मानसून से पहले ही लबालब भरने लगा भाखड़ा बांध, फिर भी पर्यावरणविद् चिंतित क्यों?
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होम भारत पंजाब

मानसून से पहले ही लबालब भरने लगा भाखड़ा बांध, फिर भी पर्यावरणविद् चिंतित क्यों?

भाखड़ा बांध का जलस्तर सामान्य से 21 फीट ऊपर पहुंच गया है। मानसून से पहले BBMB ने पंजाब और हरियाणा को ज्यादा पानी छोड़ने की सलाह दी है। जलवायु परिवर्तन, धान की बिजाई और बाढ़ प्रबंधन को लेकर बढ़ती चुनौतियों पर विस्तृत रिपोर्ट।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by कुलदीप सिंह
Jun 13, 2026, 01:44 pm IST
inपंजाब

मानसून से पहले ही गले तक भर चुके भाखड़ा बांध ने एक नई चुनौती पैदा कर दी है। आशंका है कि बरसात के दिनों में यहां पर पहाड़ों से एकत्रित होने वाला पानी मैदानी इलाके में परेशानी पैदा कर सकता है। इसको लेकर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब और हरियाणा को भाखड़ा जलाशय से ज्यादा पानी निकालने की सलाह दी है। निश्चित रूप से इस सलाह को उत्तर भारत क्षेत्र में पानी के प्रबंधन से जुड़ी बढ़ती मुश्किलों के प्रति एक चेतावनी के रूप में देखी जानी चाहिए।

बोर्ड की सलाह के कई मायने

निस्संदेह, यह सलाह रोजमर्रा के परिचालन से जुड़ा मामला भी नहीं है। इसे व्यापक संदर्भों में देखें तो लगातार बढ़ती जलवायु की अनिश्चितता, खेती से जुड़े ऐसे तौर-तरीकों, जिनका दीर्घकालीन उपयोग नहीं किया जा सकता है, के बाबत यह सलाह चेताती है। निश्चित रूप से यह सलाह यह भी बताती है कि पंजाब व हरियाणा में पानी के बेहतर उपयोग को लेकर सहमति न बनने से भी इस तरह की स्थितियां पैदा होती हैं।

जलस्तर सामान्य से 21 फीट ऊंचा

बांध प्रबंधन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि भाखड़ा जलाशय का जलस्तर फिलहाल पिछले साल में इसी अवधि के दौरान के जलस्तर के मुकाबले 21 फीट अधिक है। वहीं दूसरी ओर जलाशय के अधिकतम जलस्तर तक पहुंचने में अब सिर्फ 102 फीट की जगह ही बची है। निश्चित रूप से इस दिशा में समय रहते ही अविलंब कार्रवाई करनी होगी। अन्यथा मानसून के आने के साथ वैकल्पिक उपायों की गुंजाइश भी लगातार कम होती जाती है।

जलवायु परिवर्तन का असर?

जलवायु परिवर्तन के गहरे होते प्रभावों के चलते हिमालयी पर्वत शृंखला में अधिक बर्फ के पिघलने की बढ़ती गति और बारिश के पैटर्न में लगातार आ रहे बदलाव के कारण ही जलाशय के जलस्तर में तेजी से बदलाव आने की आशंका भी बनी रहती है। यही वजह है कि इन तमाम आशंकाओं के मद्देनजर ही अविलंब नीतिगत फैसले लेने की सख्त जरूरत है।

मैदानों में धान की बिजाई में जरूरत के बावजूद अतिरिक्त पानी की समस्या

यह विडंबना ही है कि यह चुनौती पंजाब में ऐसे समय में आ रही है, जब धान की रोपाई का मौसम चल रहा है। हालांकि, राज्य में सरकार ने पानी के बेहतर इस्तेमाल के मद्देनजर धान की खेती का कैलेंडर एक जून तक के लिये आगे बढ़ा दिया था। यह भी गौरतलब है कि आज भी पंजाब के बड़े इलाकों में खेती काफी हद तक भूजल पर ही निर्भर है। जिस सीमा तक नहरों के नेटवर्क का अधिकतम उपयोग होना चाहिए था, वह अभी भी नहीं हो पा रहा है। निस्संदेह, जब तक सतही पानी का सही तरीके से बंटवारा नहीं होता है तब तक जलाशयों में ज्यादा पानी जमा करके रखना पड़ेगा। जिसके चलते अचानक आने वाले पानी को संभालने के लिये जरूरी बाढ़ बचाव क्षमता कम हो जाती है।

बाढ़ से नहीं लिया कोई सबक

हमें गत वर्ष में पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ से मिले सबक को नहीं भूलना चाहिए। तब पानी छोडऩे में कथित देरी और जलाशयों के संचालन को लेकर हुए तमाम विवादों ने राजनीतिक कड़वाहट को बढ़ाया ही था। साथ ही सरकार की बाढ़ से निबटने की तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हुए थे। जब बांध प्रबंधन की बात करते हैं तो इसका मकसद सिर्फ बिजली उत्पादन ही नहीं हो सकता। तब बाढ़ को नियंत्रित करना भी उतना ही जरूरी मकसद होना चाहिए। ऐसे वक्त में हमें जरूरी कामों की प्राथमिकताएं तय करनी होंगी। सिंचाई विभाग को सुनिश्चित करना ही होगा कि नहर का पानी किसानों को समय पर मिले। खासकर उन किसानों को जिनके खेत नहर के अंतिम छोर पर स्थित हैं। इससे हमारी जमीन के ऊपर मौजूद पानी के स्रोतों पर निर्भरता ज्यादा बढ़ेगी। साथ ही इन कदमों से जमीन के भीतर के पानी के भंडारों पर दबाव भी कम हो सकेगा।

राज्यों को परस्पर सहयोग बढ़ाना होगा

इसके साथ ही, सहयोगी राज्यों के साथ जलाशयों के कामकाज में पारदर्शिता और दूरदर्शिता के साथ तालमेल बैठाना होगा। पानी की भरपूर उपलब्धता से मुश्किल हालात का सामना करने की क्षमता बढऩी चाहिए, न कि जोखिम को बढ़ावा दिया जाए। आज जलाशयों में जगह खाली करना भविष्य में मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं से निबटने के लिये सबसे अच्छा उपाय साबित हो सकता है। पंजाब के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश व हरियाणा में पिछले दो-तीन दिनों से हो रही बरसात ने इस समस्या को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

 

Topics: भाखड़ा बांधभाखड़ा जलाशय जलस्तरहिमालयी ग्लेशियर पिघलनामानसून से पहले भाखड़ा डैम फुल
राकेश सैन
राकेश सैन
वरिष्ठ पत्रकार। पंजाब के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन। [Read more]
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