्याभिषेक के बाद यह तय था कि एक दिन युद्ध अवश्य होगा। उसकी तैयारियां उन्होंने शुरू कर दीं। मेवाड़ी नागरिकों को अरावली की पहाड़ियों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे युद्ध के समय जान-माल का नुकसान कम हो। इसको बोलते हैं “स्कॉर्च्ड अर्थ पॉलिसी” – भूमि को बंजर बना दो, ताकि दुश्मन परेशान हो जाए और उसका जीवन संकट में पड़ जाए।

दूसरी तरफ अकबर अधिकांश राजपूताना को मुगल पताका के तले ले चुका था। मेवाड़ के उत्तर में बीकानेर, जयपुर; पूर्व में बूंदी; पश्चिम में जोधपुर – सभी धीरे-धीरे झुक गए और मुगलों के अधीनस्थ राज्य बन गए। अब सिर्फ मेवाड़ बचा था, और मेवाड़ के दक्षिण में गुजरात राज्य में गुजरात सल्तनत का शासन था। मेवाड़ को झुकाने के लिए, डराने के लिए अकबर ने साल 1572 में गुजरात को भी अपने अधीन कर लिया।

जब मेवाड़ के चारों तरफ थे जिहादी

अब जरा कल्पना कीजिए, क्या स्थिति रही होगी। मेवाड़ के चारों तरफ मुगल, चारों तरफ जिहादी। इसके बावजूद महाराणा प्रताप डिगे नहीं, डरे नहीं और युद्ध की तैयारियां जारी रखीं। गुजरात विजय के बाद अकबर ने महाराणा प्रताप के पास संधि प्रस्ताव भेजना शुरू कर दिया। एक के बाद एक चार संधि प्रस्ताव उनके पास भेजे गए।

सबसे पहले जलाल खान कोरची, फिर मान सिंह, उसके बाद राजा भगवान दास और अंत में राजा टोडर मल। लेकिन सबके सब विफल हुए। लेकिन मान सिंह वाला किस्सा बहुत मशहूर है। मान सिंह मेवाड़ पधारे और राणा ने उनके भोजन का इंतज़ाम किया, लेकिन खाने की मेज पर महाराणा स्वयं नहीं पहुंचे। उन्होंने कुंवर अमर सिंह को मान सिंह की आवभगत का जिम्मा दिया।

जब मान सिंह ने कहा, “अपने पिताश्री को बुलाओ”, तब उन्होंने कहा कि उनके पेट में दर्द है, इसलिए वे नहीं आ पाएंगे। आप शुरू करें। इसके बावजूद मान सिंह ने जोर दिया। अब मान सिंह समझ चुके थे कि मसला क्या है। इसी बीच राणा वहां आ पहुंचे और उन्होंने कहा, “तुम एक गद्दार राजपूत हो। तुम्हारे साथ मैं भोजन नहीं कर सकता, क्योंकि तुमने मुगलों के साथ वैवाहिक गठबंधन किया है।”

इस पर मान सिंह आग-बबूला होकर बोले, “अब मुकाबला मैदान में होगा।” तभी महाराणा के पीछे खड़े उनके सेनापति डोडिया भीम सिंह बोले, “अपने फूफा को भी साथ लेकर आना।” अपमान सहकर मान सिंह वहाँ से चले गए।

इसके बाद मान सिंह ने आगरा पहुंचकर पूरा किस्सा अकबर को सुनाया और एक बड़ी सेना लेकर 3 अप्रैल 1576 को अजमेर से उदयपुर की तरफ कूच कर दिया। मोलेला/खमनोर गांव के नजदीक मान सिंह ने कैंप लगाया और राणा मुगलों के पहले हमले का इंतजार करने लगे। बता दें कि मुगलों की फौज राणा प्रताप की फौज से काफी बड़ी थी, ज़्यादा संसाधनयुक्त थी।

क्या कहता है बदायूंनी

बदायूंनी के समकालीन विवरण के अनुसार, मुगल कमांडर मान सिंह ने युद्ध में 5,000 घुड़सवारों का नेतृत्व किया था। हालांकि मारवाड़ राज्य के मंत्रियों में से एक, मुहनोत नैणसी की बाद की रचना ‘नैणसी की ख्यात’ में कहा गया है कि उन्होंने 40,000 सैनिकों की कमान संभाली थी। और भी बाद की रचना, कविराज श्यामलदास की ‘वीर विनोद’ का दावा है कि मुगल सैनिकों की संख्या 80,000 थी।

प्रताप की सेना के आकार को लेकर भी स्रोतों में मतभेद है। विभिन्न स्रोतों का अध्ययन करने के बाद राजस्थान के बीसवीं सदी के इतिहासकारों में से एक, प्रोफेसर जी. एन. शर्मा का कहना है कि महाराणा प्रताप ने 3,000 घुड़सवारों, 2,000 पैदल सैनिकों, 150 हाथियों और 100 अन्य लोगों (जो ड्रमर, तुरही बजाने वाले और पाइक-मैन के रूप में काम करते थे) के साथ मुगल सेना का सामना किया।

