हल्दीघाटी युद्ध का असली सच: तथ्यों से समझें महाराणा प्रताप की महाविजय!
June 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

हल्दीघाटी युद्ध का असली सच: अकबर के सेनापतियों को मिली थी सजा? इन 3 सबूतों से समझें महाराणा प्रताप की महाविजय!

हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576) केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि स्वाभिमान का प्रतीक था। समकालीन स्रोतों, मुगल इतिहासकार बदायूंनी के विवरण और बलीचा गांव के ताम्रपत्र जैसे अकाट्य पुरातात्विक प्रमाणों से जानिए कैसे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने अकबर की साम्राज्यवादी सेना पर निर्णायक विजय प्राप्त की थी।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jun 12, 2026, 05:27 pm IST
in भारत, राजस्थान
Haldighati Battle History Maharana Pratap Victory Evidence Akbar Mughal Army

चित्र प्रतीकात्मक है, जिसे AI की मदद से बनाया गया है.

हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576) महाराणा प्रताप और अकबर की मुगल सेना के बीच लड़ा गया वह ऐतिहासिक महासंग्राम था, जो आज भी इतिहासकारों के बीच गहन विमर्श का विषय है। यह युद्ध सिर्फ तलवारों की भिड़ंत नहीं था, बल्कि स्वाभिमान, अद्वितीय युद्ध रणनीति और अटूट आत्मबल का असाधारण प्रतीक था।

परंतु, एक प्रश्न आज भी अक्सर आम जनमानस के मन में कौंधता रहता है कि- आखिर हल्दीघाटी युद्ध में किसकी जीत हुई थी?

आधुनिक दौर में सामने आए नए ऐतिहासिक तथ्यों, समकालीन स्रोतों एवं ताम्रपत्रों जैसे पुरातात्विक प्रमाणों का निष्पक्ष विश्लेषण करने पर यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि हल्दीघाटी युद्ध में निर्णायक विजय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की हुई थी। आइए विस्तार से समझते हैं इस विजय गाथा का पूरा सच।

हल्दीघाटी युद्ध की पृष्ठभूमि: स्वाभिमान बनाम साम्राज्यवादी जिहादी नीति

हल्दीघाटी का युद्ध ऐसे समय में लड़ा गया, जब महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की गद्दी संभाली ही थी। दूसरी ओर, दिल्ली का शासक अकबर अपने राज्य विस्तार और साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए लगातार कूटनीतिक चालें चल रहा था। अकबर अपनी जिहादी साम्राज्यवादी नीति एवं व्यापारिक मार्गों को सुगम बनाने के लिए सभी राजपूत राजाओं को अपने अधीन करने का प्रयास कर रहा था।

परंतु, अभेद्य मेवाड़ उसके इस मंसूबे में सबसे बड़ी बाधा था। महाराणा प्रताप के शासन में आने के पूर्व से ही उनके पिता महाराणा उदय सिंह भी अकबर के आगे कभी नहीं झुके थे। 1572 ईस्वी में महाराणा प्रताप के राज्याभिषेक के उपरांत अकबर ने उन्हें झुकाने के लिए चार बार अपने विशेष दूतों को संधि का संदेश लेकर भेजा-

  • अगस्त 1572 ईस्वी: जलाल खान
  • अप्रैल 1573 ईस्वी: कुंवर मानसिंह
  • सितंबर 1573 ईस्वी: आमेर के राजा भगवंतदास
  • दिसंबर 1573 ईस्वी: टोडरमल खत्री

इन संधियों की शर्तों में अकबर के दरबार में हाजिरी लगाना, मुगलों को भारी टैक्स (कर) देना एवं मेवाड़ की बहन-बेटियों के मुगलों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने जैसी अपमानजनक बातें सम्मिलित थीं। स्वाभिमानी महाराणा प्रताप को यह कतई स्वीकार्य नहीं था। इसलिए उन्होंने गुलामी की संधि के बजाय युद्ध के कंटीले मार्ग को चुना।

अकबर ने इस बात से बौखलाकर अपने सेनापति आमेर के कुंवर मानसिंह को आदेश दिया था कि महाराणा प्रताप को किसी भी हाल में ‘जिंदा या मुर्दा’ पकड़कर उसके सामने पेश किया जाए।

3 चरणों का महासंग्राम: 5 घंटे में ही बिखर गई मुगल सेना

18 जून 1576 के दिन शुरू हुआ यह भीषण युद्ध लगभग 5 घंटे तक चला, जिसे मुख्य रूप से तीन चरणों में समझा जा सकता है:

1. प्रथम चरण (सुबह 8 बजे के बाद)

