PM मोदी के 12 वर्ष: रणनीतिक शासन से कैसे बदला देश का रक्षा बजट? परमाणु ब्लैकमेलिंग खत्म कर बनाई भारत की नई सैन्य पहचान!
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PM मोदी के 12 वर्ष: रणनीतिक शासन से कैसे बदला देश का रक्षा बजट? परमाणु ब्लैकमेलिंग खत्म कर बनाई भारत की नई सैन्य पहचान!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर जानिए उनके रणनीतिक शासन का पूरा रोडमैप। ओआरओपी (OROP), सीडीएस की नियुक्ति, थिएटर कमांड और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए कैसे बदला भारत का सैन्य कद। पढ़ें विशेष विश्लेषण

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत) — edited by Shivam Dixit
Jun 12, 2026, 07:47 pm IST
in भारत, रक्षा, विश्लेषण, मत अभिमत

भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री (4399 दिन और जारी) के साथ-साथ मई 2014 से लगातार 12 वर्षों तक केंद्र में एनडीए सरकार का नेतृत्व करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को हार्दिक बधाई। राज्य स्तर पर (अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में) और उसके बाद 26 मई 2014 से भारत के प्रधानमंत्री के रूप में भारतीय राजनीति में इस तरह का रिकॉर्ड श्री नरेंद्र मोदी के लिए एक दुर्लभ उपलब्धि है। भारत के उदय के लिए, विशेष रूप से एक प्रमुख सैन्य शक्ति के रूप में और रणनीतिक दृष्टिकोण से ऐसे स्थायी प्रदर्शन के महत्व को समझना महत्वपूर्ण है।

2014 से पहले भारत की स्थिति और यूपीए शासन का दौर

पीएम मोदी के शानदार प्रदर्शन का कोई आकलन करने से पहले, वर्ष 2014 से पहले भारत की स्थिति को समझना जरूरी है, विशेष रूप से 2004-2014 तक पीएम मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के तहत। राजनयिक भाषा में, भारत को अक्सर अपने विशाल आकार, बड़ी जनसंख्या आधार, गहरी सांस्कृतिक विरासत और स्थिर आर्थिक विकास का प्रतिनिधित्व करने के लिए ‘हाथी’ कहा जाता है। दूसरी ओर चीन को ‘ड्रैगन’ कहा जाता है। लेकिन वर्ष 2014 तक भारतीय हाथी सुस्त हो गया था, फँस गया था और अपनी आगे की यात्रा के बारे में सुनिश्चित नहीं था। नतीजतन, न केवल ड्रैगन बल्कि कई अन्य जानवर या देश भारत से आगे निकल गए।

गुजरात मॉडल: नरेंद्र मोदी की विकास यात्रा

भारत में श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य को अभूतपूर्व विकास पथ पर अग्रसर किया था। उन्होंने देश को बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने और वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के माध्यम से भारी विदेशी निवेश प्राप्त करने वाला ‘विकास का गुजरात मॉडल (Gujarat Model of Development)’ दिया। अपने सैन्य करियर के दौरान, मुझे विकास के गुजरात मॉडल का अध्ययन करने का अवसर मिला और मुझे लगा कि यह भारत की विकास यात्रा के लिए एक उपयुक्त रोडमैप है।

क्रिकेट की भाषा में कहें तो भारत के पास रणजी ट्रॉफी स्तर पर सीएम नरेंद्र मोदी के रूप में एक स्टार क्रिकेटर था। उन्होंने साल 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन ट्रॉफियां (विधानसभा चुनावों में जीत) जीतकर गुजरात को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया था।

