भुवनेश्वर: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद (NEC) बैठक 29 से 31 मई के बीच भुवनेश्वर में संपन्न हुई। यह बैठक महाप्रभु जगन्नाथ की पावन भूमि पर आयोजित की गई, जिसमें देशभर के 46 प्रांतों से 400 से अधिक प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सामाजिक मुद्दों और समसामयिक वैश्विक परिस्थितियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। साथ ही संगठन की आगामी कार्ययोजना और देशव्यापी अभियानों की रूपरेखा भी तय की गई।
चार प्रमुख प्रस्ताव पारित
राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में शैक्षिक सुधार, महिला सुरक्षा, अर्बन माओवाद और वैश्विक परिदृश्य से जुड़े चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। पारित प्रस्तावों में शैक्षिक सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता, सशस्त्र माओवाद के समाप्ति चरण में शहरी माओवाद को गंभीर चुनौती के रूप में चिह्नित करना, संगठित आपराधिक एवं कथित जिहादी नेटवर्क द्वारा महिलाओं के शोषण एवं मतांतरण पर रोक लगाने की आवश्यकता, तथा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में राष्ट्रीय संयम और सजगता की आवश्यकता पर बल दिया गया।
अभाविप के अनुसार, ये प्रस्ताव देश के समसामयिक सामाजिक, शैक्षिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर संगठन की स्पष्ट दृष्टि को दर्शाते हैं।

देशव्यापी अभियानों की घोषणा
बैठक में अभाविप ने वर्षभर चलाए जाने वाले कई राष्ट्रव्यापी अभियानों की घोषणा की। इनमें “स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम”, “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष, तथा राष्ट्रीय एकात्मता यात्रा (SEIL) के 60 वर्ष पूर्ण होने पर “SEIL@60” अभियान प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त आपातकाल के 50 वर्ष, श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस तथा संत रविदास जी के 650वें प्राकट्य उत्सव के उपलक्ष्य में भी देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संगठनात्मक समीक्षा और भविष्य की कार्ययोजना
बैठक के दौरान संगठन की विभिन्न बैठकों में लिए गए निर्णयों की समीक्षा की गई। अभियानात्मक, कार्यक्रमात्मक और संगठनात्मक गतिविधियों का मूल्यांकन करते हुए आगामी वर्ष के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की भूमिका, सामाजिक-आर्थिक विषयों, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
शिक्षा और उद्योग सहयोग पर जोर
अभाविप ने भारतीय उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया, जिससे देश को नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
संगठन ने कहा कि शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और युवा शक्ति के बीच मजबूत समन्वय विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पारित प्रस्ताव विकसित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि बैठक में पारित प्रस्ताव केवल वर्तमान चुनौतियों पर प्रतिक्रिया नहीं हैं, बल्कि विकसित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में संगठन की व्यापक दृष्टि को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक छात्र-केंद्रित और परिणामकारी बनाने की आवश्यकता है। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी उभरती चुनौतियों, विशेषकर शहरी माओवाद, से प्रभावी रूप से निपटने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के विरुद्ध संगठित अपराध और मतांतरण की घटनाओं पर रोक लगाना समय की आवश्यकता है, ताकि सामाजिक सुरक्षा और संतुलन सुनिश्चित किया जा सके। डॉ. सोलंकी ने आगे कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करना संगठन का लक्ष्य है। भुवनेश्वर में संपन्न यह राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक अभाविप के संगठनात्मक विस्तार, नीति निर्धारण और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बैठक से निकले निर्णय आगामी वर्षों में संगठन की गतिविधियों और राष्ट्रव्यापी अभियानों की दिशा तय करेंगे।

















