आमतौर पर मुसलमानों द्वारा कहा जाता है कि मस्जिद के कुछ नियम होते हैं, और वह किसी भी सरकारी या फिर अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन पर नहीं बनाई जा सकती है और न ही वह किसी अन्य व्यक्ति की निजी जमीन पर बनाई जा सकती है।
मगर जापान और ग्रीस से लेकर भारत तक कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां सरकारी जमीन पर अवैध मस्जिदें बनाई गई हैं। भारत में तो यह अतिक्रमण उत्तराखंड से लेकर महाराष्ट्र तक है। मामला केवल गैर कानूनी निर्माण और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का है, जो मंदिरों पर भी उतना ही लागू होता है और भारत में कई मंदिरों पर भी ऐसी कार्रवाई हुई है। लेकिन जब गैर कानूनी रूप से बनी मस्जिदों पर कोई कार्रवाई की जाती है, तो उसे मुसलमान समाज के प्रति कथित असहिष्णुता से जोड़ दिया जाता है। कानून और व्यवस्था के उल्लंघन को दरकिनार कर दिया जाता है। भारत में ही नहीं, हाल ही में जापान में भी ऐसी घटना सामने आई है, जो वैध मस्जिद की परिभाषा से परे है। और यह सवाल पैदा करती है कि क्या मस्जिद बनाते समय इस मूलभूत बात का ध्यान नहीं रखा जाता है कि वह वैध जमीन पर बनी हो।
क्या हुआ है जापान में?
जापान के सैतामा प्रांत के कावागोए शहर में एक मस्जिद बन गई और उसका उद्घाटन भी पाकिस्तानी राजदूत अब्दुल हमीद ने कर दिया। मजे की बात यह है कि इसका निर्माण एक ऐसी कंपनी ने किया था, जो पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़ी है। यह ऐसे क्षेत्र में बनी, जहां इस निर्माण की अनुमति ही नहीं था। स्थानीय प्रशासन ने कई बार काम को रोकने के आदेश जारी किये, मगर हर बार नजरंदाज किया गया। देखते ही देखते अवैध रूप से मस्जिद बन गई और उसका उद्घाटन भी हो गया। जब जापान में लोगों ने विरोध किया और अब सरकार ने इसके ध्वस्तीकरण के आदेश दिए तो पाकिस्तान दूतावास ने इससे दूरी बना ली।
ग्रीस में 60 मस्जिदों को तोड़ा गया
जापान में जहां एक मस्जिद गैरकानूनी रूप से बनी तो वहीं हाल ही में ग्रीस की सरकार ने अपने देश में 60 अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई की। एथेंस और पिराएस क्षेत्र में बनी इन मस्जिदों को लेकर सरकार का यह कहना था कि ये मस्जिदें बिना पंजीकरण और अनुमति के चल रही थीं। ग्रीस सरकार ने यह कदम 2025 में बने एक कानून के अंतर्गत उठाया है। इन मस्जिदों पर आरोप थे कि ये इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रही हैं। नए नियम के अनुसार ऐसी मस्जिद बंद होगी और अगर उसका संचालक विदेशी है तो उसे देश से बाहर निकाला जा सकता है। सरकार का यह भी मानना है कि कुछ मस्जिदें गैर कानूनी तरीके से शरणार्थियों को बसाने का भी काम कर रही थीं।
म्यांमार में भी छह मस्जिदों को तोड़ा गया
रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर निशाने पर रहने वाले म्यांमार में भी रखाइन प्रांत में बिना अनुमति के बनाई गई छह मस्जिदें सरकार ने तोड़ दी थीं। जहां सरकार का कहना है कि ये बिना अनुमति के चल रही थीं, तो वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे मानवाधिकार उल्लंघन कहा गया। केवल गैर मुस्लिम देशों में ही अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई हो, ऐसा नहीं है। तमाम मुस्लिम देश भी ऐसे हैं, जहां पर गैर कानूनी रूप से बनी मस्जिदों पर कार्रवाई की गई है।
2011 में तजाकिस्तान
साल 2011 में तजाकिस्तान में देश भर में सैकड़ों मस्जिदों को बंद कर दिया गया था या फिर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया था। दरअसल ये सभी मस्जिदें गैर कानूनी रूप से बिना अनुमति के चल रही थीं। सरकार का यह कहना है कि संगठन केवल सरकारी अनुमति के बाद ही मस्जिद चला सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में लगातार ऐसे निर्माणों पर कार्यवाही
मिडिल ईस्ट के देश अर्थात सऊदी अरब, यूएई आदि में भी बिना अनुमति के बनी मस्जिदों पर कार्रवाई होती है। सैकड़ों छोटे ढांचे हटा दिए गए हैं और धार्मिक मंत्रालय ही इन्हें अवैध घोषित करता है। वर्ष 2018 में तुर्की के समर्थन से चल रही 7 मस्जिदों को ऑस्ट्रिया ने बंद कर दिया था और 40 से अधिक इमामों पर कार्रवाई करते हुए देश से जाने का आदेश दिया था।
फ्रांस में अवैध मस्जिदों पर कार्यवाही
फ्रांस की सरकार में भी अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई हुई। यह साल 2003-04 से चल रही थी। यहां कई छोटे नमाज परिसर बिना अनुमति के चल रहे थे। उन्हें सील कर दिया गया था। फिर 2015 में आतंकवादी हमलों के बाद पेरिस और अन्य शहरों में कई मस्जिदों की जब जांच हुईं तो 20 से ज्यादा मस्जिदों और नमाज परिसरों को बंद किया गया, क्योंकि वे बिना अनुमति के चल रहे थे। 2017-18 में भी फ्रांस के कई हिस्सों में विदेशी फन्डिंग से चल रही मस्जिदों पर कार्यवाही हुई और उन्हें बिना अनुमति के निर्माण के चलते बंद कर दिया गया।
इन सभी घटनाओं में मुस्लिम समुदाय ने पक्षपात का आरोप लगाया था। 2020-21 में फ्रांस सरकार के नए कानून separatism bill के अंतर्गत कई मस्जिदों और मजहबी संस्थानों की जांच हुई और नियमों का पालन नहीं करने वाली तमाम मस्जिदों को बंद कर दिया गया। ऐसे ही कई और देशों में अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई हुई है, जो बिना किसी नियम और कानून के चल रही थीं। सर्बिया में साल 2017 में कई अवैध मस्जिदों को तोड़ा गया था। और चीन में तो कितनी मस्जिदों को तोड़ा गया है, उसका कोई हिसाब नहीं है। भारत में भी यह मामला चर्चा में है क्योंकि यहां भी अवैध निर्माणों पर हथौड़ा चल रहा है। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में भी अवैध रूप से बनी मस्जिदों पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। इन सभी में एक बात सामान्य है कि ये सभी बिना सरकारी अनुमति के और गैरकानूनी रूप से बनी थीं, तो क्या ये सभी इस्लामी कानून के उस मूलभूत नियम को तोड़ते हुए बनी थीं कि किसी भी हराम जमीन पर मस्जिद नहीं बननी चाहिए।
