राज्य से राष्ट्रीय राजनीति तक: भाजपा की कप्तानी और मोदी का उदय

अब पार्टी (भाजपा) चाहती थी कि वह टेस्ट क्रिकेट में राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करें, वह भी एक कप्तान के रूप में। इस परिवर्तन को मैं टी-20 इंडियन प्रीमियर लीग में आरसीबी के खिलाड़ी रजत पाटीदार के उदाहरण से समझाता हूँ। रजत पाटीदार को वर्ष 2025 में आरसीबी क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया था और उन्होंने टीम को अपना पहला खिताब दिलाते हुए वर्ष 2026 में इस उपलब्धि को दोहराया। पाटीदार राष्ट्रीय स्तर पर एक अनजान शख्सियत थे और उन्होंने विराट कोहली जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में आईपीएल में लगातार दो जीत दर्ज करने की दुर्लभ उपलब्धि हासिल की।

साल 2014 में जब लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की कप्तानी सौंपी गई थी, तब सीएम नरेंद्र मोदी की स्थिति भी कुछ अलग नहीं थी। भाजपा के पास कई दिग्गज हस्तियां थीं, लेकिन नए कप्तान को बड़े और कड़े निर्णय करने थे।

लोकसभा चुनावों में भाजपा और एनडीए की ऐतिहासिक सफलता

2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने भाजपा को अपने दम पर 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत दिलाया और एनडीए ने 336 सीटें हासिल कीं। 30 साल के अंतराल के बाद (1984 के आम चुनावों के बाद) लोकसभा में किसी एक पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था।

पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में शानदार 303 सीटें जीतीं। 2024 के लोकसभा चुनावों में गिरावट आई, जब भाजपा ने 240 लोकसभा सीटें जीतीं, लेकिन एनडीए के पास 293 सीटों के साथ बहुमत है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए वर्तमान में 20 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में हैं। यह 12 वर्षों की अवधि में एक उल्लेखनीय चुनावी सफलता है।

भारत के रणनीतिक और सैन्य कद में वृद्धि

आर्थिक, कृषि, बुनियादी ढांचे के विकास, सामाजिक उत्थान आदि में पीएम मोदी की उपलब्धियां सर्वविदित हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि पीएम मोदी ने भारत का रणनीतिक कद कैसे कई गुना बढ़ाया है।

भारत में प्रधानमंत्री आमतौर पर खुद को रक्षा और रणनीतिक मुद्दों से दूर रखते हैं। उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सेना के मामलों को देखने के लिए काफी हद तक अपने रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी पर निर्भर थे। यहां तक कि यूपीए शासन के दौरान एनएसए जे.एन. दीक्षित, एम.के. नारायणन और शिवशंकर मेनन भी काफी हद तक अनुरूपतावादी थे।

यूपीए शासन के दौरान रक्षा अधिग्रहण धीमा और सतर्क था, क्योंकि एक और बोफोर्स घोटाले की आशंका थी। यहां तक कि सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह को मार्च 2012 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को टैंक और तोपखाने के गोला-बारूद की गंभीर कमी, वायु रक्षा प्रणाली के पुराने होने और आवश्यक हथियारों एवं सैन्य उपकरणों की कमी के बारे में लिखना पड़ा था। जहां तक रक्षा तैयारियों का सवाल है, उस समय भारतीय हाथी स्पष्ट रूप से संघर्ष कर रहा था।

रक्षा सुधार, ओआरओपी और सैन्य आधुनिकीकरण

प्रधानमंत्री बनते ही मोदी जी ने भारत की रक्षा और सशस्त्र सेनाओं की अनिवार्यताओं को जल्दी से समझने की अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने जुलाई 2014 में ओआरओपी को लागू करने के चुनावी वादे को तुरंत पूरा किया, जिसने लाखों पूर्व सैनिकों के मन को छुआ।

उन्होंने वर्ष 2014 से अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू की। 2014 से 2017 तक रक्षा मंत्री के रूप में मनोहर पर्रिकर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए त्वरित रक्षा अधिग्रहण और सैन्य आधुनिकीकरण के लिए एक रोडमैप बनाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ रक्षा उत्पादन सार्वजनिक इकाइयों का निगमीकरण करके गुणवत्तापूर्ण रक्षा विनिर्माण और रक्षा निर्यात पर भी जोर दिया। संक्षेप में, भारतीय सशस्त्र बल अब एक दुर्जेय सेना हैं, जिसे दुनिया ने भी स्वीकार किया है।