हल्दीघाटी के मुहाने से मेवाड़ की सेना ने मुगलों पर प्रचंड आक्रमण किया। हरावल के वाम पार्श्व (बाएं भाग) से अफगान सेनापति हकीम खां सूर अपने जांबाज सैनिकों के साथ आगे बढ़े और मुगल सेना के दक्षिण पार्श्व पर काल बनकर टूट पड़े। इस पहले ही धक्के में मुगल सेना पूरी तरह बिखर गई और डर के मारे करीब 5 से 7 कोस दूर बनास नदी के दूसरी ओर भाग खड़ी हुई।

2. द्वितीय चरण

मुगल सेना के पैर उखड़ने के बाद अगला युद्ध हल्दीघाटी के मुहाने से करीब सवा कोस की दूरी पर हुआ। यहाँ पर मुगल सैनिकों के स्थान पर कछवाहों के राजपूत सैनिक मेवाड़ की सेना के सामने थे। मेवाड़ की सेना के जबरदस्त दबाव और भीषण प्रहारों के आगे मुगलों की यह राजपूत टुकड़ी भी टिक नहीं सकी और करीब पौन कोस पीछे हटते हुए बनास के दक्षिणी किनारे तक भागने पर मजबूर हो गई।

3. अंतिम चरण (दोपहर बाद)

पूरी तरह बिखर चुकी मुगल सेना ने मिहतर खां के नेतृत्व में अंतिम बार मोर्चा संभालने का प्रयास किया। इसी दौरान मेवाड़ की युद्ध नीति के अनुसार, जब महाराणा प्रताप के प्राणों पर संकट आया तो झाला मानसिंह (झाला बीदा) ने प्रताप का मुकुट, रक्षाकवच व तलवार खुद धारण कर ली। महाराणा प्रताप अपने घायल और स्वामीभक्त घोड़े चेतक के साथ सुरक्षित युद्ध क्षेत्र से बाहर निकल गए, ताकि पहाड़ों की कंदराओं से छापामार युद्ध जारी रखा जा सके और गोगूँदा को सुरक्षित किया जा सके। झाला बीदा वीरता से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और दोपहर बाद युद्ध थम गया।

मुगल इतिहासकार अलबदायूंनी का आँखों देखा सच

मुगल सेना इस युद्ध में किस कदर डरी हुई थी, इसका सबसे बड़ा प्रमाण स्वयं अकबर की सेना का हिस्सा रहे और इस युद्ध को अपनी आँखों से देखने वाले इतिहासकार अलबदायूंनी ने अपनी पुस्तक ‘मुन्तखाब उल तवारीख’ में दिया है। बदायूंनी लिखता है कि युद्ध के मैदान से हटने के बाद भी मुगल सेना ने महाराणा प्रताप का पीछा नहीं किया। उसने इसके तीन मुख्य कारण बताए हैं:

  • घात का भय: मुगलों के मन में यह खौफ बैठ गया था कि प्रताप पहाड़ों में घात लगाए बैठे हैं और अचानक होने वाले हमले से भारी संख्या में मुगल सैनिकों की जान चली जाएगी।
  • झुलसाने वाली गर्मी: जून माह की झुलसाने वाली तेज धूप और भीषण गर्मी।
  • अत्यधिक थकान: मुगलों की सेना मानसिक और शारीरिक रूप से इतनी थक चुकी थी कि उसमें पुनः युद्ध करने की क्षमता ही नहीं बची थी।

मेवाड़ की सेना के इस भीषण संघर्ष ने मुगलों में ऐसा खौफ पैदा कर दिया था कि भयाक्रांत मुगल सेना को कई दिनों तक गोगूँदा में कैदियों की तरह डेरा डाल कर सहमे हुए रहना पड़ा था।

अकाट्य प्रमाण: महाराणा प्रताप ही थे असली विजेता

सैन्य विज्ञान और इतिहास के नियमों के अनुसार, किसी भी युद्ध में जीत या हार तय करने के लिए तीन कसौटियां सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जिन पर यह स्पष्ट हो जाता है कि विजेता कौन था:

जीत की ऐतिहासिक कसौटीहल्दीघाटी युद्ध का वास्तविक यथार्थ और परिणाम
1. धन संपदा अथवा भूमि पर अधिकारअकबर की सेना मेवाड़ की एक इंच जमीन पर भी अपना स्थायी नियंत्रण नहीं बना सकी और न ही उन्हें कोई खजाना हाथ लगा।
2. विरोधी राजा को मारना या बंदी बनानाअकबर का मुख्य उद्देश्य प्रताप को ‘जिंदा या मुर्दा’ पकड़ना था, जिसमें मुगल पूरी तरह असफल रहे। प्रताप सुरक्षित रहकर मुगलों के खिलाफ लड़ते रहे।
3. पराजित राज्य द्वारा अधीनता स्वीकार करनामेवाड़ ने कभी भी अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और न ही मुगलों को कभी कोई टैक्स (कर) दिया।

ऐतिहासिक और प्रशासनिक परिणाम

हल्दीघाटी के परिणाम मुगलों के पूरी तरह प्रतिकूल रहने के कारण ही अकबर ने अत्यधिक नाराज होकर अपने सेनापति मान सिंह और आसफ खान दोनों की ड्योढ़ी (दरबार में आने पर पाबंदी) कम कर दी थी। भला कोई राजा अपनी जीती हुई सेना के सेनापतियों को ऐसी सजा क्यों देगा?

