उदयपुर। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने घोषणा की है कि आगामी 17 जून 2026 को प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के तत्वावधान में आयोजित होने जा रहा ‘हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती समारोह’ (450वीं वर्षगांठ) केवल एक स्मृति आयोजन नहीं है। यह राष्ट्र के ऐतिहासिक विमर्श को पुनः स्थापित करने का एक देशव्यापी महाअभियान है, जो विमर्श परिवर्तन की एक सशक्त राष्ट्र गर्जना बनेगा।
यह भव्य समारोह देश और विश्व के समक्ष उन अकाट्य ऐतिहासिक तथ्यों को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करेगा, जिन्हें लंबे समय तक विकृत अथवा मिथ्या रूप में प्रचारित किया जाता रहा। महाराणा भूपाल स्टेडियम (गांधी ग्राउंड) में प्रातः 9:30 बजे होने वाली इस विशाल ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे।
“साढ़े चार सौ वर्षों के मिथ्या नैरेटिव का होगा अंत, महाराणा की विजय अकाट्य”
प्रो. शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि पिछले साढ़े चार सौ वर्षों से सुनियोजित ढंग से यह मिथ्या नैरेटिव प्रचारित किया जाता रहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की विजय हुई थी। वस्तुतः यह स्थापित ऐतिहासिक साक्ष्यों के पूर्णतः विपरीत एक भ्रम था। यह समारोह इस भ्रम का समूल निराकरण करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सत्य स्थापित करेगा कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप की निर्णायक विजय का प्रतीक था और अकबर की साम्राज्यवादी सेना यहाँ बुरी तरह पराजित होकर वापस लौटी थी।
“युद्ध के बाद का यथार्थ मुगलों की पराजय को स्वयं सिद्ध करता है। मानसिंह के नेतृत्व वाली मुगल सेना गोगुंदा के किले में इस कदर भयभीत और असुरक्षित थी कि सैनिकों ने चारों तरफ खाइयां खोदीं और बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पाए। रसद संकट इतना गहरा गया था कि मुगलों को उन घोड़ों का मांस खाना पड़ा जिनके सवार मारे जा चुके थे। भोजन के अभाव में कच्ची केरियां खाने से सैनिक बीमार पड़ गए, परंतु वे ४ महीने तक किले से बाहर रसद जुटाने नहीं आ सके। जब सेना आगरा लौटी, तो अकबर ने नाराज होकर मानसिंह की ड्योढ़ी माफ कर दी और छह माह तक दरबार में प्रवेश बंद कर दिया। भला कोई राजा अपनी जीती हुई सेना के सेनापति को ऐसी सजा देता है?” – प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा
व्यवस्थाओं और निमंत्रण का व्यापक खाका
समारोह को भव्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए प्रशासनिक और सांगठनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। कार्यक्रम से जुड़े मुख्य आंकड़े निम्नलिखित तालिका में देखे जा सकते हैं:
आयोजन का आयाम | तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का सांख्यिकीय विवरण |
|---|---|
| अनुमानित जनसमूह | लगभग 25 से 30 हजार देशभक्त नागरिक |
| विशाल सुसज्जित डोम | करीब 2 लाख वर्गफुट क्षेत्रफल में फैला सुसज्जित और वाटरप्रूफ पंडाल |
| बैठक क्षमता | विभिन्न ब्लॉकों में 20 हजार से अधिक कुर्सियों की सीधी व्यवस्था |
| गौरव गाथा पत्रक वितरण | 2 लाख प्रामाणिक पत्रक (राजस्थान, गुजरात व म.प्र. के जिलों में वितरित) |
| आमंत्रित पूज्य संत-महात्मा | 1,000 से अधिक संतों को विशेष रूप से आमंत्रण |
| प्रबुद्धजन एवं विशिष्ट अतिथि | विभिन्न समाजों के 5,000 प्रबुद्धजन और देश भर से 500 से अधिक समाजसेवी |
