कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय : ‘दुनिया को एक नया रास्ता देने वाला भारत बनाएं’
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कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय : ‘दुनिया को एक नया रास्ता देने वाला भारत बनाएं’

नागपुर में आयोजित ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ के समापन पर सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का मार्गदर्शन मिला। मुख्य अतिथि रहे प्रसिद्ध उद्योगपति श्री कुमार मंगलम बिरला

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 9, 2026, 10:06 pm IST
in संघ @100, महाराष्ट्र
श्री मोहनराव भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

श्री मोहनराव भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

गत 4 जून को नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर प्रशिणार्थियों को सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का मार्गदर्शन मिला। समारोह के मुख्य अतिथि थे देश के दिग्गज उद्योगपति और पद्मभूषण से सम्मानित श्री कुमार मंगलम बिरला।

अपने विस्तृत उद्बोधन में श्री भागवत ने भारत के इतिहास, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और हिंदू समाज के संगठन पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के दो तिहाई कालखंड के बीच यह कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग संपन्न हो रहा है। इस बीच समाज जीवन के संपर्क अभियान का बहुत अच्छा अनुभव हो रहा है।

भारत का भविष्य जिस कंधे पर है, वह हिंदू समाज संगठित हो रहा है और जागृत हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया को भारत की आवश्यकता है, क्योंकि सभी को साथ में जोड़ कर विकास की कल्पना केवल भारत ही कर सकता है। हमारा देश धर्मप्राण देश है। अपने धर्म का संरक्षण करते हुए अपने राष्ट्र को परम वैभव-संपन्न बनाना है।

समारोह को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

भारत के अतीत का स्मरण कराते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान-विज्ञान होने के बाद भी यह परिस्थिति क्यों आई कि हमने 1000 वर्ष की गुलामी झेली? जिन्होंने हमें गुलाम बनाया, वे कोई हमसे श्रेष्ठ नहीं थे। संख्या में भी वे हमसे अधिक नहीं थे। किसी मामले में वे हमसे बेहतर नहीं थे, हमसे बदतर ही थे। लेकिन कुछ बातें हमारी थीं, जिन्हें हमने संभालकर नहीं रखा; हम उन्हें भूल गए। हमने अपनी तैयारी को खो दिया। उस तैयारी को हमें पुनः करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम अवरोध करने वाली शक्तियों को सफल न होने दें। यशस्वी होकर दुनिया को एक नया रास्ता देने वाला भारत बनाएं। भारत का समय आ गया है, हमें अपनी तैयारी तेज करनी है।

क्या है कार्यकर्ता विकास वर्ग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रशिक्षण व्यवस्था के अंतर्गत ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ मुख्य रूप से दो आयु वर्गों के लिए आयोजित किए जाते हैं— सामान्य वर्ग (18 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए) और दूसरा विशेष वर्ग (41 से 65 वर्ष की आयु के प्रौढ़ कार्यकर्ताओं के लिए)। मई-जून के दौरान नागपुर में आयोजित वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं (18 से 40 वर्ष) के लिए था।

11 मई से चल रहा था प्रशिक्षण वर्ग

‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ पिछली 11 मई से नागपुर में चल रहा था। संघ की प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत आयोजित इस वर्ग में देशभर के अलग-अलग प्रांतों से चयनित स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। कड़े अनुशासन और वैचारिक मंथन के बीच चले इस वर्ग में स्वयंसेवकों को संगठन कार्य और समाज सेवा के विभिन्न आयामों का सघन प्रशिक्षण दिया गया।

वैश्विक अस्थिरता पर टिप्पणी करते हुए श्री भागवत ने कहा कि हम देखते हैं कि बल संपन्न देश मनमानी करते हैं। चाहे तो किसी देश को हथिया लो, चाहे तो किसी देश पर बम मार दो या दुनिया के तेल की आपूर्ति बंद कर दो। भारत के बारे में यह विचार बने कि वह शक्ति संपन्न होकर ऐसा नहीं करेगा, बल्कि सबको साथ लेकर चलेगा।

कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री कुमार मंगलम बिरला

उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध ईरान और अमेरिका के बीच में होता है, लेकिन तेल की कीमतें हमारे यहां बढ़ रही हैं। दुनिया के स्वार्थ के संघर्षों में उन देशों को भी पीसा जा रहा है, जिनका उस संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि परिस्थिति में संकट है, लेकिन परिस्थिति में अपने पास भी अनुकूलता है, जिस पर हमें विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत आगे बढ़े, उसकी अनुकूलता है।

परिस्थितियां भी उसी अनुरूप बन रही हैं। परिस्थिति पर काबू पाना उन्हीं के लिए संभव होता है जो परिस्थिति पर नियंत्रण करने का विचार पहले से करके चलते हैं। व्यक्ति की स्वतंत्रता, समाज की स्वतंत्रता और सृष्टि का पोषण दुनिया अलग-अलग जानती है, पर सबका एक साथ पोषण करना नहीं जानती। दुनिया को भारत की आवश्यकता है, क्योंकि सभी को साथ में जोड़ कर विकास की कल्पना भारत ही कर सकता है।समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री कुमार मंगलम बिरला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्र निर्माण कार्यों की जमकर सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कुछ दिनों पहले कहा था कि संघ को समझने के लिए भीतर से देखना होगा। लेकिन संघ की दशकों की मेहनत के कारण संघ को बाहर से भी देखकर कोई भी प्रभावित होगा। 83 हजार शाखाएं, 60 लाख स्वयंसेवक, 1 लाख 77 हजार सेवा कार्य, और न जाने कितनी संस्थाएं— सभी एक दिशा में कार्य करते हैं।

यह अभूतपूर्व है। आजादी से पहले से लेकर देश में आए भूकंप, सुनामी और न जाने कितनी चुनौतियों के समय आरएसएस सदैव देश और समाज के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता सिर्फ एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण है। आदित्य बिड़ला ग्रुप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में अनेक समानताएं हैं। हम भी प्राथमिक और उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्थान, महिला सशक्तिकरण तथा कौशल विकास को अत्यंत महत्व देते हैं।

भारत के औद्योगिक भविष्य और युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए श्री बिरला ने कहा कि विकसित भारत का सपना बड़ा है और उसे पूरा करने में बड़े उद्योगों की भूमिका भी बड़ी है। भारत के युवाओं से मेरी अपील है कि भारत में बनाएं, भारत के लिए बनाएं, और भारत में रहकर पूरी दुनिया के लिए बनाएं। प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत का संकल्प हमारे देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के समय भारत अपने अमृतकाल की शुरुआत कर रहा है।मेरे दादा जी (जीडी बिड़ला) ने विभाजन के समय चुनौतियों को देखा और उस चुनौती को अवसर में बदला। आज भारत दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था है। आज हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

समापन समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से कई गणमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें प्रमुख हैं—श्री गोपालभाई मावजी गोरासिया (भुज-कच्छ, गुजरात), श्री दिव्यम त्रिपाठी (दिल्ली), पद्मश्री भारतभूषण त्यागी (बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश), महाराजा गज सिंह (जोधपुर) और पूजनीय श्री योगी भावनाथ जी महाराज (श्री रविकुंज आश्रम, हरमाड़ा, जयपुर)।

 

Topics: विकसित भारतआत्मनिर्भरताभारत की संस्कृतिपाञ्चजन्य विशेषसंघ का शताब्दी वर्षभारत का अमृतकालराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघज्ञान विज्ञानहिंदू समाजमोहन भागवतकुमार मंगलम बिरलाराष्ट्र निर्माण
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