महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कंपनी में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन कन्वर्जन के बाद अब पुणे की आईटी कंपनी विप्रो से भी ऐसा ही मामला सामने आया है। विप्रो टेक्नोलॉजी (Wipro Technologies) की पूर्व महिला कर्मचारी ने अपनी सहकर्मी पर जबरन कन्वर्जन, कार्यस्थल पर भेदभाव, मुस्लिम शख्स के साथ संबंध बनाने और जबरदस्ती इस्तीफा दिलवाने का आरोप लगाया है। उसकी शिकायत के आधार पर हिंजवाड़ी पुलिस ने कंपनी को नोटिस भेजा है।
पीड़ित महिला का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह मीडियाकर्मियों से कह रही हैं, “कल मैंने हिंजवाड़ी पुलिस थाने में लिखित शिकायत दी। पुलिस ने मुझे बोला है कि वह मामले की जांच करेंगे। उन्होंने जीशान अहमद, जो कंपनी के एचआर हेड हैं और प्रशांत जी के अलावा इसमें शामिल अन्य लोगों के फोन नंबर मुझसे मांगे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं केवल यह मुद्दा सबके सामने लाना चाहती हूं। मेरे साथ अन्याय हुआ है। मैं चाहती हूं कि मुझे न्याय मिले। मुझसे जबरन इस्तीफा लिया गया, यह मैं कोर्ट में बोलने वाली हूं। मेरे साथ ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि मैंने शायना रफीक का कहना नहीं माना। वो मुझसे जो करवाना चाहती थी, मैंने वो नहीं किया। जनवरी 2025 में भी कई लोगों को कंपनी से एक साथ निकाला गया। मुझे पता है उनमें से कई महिलाओं को इसी कारण से निकाला गया होगा। आप डेटा निकालें कि यहां मुस्लिम महिलाओं की तुलना में कितनी हिंदू महिलाओं को निकाला जाता है। इससे आपको सच और झूठ का पता चल जाएगा।”
क्या हैं आरोप?
पूर्व कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने इस मामले की जानकारी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को दी थी, लेकिन उसकी महिला सहकर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसने दावा किया कि जब उसने शायना रफीक से बातचीत करना बंद कर दिया, तो गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड की गई बातचीत का इस्तेमाल करके कंपनी की ओम्बड्स कमेटी के समक्ष उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी गई। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी के अधिकारियों ने उसके द्वारा पेश किए गए सबूतों को नजरअंदाज किया और आरोपी का पक्ष लिया। इसके बाद अगस्त 2025 में एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान उसे इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।
हिंदूतत्व संगठन ने इसे एक और कॉर्पोरेट जिहाद का मामला बताया
हिंदू जनजागृति समिति ने इस घटना को कॉर्पोरेट जिहाद का मामला बताया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि वे कॉर्पोरेट कार्यस्थलों पर मजहबी उत्पीड़न और जबरन कन्वर्जन के मामलों की विस्तृत जांच के आदेश दें। संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विप्रो के हिंजवाड़ी ऑफिस में काम करने वाली पीड़िता ने अपनी ही महिला सहकर्मी पर आरोप लगाया है कि उसने उस पर बार-बार इस्लाम महजब अपनाने का दबाव बनाया। उसे अपने एक मुस्लिम परिचित के साथ संबंध बनाने के लिए कहा। पीड़िता का यह भी दावा है कि यह सब करने के लिए उसे अच्छी लाइफस्टाइल और विदेश जाने का प्रलोभन दिया गया।
पूर्व कर्मचारी ने इस्तीफा रद्द करने को कहा
कंपनी को भेजे गए कानूनी नोटिस के जरिए पूर्व कर्मचारी ने अपने इस्तीफे को रद्द करने, पिछली तनख्वाह के साथ नौकरी पर वापस लेने, 50 लाख रुपये का मुआवजा, लिखित माफी और उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिन पर उसने इस मामले में शामिल होने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोटिस में कहा गया है कि अगर तय समय सीमा के भीतर उसकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
हिंजवड़ी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर बालाजी पंढारे ने बताया, “हमें इस मामले में एक शिकायत मिली है। हालांकि, अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। हम मामले की शुरुआती जांच कर रहे हैं। जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।” फिलहाल, विप्रो की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

