| महाप्रसाद (भोजन पैकेट) | बाहर से आने वाले वाहनों के लिए 25,000 से अधिक भोजन पैकेट की व्यवस्था |
मुख्य आकर्षण: पहली बार हल्दीघाटी की पावन माटी से बनेगी जीवंत तस्वीर
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना और सोशल मीडिया टीम के अनुसार, इस ऐतिहासिक अवसर को चिरस्मरणीय बनाने के लिए कई अनूठे और रचनात्मक प्रयोग किए जा रहे हैं:
- माटी से कलाकृति: विख्यात कलाकार मनोहर कलार्थी द्वारा पहली बार हल्दीघाटी की मूल वीर माटी का उपयोग करके महाराणा प्रताप और सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत की एक भव्य और अनूठी तस्वीर बनाई जा रही है।
- ऐतिहासिक प्रतिकृतियां: मुख्य मंच के ठीक सामने मिट्टी और पारंपरिक कला के माध्यम से अभेद्य कुम्भलगढ़ और चित्तौड़गढ़ दुर्ग की जीवंत प्रतिकृतियां (Replicas) बनाई जाएंगी, साथ ही हल्दीघाटी महासमर के दृश्यों का अंकन होगा।
- मेवाड़ शौर्य प्रदर्शनी: प्रदर्शनी प्रमुख डॉ. रमन सूद ने बताया कि स्टेडियम में 15 जून से ही तीन दिवसीय ‘मेवाड़ शौर्य प्रदर्शनी’ शुरू हो जाएगी, जिसमें चित्रों और ऐतिहासिक विवरणों के माध्यम से मेवाड़ के वीरों और वीरांगनाओं के शौर्य को दर्शाया जाएगा।
अभेद्य लॉजिस्टिक्स, मेडिकल रूट और पूरी तरह ‘इको-फ्रेंडली’ आयोजन
कार्यक्रम के संयोजक सीए महावीर चपलोत ने बताया कि निर्बाध संचालन के लिए 20 से अधिक विशेष कमेटियां (आवास, यातायात, मंच सज्जा, सुरक्षा, भोजन वितरण आदि) दिन-रात कार्य कर रही हैं। प्रशासन और प्रबंधकों ने सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम किए हैं:
प्रवेश एवं पार्किंग रूट व्यवस्था
आम आगंतुकों का प्रवेश पहाड़ी बस स्टैंड के द्वार से रहेगा। गुरु गोविन्द सिंह स्कूल की ओर से विशिष्ट अतिथियों (VIP) तथा लवकुश स्टेडियम की ओर से अतिविशिष्ट अतिथियों (VVIP) का प्रवेश तय किया गया है। उदयपुर संभाग व बाहर से आने वाले वाहनों की पार्किंग विद्या भवन, फतह स्कूल और फील्ड क्लब परिसर में रहेगी। पार्किंग स्थलों से मुख्य मैदान तक बुजुर्गों व अतिथियों को लाने-ले जाने के लिए बड़ी संख्या में ई-रिक्शा (E-Rickshaw) तैनात रहेंगे।
अत्याधुनिक कूलिंग और हाइड्रेसन
भीषण गर्मी को देखते हुए पूरे डोम में हाई-टेक पंखे, मिस्ट कूलिंग सिस्टम (Mist System) और जगह-जगह ठंडे पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। भोजन व्यवस्था प्रमुख नानालाल वया और वितरण प्रमुख धीरज बोड़ा के अनुसार, लौटते समय सभी वाहनों में ही भोजन के पैकेट सीधे सुपुर्द किए जाएंगे।
विशेष महिला चिकित्सकों की मेडिकल टीम
चिकित्सा व्यवस्था समिति के प्रमुख डॉ. राजवीर सिंह के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस एम्बुलेंस तैनात रहेगी। आरएनटी (एमबी) हॉस्पिटल से विशेषज्ञ चिकित्सक, रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ की एक इमरजेंसी टीम सक्रिय रहेगी। संवेदनशीलता के लिहाज से प्रत्येक मेडिकल टीम में एक महिला चिकित्सक का होना अनिवार्य किया गया है।
सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध
प्रकृति संरक्षण के संदेश को धरातल पर उतारते हुए पूरा आयोजन पूरी तरह से सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त रहेगा। वीआईपी और मंचासीन अतिथियों के लिए पानी पीने के लिए मिट्टी की कलात्मक बोतलों का उपयोग किया जाएगा, वहीं पूरे स्टेडियम में कचरा संग्रहण के लिए रखे जाने वाले कूड़ेदान (Dustbins) भी मिट्टी के बने होंगे। संपूर्ण उदयपुर नगरी को भगवा पताकाओं से सजाया जा रहा है और चारों तरफ देशभक्ति के गीत गुंजायमान हैं।