इसके विपरीत, युद्ध के तुरंत बाद महाराणा प्रताप ने अपनी संप्रभुता को सिद्ध करते हुए ब्राह्मणों को भूमिदान दिया था, जिसका सबसे बड़ा पुरातात्विक प्रमाण हल्दीघाटी के निकट स्थित बलीचा गांव का ताम्रपत्र है। इस युद्ध ने मुगलों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ दिया और देश की अन्य शक्तियों को विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ पुनः खड़े होने की प्रेरणा दी। महाराणा प्रताप इस युद्ध के बाद संपूर्ण राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता, स्वाभिमान और निरंतर संघर्ष के अमर प्रतीक बन गए।

Topics: अलबदायूंनी मुन्तखाब उल तवारीखबलीचा गांव ताम्रपत्रझाला मानसिंह झाला बीदामहाराणा प्रतापhistory of Mewarहल्दीघाटी युद्ध का सचPanchjanya AnalysisHaldighati Battle Historyअकबर की मुगल सेना
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Three Language Formula NEP 2020 India Education System

मैकाले की कक्षा से बहुभाषी भारत तक: समझें त्रिभाषा सूत्र की प्रासंगिकता

Social Media Double Standard Sejal Pawar 370 Biryani Controversy

सेजल पवार और 370 बिरयानी विवाद : दोहरा मापदंड और जब फेम का खेल कानून और समाज पर भारी पड़ने लगे

2026 Election Results BJP Win West Bengal Assam

बंगाल में प्रचंड बहुमत, असम में हैट्रिक और केरल-पुडुचेरी में वामपंथ का अंत; जानें 5 राज्यों के नतीजों का सटीक विश्लेषण

Congress Strategy Bengal Election 2026 and UP 2027 Target

ममता से ‘दुश्मनी’ और अखिलेश को ‘चेतावनी’? बंगाल चुनाव में कांग्रेस की इस चाल ने उड़ाई इंडी गठबंधन की नींद!

चावंड का किला और उसके अंदर बना एक मंदिर

हल्दीघाटी युद्ध विजय@450 वर्ष : स्थापत्य एवं कला-प्रेमी प्रताप

भील समुदाय महाराणा प्रताप का अनन्य सहयोगी रहा

हल्दीघाटी युद्ध विजय@450 वर्ष : मेवाड़ के राणा सबके महाराणा

Load More

ताज़ा समाचार

UK Peterborough Council Bharat Hindu Samaj Temple Land Sale UKIM Court Case

ब्रिटेन में हिंदू आस्था पर प्रहार: शहर के एकमात्र मंदिर की जमीन मजहबियों को बेची, ब्रिटिश हाईकोर्ट में कहा- गैरकानूनी!

Haldighati Battle History Maharana Pratap Victory Evidence Akbar Mughal Army

हल्दीघाटी युद्ध का असली सच: अकबर के सेनापतियों को मिली थी सजा? इन 3 सबूतों से समझें महाराणा प्रताप की महाविजय!

13 जून का पंचांग

13 जून पंचांग: जानें इस दिन ग्रहों की अनोखी स्थिति और इसका प्रभाव

Stone-pelting incident on Shatabdi Express in Firozabad solved

फिरोजाबाद: 10 पुलिस टीमें, 50+ CCTV फुटेज से खुलासा, कूड़ा बीनने वालों ने किया Shatabdi Express पर पथराव, 2 हिरासत में

ममता बनर्जी (फोटो साभार: गोर्क)

TMC प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ हेट स्पीच से जुड़े मामले में FIR

Inauguration of the central office of the Rashtra Chetna Sankalp Sabha

राष्ट्र चेतना संकल्प सभा: 30 हजार लोगों के लिए 2 लाख वर्गफीट का बना रहा डोम, युद्ध स्तर पर जारी हैं तैयारियां

RSS Uttar Assam Prant Annual Meeting Tinsukia Kishore Shivam

RSS Uttar Assam Prant : उत्तर असम प्रांत की वार्षिक योजना बैठक तिनसुकिया में शुरू, जानें क्या है मुख्य एजेंडा

बहुआयामी वीर सावरकर : कहानियों से झलकता वैचारिक प्रबोधन

conversion

सीतापुर: पैसे का लालच देकर धर्मांतरण की कोशिश, 3 लोग गिरफ्तार

Vijnana Bharati 7th National Session BHU Varanasi CM Yogi Adityanath

BHU में विज्ञान भारती का 7वां राष्ट्रीय अधिवेशन : कल सीएम योगी करेंगे उद्घाटन, जुटेंगे देश-विदेश के 1200 वैज्ञानिक

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies