पश्चिम बंगाल: घुसपैठ जड़ से होगी खत्म, जीरो लाइन से समझौता नहीं, सीमा प्रबंधन में आमूलचूल परिवर्तन
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पश्चिम बंगाल: घुसपैठ जड़ से होगी खत्म, जीरो लाइन से समझौता नहीं, सीमा प्रबंधन में आमूलचूल परिवर्तन

केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही साहसिक निर्णय लेने में कोई समय बर्बाद नहीं कर रही हैं। वे अवैध घुसपैठ के खिलाफ तत्काल कदम उठा रही हैं।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
Jun 5, 2026, 09:19 am IST
inभारत
भारत-बांग्लादेश सीमा पर सतर्क सीमा सुरक्षा बल

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सतर्क सीमा सुरक्षा बल

भारत-बांग्लादेश सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने एक साहसिक कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के सभी जीरो-लाइन गांवों के पुनर्वास का प्रस्ताव दिया है ताकि अधिक प्रभावी सीमा प्रबंधन की सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को 600 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने के साथ-साथ सीमा प्रबंधन में पूरी तरह से बदलाव किया जा रहा है।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही साहसिक निर्णय लेने में कोई समय बर्बाद नहीं कर रही हैं। वे अवैध घुसपैठ के खिलाफ तत्काल कदम उठा रही हैं। एक तरह से यह सीमा प्रबंधन का पूर्ण आमूलचूल परिवर्तन (Complete Overhaul)  है।

जीरो-लाइन पर कोई समझौता नहीं

भारत-बांग्लादेश सीमा पर जीरो-लाइन गांव वे नागरिक बस्ती या आवास हैं जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ प्रतिबंधित 150 गज की ‘नो मैन्स लैंड’ के भीतर स्थित हैं। 1975 के संयुक्त सीमा समझौते के तहत, न तो भारत और न ही बांग्लादेश को जीरो-लाइन के 150 गज के भीतर बंकर, अवलोकन चौकियों जैसे रक्षात्मक ढांचे बनाने की अनुमति है। जीरो-लाइन वास्तविक सीमा का संरेखण है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय दिशानिर्देश वास्तविक सीमा पर बाड़ लगाने की अनुमति नहीं देते हैं। चूंकि कुछ गांव 150 गज के प्रतिबंध से आगे स्थित हैं और लगभग वास्तविक सीमा से चिपके हुए हैं, इसलिए ये जीरो-लाइन गांव सुरक्षा एजेंसियों और नागरिक प्रशासन के लिए एक बड़ी सुरक्षा और मानवीय चुनौती पेश करते हैं।

जीरो लाइन पर जनसांख्यिकीय बदलाव

पश्चिम बंगाल में 360 जीरो-लाइन गांव हैं, जिनमें लगभग 70,000 लोगों की कुल आबादी रहती है। इनमें से अधिकांश गांव मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जिलों में स्थित हैं। यह कोई संयोग नहीं है कि इन सभी जिलों में पिछले एक दशक में एक बड़ा जनसांख्यिकीय बदलाव देखा गया है। मालदा और मुर्शिदाबाद दोनों मुस्लिम बहुल जिले हैं, जहां पिछले एक दशक में 40% तक की आबादी में बड़ी वृद्धि हुई है। यहां तक कि मानवीय दृष्टिकोण से भी, जीरो-लाइन गांवों में रात में आपातकालीन सेवाओं तक बहुत कम पहुंच होती है, जब बाड़ के द्वार बंद होते हैं। यहाँ के ग्रामीण बांग्लादेशी अपराधियों की दया पर निर्भर रहते हैं और उन्होंने भी स्थानांतरित होने की इच्छा व्यक्त की है। इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार को 150 गज  से दूर उपयुक्त भूमि खोजने और उसका अधिग्रहण करने की जरूरत है।