सीडीएस, थिएटर कमांड और सैन्य समन्वय की नई दिशा

लेकिन यह पीएम मोदी का निर्णायक नेतृत्व है, जिससे भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सोच में बड़ा अंतर आया है। उन्होंने सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच संयुक्तता और तालमेल पर जोर दिया है। उन्होंने 1 जनवरी 2020 से चार सितारा सीडीएस की नियुक्ति करके सेनाओं को नौकरशाही से दूर किया है।

उन्होंने थिएटर कमांड बनाने पर जोर दिया है और इस दिशा में पिछले छह वर्षों में बहुत सारी तैयारी हुई है। मेरा मानना है कि पीएम मोदी भारतीय सशस्त्र सेनाओं के कमांडर का पद संभालने के लिए सबसे उपयुक्त हैं। आज समय आ गया है, जब देश के प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सुरक्षा के हर पहलू का नेतृत्व और मार्गदर्शन करने की आवश्यकता है।

आधिकारिक तौर पर कमांडर होने से (माननीय राष्ट्रपति सर्वोच्च कमांडर होते हैं), पीएम मोदी रणनीतिक और सामरिक दिशा में एक प्रणालीगत परिवर्तन ला सकते हैं। सीडीएस की नियुक्ति के स्थिर होने के साथ, यह भारत में पूर्ण रणनीतिक शासन की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर और निर्णायक नेतृत्व की नई पहचान

नरेंद्र मोदी एक व्यक्ति के रूप में अप्रत्याशितता का वह अतिरिक्त तत्व लाते हैं, जिससे विरोधी डरते हैं और उनकी प्रशंसा भी करते हैं। यही व्यक्तित्व विशेषता है, जिसने उन्हें पिछले वर्ष मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के भीतर तक सेनाओं को हमला करने के लिए प्रेरित किया।

ऐसा करके भारत ने एक ही बार में पाकिस्तान के परमाणु झांसे को झुठला दिया। अपने सैन्य करियर के दौरान, हम हमेशा सामरिक परिचालन योजना बनाते समय पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल से जूझते रहे। अब ऐसा नहीं है।

इसी तरह पीएम मोदी ने सेना को आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने की पूरी आजादी दी। पीएम मनमोहन सिंह के जमाने में हम मानवाधिकारों के हनन के डर से परेशान रहते थे। आज के जटिल सैन्य परिवेश में देश को एक निर्णायक नेता की जरूरत है, लेकिन एक ऐसे नेता की भी, जिसके अगले कदम का दुश्मन अनुमान न लगा सके।

भारत के पास अब 12 परमाणु हथियार ‘तैनात स्थिति’ में होने की खबरों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। तैनात स्थिति का मतलब है कि परमाणु हथियार मिसाइलों पर या परिचालन बलों के साथ रखे गए हैं। सरकार की स्थिति में इस तरह का महत्वपूर्ण बदलाव नरेंद्र मोदी जैसे मजबूत प्रधानमंत्री से ही आ सकता है।

भारत के रणनीतिक परिवर्तन के सूत्रधार

पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व के कई गुणों में खुद को साबित किया है। लेकिन उन्होंने भारत की सुरक्षा और रणनीतिक विमर्श को हमेशा के लिए बदल दिया है।

पीएम मोदी ने दिखाया है कि वह भारत के धुरंधर हैं, हर शिल्प के मास्टर हैं, जो भारत को शाश्वत गौरव तक ले जाने की भारी जिम्मेदारी को आसानी से वहन करते हैं।

एक बार फिर से शुभकामनाएं सर।

जय भारत!

Topics: National Security AnalysisOperation Sindoor PakistanPanchjanya AnalysisPM Modi 12 Yearsनरेंद्र मोदी के 12 वर्षरणनीतिक शासनGujarat Model of Developmentमनोहर पर्रिकर रक्षा सुधारChief of Defence Staff India
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