हमेशा की तरह भील तीरंदाज महाराणा प्रताप की लड़ने वाली सेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। दोनों पक्षों की वास्तविक संख्या चाहे जो भी हो, यह स्पष्ट है कि प्रताप की मेवाड़ सेना की संख्या संभवतः अकबर द्वारा भेजी गई मुग़ल सेना से कम थी। 18 जून की सुबह दोनों सेनाएं हल्दीघाटी के दर्रे के नज़दीक एक-दूसरे से भिड़ती हैं।

बदायूंनी ने क्या लिखा

युद्ध के मैदान में अकबर की सेना के साथ इतिहासकार बदायूंनी भी था, जिसने आंखों देखा हाल अपनी किताब ‘मुन्तख़ब-उत-तवारीख़’ में लिखा है – “हमारी सेना के जो लोग पहले ही आक्रमण में भाग गए थे, वे तब तक नहीं रुके, जब तक कि वे नदी के पार 5-6 कोस आगे नहीं निकल गए।” बदायूंनी आगे लिखता है…. काजी खां नाम के एक मुगल सेनानायक का हाथ कट गया और युद्धस्थल से भागते हुए जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “जब दुश्मन हावी हो तो लड़ाई से भागना हमारे पैगम्बर की सुन्नत है | यह राणा का पराक्रम दिखाता है। इसी बीच राणा ने मान सिंह पर भाले से निशाना साधा, लेकिन वह बच निकला।

इस दौरान राणा को लगा कि उन्होंने मान सिंह को मार दिया है और उन्होंने तय किया कि वह युद्धभूमि से निकल जाएंगे। राणा मुगल सेना का ज़्यादा-से-ज़्यादा नुकसान कर चुके थे। उन्होंने तय किया कि वह अपनी सेना के साथ अरावली की पहाड़ियों में चले जाएंगे। उन्होंने अपना छत्र झाला मान सिंह के सिर पर रख दिया और वह 500 सैनिकों के साथ मैदान में डटे रहे, ताकि वह मुग़ल सेना को रोककर रख सकें। इस तरह बाकी सेना और राणा अरावली की पहाड़ियों में छिप गए और वहाँ से छापामार युद्ध जारी रखा। मुगल सेना बहुत विशाल थी, इसलिए यह निर्णय लिया गया कि खुले मैदान में लड़ने से बेहतर है कि अरावली की पहाड़ियों से युद्ध जारी रखा जाए।

मैदान जरूर मान सिंह के नाम रहा, लेकिन इस युद्ध में मुग़ल सेना को बहुत नुकसान हुआ। इसकी तस्दीक खुद बदायूंनी अपनी पुस्तक में करता है। मुगल सेना 18 जून के बाद कुछ दिनों तक मेवाड़ में डटी रही, लेकिन उनके लिए वहां रुकना मुश्किल हो गया था, क्योंकि “स्कॉर्च्ड अर्थ पॉलिसी” के तहत राणा की फ़ौज पहले ही सब बर्बाद कर चुकी थी। यही राणा की सोच थी कि भूमि को बंजर बना देंगे, ताकि मुगलों को यहां कुछ न मिले।

डरी हुई थी मुगल सेना

18 जून के बाद मुगल सेना जब तक मेवाड़ में रही, उन्हें डर ही सताता रहा कि पहाड़ों से कोई सैनिक निकलेगा और उन्हें मार डालेगा। इसी बीच अकबर ने मान सिंह और मुगल सेना को वापस बुला लिया। राणा की छोटी-सी सेना ने मुगलों की बड़ी फ़ौज का क्या हाल किया, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध के बाद अकबर मान सिंह से बहुत नाराज था। उसने राजा मान सिंह के दरबार में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी।

कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध की तुलना थर्मोपाइली के युद्ध से की है। थर्मोपाइली तटीय ग्रीस में एक घाटी है, जहां ग्रीक सेना ने 480 ईसा पूर्व में फारसी आक्रांताओं का सामना किया था। थर्मोपाइली के युद्ध में ग्रीक राजा लियोनाइडस नायक के रूप में उभरे थे।

फारसी सेना के आगे जैसे ग्रीक सेना संख्या में बेहद कम थी, वैसे ही मेवाड़ की सेना मुग़ल सेना के सामने बहुत कम थी। हल्दीघाटी के युद्ध से प्रताप नायक बनकर उभरे तथा ‘हिंदुआ सूरज’ की उपाधि से विभूषित हुए और वे साहस तथा शौर्य के जीवंत प्रतीक बन गए। लेकिन यहां यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि 480 ईसा पूर्व थर्मोपाइले के युद्ध (Battle of Thermopylae) में स्पार्टा के राजा लियोनिडास फारसी सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे और पराजित भी हुए थे, जबकि महाराणा प्रताप नहीं।

