शिमला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि छात्रों ने हमेशा विपरीत परिस्थितियों में कार्य करते हुए राष्ट्र जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भगीरथ प्रयास किया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) अपनी स्थापना के काल से ही छात्रों को राष्ट्र हित में एकजुट करने का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करता आ रहा है।
सुनील आंबेकर जी रविवार को शिमला में एबीवीपी (ABVP) द्वारा आयोजित ‘स्मृति 2026-वरिष्ठ कार्यकर्ता सम्मेलन‘ को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर विद्यार्थी परिषद वर्षों से जनजागरण कर रही थी, उनमें से कई आज समाज के सामने वास्तविकता बन चुके हैं।
धारा 370, कश्मीर और पूर्वोत्तर: ABVP का संकल्प हुआ साकार
सुनील जी ने विद्यार्थी परिषद् के ऐतिहासिक आंदोलनों और मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि परिषद के कार्यों का प्रभाव आज समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देता है।
- धारा 370: उन्होंने कहा कि कश्मीर से धारा 370 को हटाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी, और आज यह कलंक हट चुका है।
- आतंकवाद पर प्रहार: आज कश्मीर में आतंकवाद पूरी तरह से समाप्ति के कगार पर है।
- पूर्वोत्तर में शांति: पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर मिजोरम में भी परिस्थितियों में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव आया है।
कैंपस में वामपंथी वैचारिकी को दी मात, नक्सलवाद को रोका
विश्वविद्यालयों में हुए वैचारिक संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि एक समय ऐसा था जब पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में नक्सलवाद का व्यापक प्रभाव था। लेकिन, विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने अपनी जागरूकता और वैचारिक संघर्ष के माध्यम से इस राष्ट्रविरोधी विचारधारा को अन्य क्षेत्रों में फैलने से रोकने का साहसपूर्ण कार्य किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सकारात्मक वातावरण निर्माण में विद्यार्थी परिषद की भूमिका अहम रही है और यह कार्य आगे भी निरंतर जारी रखना होगा।
“श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन ने किया व्यापक सांस्कृतिक जागरण”
श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का विशेष उल्लेख करते हुए आंबेकर जी ने कहा-
“इस ऐतिहासिक आंदोलन का मूल उद्देश्य देश के सांस्कृतिक प्रतीकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना था। इस आंदोलन ने पूरे देश में व्यापक सांस्कृतिक जागरण का कार्य किया है। यदि हम इसके प्रभाव को समझ लें, तो अनेक सामाजिक और राष्ट्रीय प्रश्नों के उत्तर स्वतः मिल सकते हैं।”
उन्होंने अमरनाथ यात्रा और बालटाल भूमि आंदोलन का उदाहरण देते हुए समझाया कि जब समाज किसी भी राष्ट्रहित के विषय पर एकजुट होता है, तो उसके समाधान का मार्ग अत्यंत सहज हो जाता है।
भारत माता की जय का उद्घोष और समाज की अपेक्षाएं
सुनील आंबेकर ने कहा कि देश में आज जो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह समाज और राष्ट्रवादी संगठनों के सतत प्रयासों का ही परिणाम है।
- आज ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष पूरे देश में बहुत ही सहज रूप से सुनाई देता है।
- पहले भारत और राष्ट्रीयता की बात करने पर प्रश्न उठाए जाते थे, जबकि आज समाज स्वयं अपेक्षा करता है कि राष्ट्रीय विषयों पर राष्ट्रवादी संगठन और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।
- युवाओं के बीच कार्य करने वाले संगठन के रूप में विद्यार्थी परिषद के लिए यह वैचारिक विजय विशेष महत्व रखती है।
“विश्व का नेतृत्व करेगा भारत, शुरुआत स्वयं से करनी होगी”
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वैश्विक परिदृश्य पर भारत की भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि-
“भारत के पास जब भी शक्ति आई है, उसका उपयोग सदैव मानवता और समाज के कल्याण के लिए ही हुआ है।”
उन्होंने कहा- वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अपनी सोच और दृष्टिकोण के अनुरूप गति तेज करनी होगी, तभी वह पूरे विश्व को नेतृत्व (Global Leadership) प्रदान कर सकेगा। इसके लिए शुरुआत ‘स्वयं’ से करनी होगी। समाज में परिवर्तन दूसरों से अपेक्षा करने से नहीं आता, बल्कि स्वयं में बदलाव लाने से शुरू होता है। जब कोई एक सकारात्मक प्रयास सफल होता है, तो पूरा समाज उसका अनुसरण करने लगता है।
















