उत्तराखंड की सबसे बड़ी बताई जा रही मस्जिद पर बड़ा एक्शन, हटाई जा रही ऊंची मीनारें
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उत्तराखंड की सबसे बड़ी बताई जा रही मस्जिद पर बड़ा एक्शन, हटाई जा रही ऊंची मीनारें

उल्लेखनीय है कि करीब दस माह पहले इस मस्जिद और ऊंची मीनारों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया और न ही इसके निर्माण के लिए जिला प्रशासन अथवा प्राधिकरण से कोई अनुमति ली गई थी।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
Jun 7, 2026, 10:44 am IST
inउत्तराखंड
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड को सनातन संस्कृति की राजधानी कहे जाने वाले हरिद्वार जिले की सुल्तान नगर पंचायत शेत्र में निर्माणाधीन मस्जिद की ऊंची मीनारों को हटाने का काम प्रशासन के निर्देश पर शुरू हो गया है। पहले भी ये काम शुरू हुआ था लेकिन मस्जिद प्रबंधकों के आपसी विवाद से रुक गया था। डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि धामी सरकार के निर्देश पर ये कारवाई शुरू की गई है और सीएम पोर्टल पर भी इस बारे में शिकायत दर्ज की गई थी।

उल्लेखनीय है कि करीब दस माह पहले इस मस्जिद और ऊंची मीनारों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया और न ही इसके निर्माण के लिए जिला प्रशासन अथवा प्राधिकरण से कोई अनुमति ली गई थी। अब यहां पुनः बल्लियां खड़ी करके काम होता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया में ये प्रकरण चर्चित होने पर डीएम  हरिद्वार ने इसके निर्माण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था,जिसके बाद उक्त मस्जिद के निर्माण कार्य को रोक दिया गया था।

अक्टूबर 2025 में चर्चा में आयी थी मस्जिद

हरिद्वार जिले के सुल्तानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बनाए जाने और उसकी मीनार की ऊंचाई को लेकर खबरें सुर्खियों में रही।  हरिद्वार जिला प्रशासन ने इसका निर्माण कार्य रोकते हुए नोटिस जारी किया था। बताया जाता है कि नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला यानि स्पष्ट है कि उक्त मस्जिद बिना किसी सरकारी अनुमति के बनाई जा रही थी। बताया जाता ह कि इस मस्जिद को राज्य की सबसे बड़ी मस्जिद बता कर धन संग्रह किया गया है और इसके निर्माण में कई प्रभावशाली मुस्लिम नौकरशाहों ने भी सहयोग किया है। फिलहाल एसडीएम अनिल शुक्ला उक्त मस्जिद की ऊंची मीनारों को हटाने के लिए मॉनिटिरिंग कर रहे है। सुप्रीम कोर्ट का 2009 और 2016 का ऐसा निर्देश है कि कोई भी धार्मिक भवन या संरचना बिना जिला अधिकारी के अनुमति के नहीं बनाई जा सकती। इसके पीछे तर्क यही था कि एक तो धार्मिक संरचना, सरकारी भूमि पर न बने और इसके निर्माण में सुरक्षा के हर पहलू का ध्यान रखा जाए।

कई मस्जिदों ने नहीं ली निर्माण की अनुमति

उत्तराखंड में 722 से अधिक मस्जिदों का निर्माण हो चुका है जिसका आंकड़ा उत्तराखंड सरकार के पास भी है। इनमें सबसे ज्यादा मस्जिदें सनातन गंगा नगरी हरिद्वार जिले में है जिनके संख्या 322 बताई गई है। देहरादून जिले में 155, उधम सिंह नगर में 144 और नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें है।खास बात ये कि इनमें से शायद ही कोई ऐसी हो जिसमें भव्यता का निर्माण कार्य न चल रहा हो। खास बात ये भी है कि कुछ चिन्हित स्थानों पर मस्जिदों ने भव्यता के साथ साथ बड़ा आकार लेना भी शुरू कर दिया है मानो यहां कोई कंप्टीशन चल रहा हो कि कौन सबसे ऊंची मीनार बनाएगा या कौन सबसे बड़ी मस्जिद बनाएगा।

सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण

गौर करने वाली बात ये कि इनमें कोई भी निर्माण संबंधी अनुमति नहीं ले रहा ,कारण ये है कि प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करने के लिए उन्हें भूमि, संस्था पंजीकरण,आय व्यय का ब्यौरा और अन्य दस्तावेज दिखाने पड़ते है जोकि बहुत से मस्जिद प्रबंधकों के पास नहीं होते। कई इमारतें ऐसी है जोकि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे करके बनाई गई है और फिर उन्हें वक्फ बोर्ड में पंजीकृत करवा दिया गया,इसका नतीजा ये हुआ कि प्रशासन इनके खिलाफ कार्रवाई करने से परहेज करता रहा। पिछले दिनों वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करवाने के दौरान भी ऐसे ही पेच उलझे हुए दिखाई दिए है। बरहाल सनातन देवो की भूमि उत्तराखंड में इस्लामिक प्रतीक चिन्हों की बढ़ती बसावट से स्थानीय सनातन संगठन भी चिंतित है।

नियमों का उल्लंघन

जानकारी के मुताबिक इस मस्जिद के निर्माण मानकों को लेकर कोई गाइड लाइन की चिंता नहीं की गई क्योंकि जब इसका नक्शा ही पास नहीं करवाया गया तो न तो फायर सेफ्टी न ही लोकनिर्माण और न ही अन्य किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया। आम तौर पर कोई आम व्यक्ति घर भी बनाता है तो उसके लिए मानक तय है, कितनी ऊंचाई होगी,पार्किंग स्पेस कहां है ? परन्तु उक्त मस्जिद निर्माण के दौरान ऐसे किसी भी मानकों का पालन नहीं किया गया। पहाड़ी रिहायशी अथवा व्यवसायिक भवन बनाने के लिए केवल 12 मीटर की अनुमति है। जबकि मैदानी इलाकों में इसमें 30 मीटर यानी करीब 100 फीट  लेकिन  यहां  मस्जिद में 250 फिट ऊंची मीनार किसी भी मानक के अनुसार प्रथम दृष्टि में सही नहीं कही जा रही। जानकारी के अनुसार यदि सौ मीटर से ऊंची इमारत है तो उसके लिए शासन से अनुमति के साथ साथ आई आई टी के संरचनात्मक प्रौद्योगिकी विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है।

हरिद्वार के डीएम क्या कहते हैं?

सुल्तानपुर मस्जिद निर्माण के विषय में हरिद्वार के डीएम मयूर दीक्षित का कहना है कि ये विषय जब संज्ञान में आया था तब वहां नोटिस देकर निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था, मस्जिद कमेटी ने स्वयं मीनारों को हटाने करने का प्रस्ताव दिया जिसे प्रशासन ने स्वीकृति दे दी है, मीनारों की ऊंचाई को देखते हुए उससे मैन्युअली ही हटाना संभव है क्योंकि यदि मशीन लगाते है तो इससे दुर्घटना का भय है, हमने एसडीएम को प्रति दिन रिपोर्ट देने को कहा है।

Topics: Haridwar NewsDhami government actionillegal mosque constructionUttarakhand Latest Newsहरिद्वार मस्जिद विवादHaridwar Masjid NewsSultanpur Masjid ControversyUttarakhand Masjid News
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