घुसपैठ जड़ से होगा खत्म

इस तरह का स्थानांतरण कभी भी आसान नहीं होता है और इसके लिए राज्य सरकार की ओर से मजबूत संकल्प की आवश्यकता होती है। लेकिन शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बांग्लादेश से राज्य में अवैध घुसपैठ को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता दिखाई है। इसलिए, अब गृह मंत्री अमित शाह के तहत गृह मंत्रालय (एमएचए) पश्चिम बंगाल में जीरो-लाइन गांवों को स्थानांतरित करने के लिए जल्द ही आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर सकता है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर भी इस तरह का स्थानांतरण तब किया गया था जब सीमा पर बाड़ लगाई गई थी। चूंकि बीएसएफ भी भारत-पाकिस्तान सीमा की रक्षा करता है, इसलिए उनके पास इस तरह की कवायद का पर्याप्त अनुभव है। इस तरह के पुनर्वास के दौरान, ग्रामीण अपनी भूमि से वंचित नहीं होते हैं और वे स्थानीय बीएसएफ अधिकारियों के समन्वय से दिन के दौरान अपनी फसलों की देखभाल कर सकते हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा पर भी ऐसी प्रक्रिया रोज होती है।

आमूलचूल परिवर्तन के लिए तीन संकेतक

इसलिए, पश्चिम बंगाल में सीमा प्रबंधन में आमूलचूल परिवर्तन के लिए तीन स्पष्ट संकेतक हैं। पहला, बांग्लादेश के साथ लगती 569 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बीएसएफ को तत्काल भूमि आवंटित करना है। दूसरा, गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने की क्षमता स्मार्ट प्रकृति की होगी, जो सेंसर, कैमरा, ड्रोन और लेजर आदि का लाभ उठाकर 24/7 हर मौसम निगरानी प्रदान करती है। भारत बांग्लादेश के साथ अपनी सबसे लंबी सीमा साझा करता है, जिसकी लंबाई 4096.7 किमी है और अकेले पश्चिम बंगाल राज्य की बांग्लादेश के साथ 2216.7 किमी की सीमा है। अपने सैन्य करिअर के दौरान मैंने देखा है की भारत-बांग्लादेश सीमा एक जटिल क्षेत्र है जिसमें नदियाँ, दलदली भूमि और भूस्खलन प्रवण क्षेत्र शामिल हैं। इसलिए, पारंपरिक वायर्ड बाड़ (Wired Fence)लगाने की तुलना में स्मार्ट बाड़ लगाना एक बेहतर विकल्प है।

जीरो-लाइन गांवों को स्थानांतरित करना

जीरो-लाइन गांवों को स्थानांतरित करने की तीसरी पहल पश्चिम बंगाल में सीमा प्रबंधन के पूर्ण ओवरहाल की तिकड़ी को पूरा करती है। पश्चिम बंगाल में सीमा प्रबंधन को पिछले 49 वर्षों से उपेक्षित किया गया था, पहले 1977 से वाम मोर्चा सरकार के 34 साल के शासन के तहत और इसके बाद वर्ष 2011 से टीएमसी शासन के दौरान। शुद्ध वोट बैंक की राजनीति के लिए उपेक्षा के इतने लंबे दौर को इतनी जल्दी पूर्ववत नहीं किया जा सकता है। लेकिन पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार द्वारा प्रदर्शित तात्कालिकता और केंद्र सरकार द्वारा कड़ी निगरानी से बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ पर काफी हद तक रोक लगने की संभावना है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठियों की लंबी कतारों में अपने मूल देश में पलायन की प्रतीक्षा करने की खबर भी एक स्वागत योग्य दृश्य है। अवैध घुसपैठ के मुद्दे से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल में सीमा प्रबंधन में आमूलचूल बदलाव के लिए सरकार की सामूहिक कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के सर्वोत्तम हित में है।

 

 

Topics: बीएसएफपाञ्चजन्य विशेषभारत बांग्लादेश सीमाअवैध बांग्लादेशी घुसपैठिएघुसपैठियेजीरो लाइन गांव
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