1576 के बाद 1583 में अंतिम और निर्णायक युद्ध हुआ — देवर (दिवेर) का युद्ध, जिसमें मुग़लों की बड़ी हार हुई। लेकिन इस युद्ध को जिहादी सोच के इतिहासकारों ने छिपा दिया। इस युद्ध के बाद 1597 तक, जब तक राणा प्रताप जीवित रहे, मुग़लों ने मेवाड़ की ओर रुख नहीं किया।

राणा के स्वर्ग सिधारने के बाद इस विरासत को उनके सुपुत्र ने ज़िंदा रखा और वे मुग़लों से लड़ते रहे।

Topics: मेवाड़ का संघर्षहल्दीघाटी युद्ध के 450 साल18 जून 1576अकबरहल्दीघाटीमहाराणा प्रतापमेवाड़ का इतिहासहल्दीघाटी का युद्ध
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

महाराणा प्रताप का जीवन लोककल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है : सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत

महाराणा प्रताप और आक्रांता अकबर

आक्रान्ता मुगलों पर विजय का प्रतीक था हल्दीघाटी युद्ध

Haldighati Vijay 450th Anniversary Celebration Udaipur Pratap Gaurav Kendra Prof Bhagwati Prakash Sharma

2 लाख पत्रक, 25,000 भोजन पैकेट : प्रो. बीपी शर्मा ने दी ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ की व्यवस्थाओं सहित सम्पूर्ण जानकारी

Haldighati Battle History Maharana Pratap Victory Evidence Akbar Mughal Army

हल्दीघाटी युद्ध का असली सच: अकबर के सेनापतियों को मिली थी सजा? इन 3 सबूतों से समझें महाराणा प्रताप की महाविजय!

महाराणा प्रताप जयंती : स्वाभिमानी अडिग प्रताप

महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

महान प्रताप हैं, अकबर नहीं : इस्लामी आक्रांता को लेकर जानिये कैसे फैलाया गया झूठ

Load More

ताज़ा समाचार

Sangamner FDA Raid Made in Pakistan Cosmetics Gori Cream Seized Ahilyanagar Panchjanya

अहिल्यानगर के गोल्डन मार्केट से ‘मेड इन पाकिस्तान’ सामान और खतरनाक गोरी क्रीम बरामद, शाहिद रियाज शेख गिरफ्तार

Sheikh Hasina Press Conference Delhi

“5 अगस्त को पहली बार मीडिया के सामने आएंगी शेख हसीना”: दिल्ली में बांग्लादेश वापसी की रणनीति पर होंगे बड़े ऐलान!

Bangladesh Army New Cantonment Naikhongchhari Silkhali Base India Mizoram Border General Waker Uz Zaman Turkey Drone Panchjanya

भारत सीमा पर बांग्लादेश की बड़ी सैन्य घेराबंदी: नाइखोंगछारी में बना रहा छावनी, तैनात किए तुर्की से लिए हथियार!

British Museum 11th Century Maa Saraswati Vagdevi Idol Return Bhojshala Dhar Haryana Saraswati Board Panchjanya

लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम से भारत वापस आएगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भोजशाला से जुड़ा है इतिहास!

CM Pushkar Singh Dhami Mahendra Bhatt Dehradun Dayitvdhari Meeting Panchjanya

देहरादून में बोले CM धामी- ‘दायित्वधारी सरकार और जनता के बीच सेतु’, समस्याओं के समाधान में निभाएं सक्रिय भूमिका!

VHP International Joint General Secretary Dr Surendra Jain Jodhpur Press Conference Waqf Board Scam Panchjanya

“सीमांत अतिक्रमण हटाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी”: VHP ने की राजस्थान वक्फ बोर्ड CEO को हटाने की मांग, जानिए कारण

Ratnagiri Silent March Gen Z Samvidhan Samman Manch Maruti Mandir Ambedkar Statue

सनातन और सेना के अपमान पर भड़का आक्रोश: रत्नागिरी में Gen Z युवाओं ने निकाली विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’!

Dattatreya Hosabale RSS General Secretary NSE Mumbai Viksit Bharat Education Seminar Panchjanya

हम कोई फैक्ट्री नहीं, सभ्यता बना रहे हैं: मुंबई में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने दिया विकसित भारत पर बड़ा संदेश

3 अगस्त का पंचांग

3 अगस्त का पंचांग: जानें ग्रह स्थिति, तिथि, नक्षत्र और शुभ समय

विचार के नाम पर खाली, होठों पर बस गाली

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies