
प्रतीकात्मक तस्वीर
पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। इस घटनाक्रम का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। आईआरजीसी के अनुसार, कुवैत के अली अल-सलेम और अहमद अल-जाबेर एयर बेस के अलावा बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर भी हमले किए गए। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा उसके क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया है कि उसने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिका का दावा है कि ये हमले आत्मरक्षा के तहत किए गए हैं। वहीं, ईरानी मीडिया के अनुसार हमलों के बाद कई क्षेत्रों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय करना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के कई देशों को तेल पहुंचाने वाले जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ईरान ने जहाजों को इस क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी भी दी है। वहीं, आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल माजिद मौसवी ने अमेरिका को सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा।