पंजाब में कल अमृतसर पुलिस ने भारी मात्रा में हेरोइन व हथियारों के साथ छह आरपियों को गिरफ्तार किया। इस तरह के समाचार मानो पंजाब की नियमित सुर्खियां बन चुकी हैं परंतु इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़े गए 6 आरोपियों में दो नाबालिग थे। इसमें एक हरजीत सिंह मात्र 15 साल व जुगराज 17 साल का है। वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है जब पंजाब में इस तरह के खतरनाक अपराधों में कोई नाबालिग पकड़ा गया हो। इस तरह के आरपियों की संख्या निरंतर बढ़ती दिखाई दे रही है जो सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ समूचे समाज व समाजशास्त्रियों के लिए चुनौती साबित हो सकती है।
14 महीनों में 54 नाबालिग काबू
एक आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में पिछले 14 महीनों के दौरान सीमा पार से नशों और हथियारों की तस्करी के मामलों में 54 नाबालिगों की गिरफ्तारी बेहद चिंताजनक है। इस रुझान को रोकने के लिए ऐसी बहु-आयामी रणनीति की आवश्यकता है, जो सीमावर्ती जिलों की सभी समस्याओं का समाधान कर सके। इक्का-दुक्का ढीले-ढाले प्रयासों और अधूरे विकास से यह स्पष्ट होता है कि देश की रक्षा की पहली पंक्ति माने जाने वाले इस क्षेत्र की आवश्यकताओं की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
सीमांत जिलों के सीमावर्ती गांव के युवक हो रहे प्रभावित
हाल ही में अमृतसर पुलिस द्वारा दो नाबालिगों को पाकिस्तानी पिस्तौलों और हेरोइन सहित गिरफ्तार किया जाना इसका ताज़ा उदाहरण है। पंजाब के सीमावर्ती जिलों अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का के सीमावर्ती गांव तस्करों का आसान शिकार बन रहे हैं, जहां गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे परिवारों की मजबूरी का उनके द्वारा योजनाबद्ध तरीके से नाजायज़ फायदा उठाया जा रहा है।
किशोरों अपराधिक रिकार्ड न होने के कारण छिपने में आसानी
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगातार यह चेतावनी दी जा रही है कि पाकिस्तानी तस्कर अपने भारतीय साथियों को युवा लडक़ों को इस धंधे में धकेलने के लिए भर्ती करने के निर्देश दे रहे हैं। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला यह कि इन बच्चों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न होने के कारण पुलिस या सुरक्षा बलों को इन पर शक नहीं होता।
बाल न्याय कानून बचाते हैं कड़ी सजा से
दूसरा, बाल न्याय कानून के कारण ये सख्त सज़ा से बच जाते हैं। बदकिस्मती से बहुत से युवा इस दलदल में फंसते जा रहे हैं। कई युवा सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन से प्रभावित हो रहे हैं और कई ड्रोन के जरिए गिराए गए नशे और हथियारों की डिलीवरी करने का काम कर रहे हैं।
रातों रात अमीर बनने के चक्कर में फंसते युवा
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि अपने साथियों के पकड़े जाने के बाद भी इन अल्हड़ नौजवानों के मन में कोई डर पैदा नहीं हो रहा। वे रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में अपनी जिंदगी को दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं। सीमावर्ती गांवों की यह मजबूरी साफ बताती है कि वहां रोजगार के साधन नामात्र हैं और सरकारों ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया है। सीमा पर पहरा सख्त कर देने से बात नहीं बनेगी।















