Explainer: युद्ध विराम के बावजूद अमेरिकी सेना ने ईरान के 'केशम द्वीप' पर क्यों की भारी बमबारी?
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Explainer: युद्ध विराम के बावजूद अमेरिकी सेना ने ईरान के ‘केशम द्वीप’ पर क्यों की भारी बमबारी?

अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान के रणनीतिक केशम द्वीप पर हवाई हमला किया। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए। जानिए होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण और वैश्विक तेल व्यापार पर पड़ने वाले असर के बारे में।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by कुलदीप सिंह
Jun 3, 2026, 12:42 pm IST
inविश्व

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। लेबनान, गाजा और लाल सागर के बाद अब इस युद्ध की आंच  ‘केशम द्वीप’ (Qeshm Island) तक पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच हुए हालिया युद्धविराम के समझौते के बावजूद अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण इस द्वीप पर हवाई हमला किया।

इस अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान और उसके समर्थक गुटों ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों से भीषण जवाबी हमले किए हैं। अमेरिका ने सीजफायर के बीच यह कदम क्यों उठाया चलिए जानते हैं।

दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य टकराव बना कूटनीति पर संकट

अमेरिकी सेना के इस हमले की खबर ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए जो एक बेहद नाजुक युद्धविराम समझौता हुआ था, वह अब पूरी तरह से टूटता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने शनिवार और रविवार को ईरान के भीतर ‘गेरुक’ (Geruk) शहर के नजदीकी इलाकों और ‘केशम द्वीप’ पर सिलसिलेवार कई हवाई हमले किए।

अमेरिका का दावा है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य उन ईरानी हवाई रक्षा प्रणालियों, ड्रोन ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों और हमलावर ड्रोनों को नष्ट करना था। ये फारस की खाड़ी और अरब सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी युद्धपोतों के लिए सीधा खतरा बने हुए थे। सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस हमले में एक सक्रिय रडार इंस्टॉलेशन और ड्रोन कमांड सेंटर को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया गया, जिसका उपयोग खाड़ी देशों और वाणिज्यिक जहाजों पर मिसाइल हमलों को कोऑर्डिनेट करने के लिए किया जा रहा था।

इस अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया। उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कुवैत और बहरीन में रॉकेट और ड्रोन दागे। हालांकि, दोनों देशों के राजनयिक पर्दे के पीछे इस युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए बातचीत में जुटे हैं, लेकिन जमीनीस्तर पर हो रहे इन लगातार हमलों के कारण यह वार्ता किसी भी समय पूरी तरह विफल हो सकती है।

क्यों रणनीतिक रूप से इतना महत्वपूर्ण है केशम द्वीप?

भौगोलिक और सैन्य दृष्टि से ‘केशम द्वीप’ फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है। यह द्वीप सीधे तौर पर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के प्रवेश द्वार को ब्लॉक या नियंत्रित करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री चोकपॉइंट है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के लिए यह रास्ता कितना महत्वपूर्ण है। दुनिया के कुल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले कुल कच्चे तेल के शिपमेंट का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर अपनी मंजिलों तक पहुंचता है।

अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, ईरान केशम द्वीप पर तैनात अपनी सैन्य ताकत के दम पर इस पूरे समुद्री रास्ते से होने वाले वैश्विक व्यापार की रीढ़ को जब चाहे तोड़ सकता है। इराक, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए निर्यात का यही एकमात्र प्राथमिक समुद्री रास्ता है। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसलिए इस द्वीप पर नियंत्रण या हमला सीधे तौर पर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है।

IRGC का अजेय सैन्य किला और ईरान का ‘मिसाइल सिटी’ कहलाता है यह द्वीप

रक्षा विशेषज्ञ केशम द्वीप को ईरान का ‘न डूबने वाला विमानवाहक पोत’ कहते हैं। इसका कारण यह है कि ईरान की स्पेशल सैनिक बल ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने पिछले कई दशकों में इस पूरे द्वीप को एक अभेद्य सैन्य किले में तब्दील कर दिया है।
आईआरजीसी ने पूरे द्वीप के नीचे अंडरग्राउंड टनल्स (भूमिगत सुरंगों) का एक विशाल और गुप्त नेटवर्क विकसित किया है, जिसे सैन्य भाषा में ईरान का ‘मिसाइल सिटी’ कहा जाता है। इन सुरंगों में अत्यधिक आधुनिक एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें और क्रूज मिसाइलें छिपाकर रखी गई हैं। ये पलक झपकते ही खाड़ी में मौजूद किसी भी बड़े से बड़े युद्धपोत को तबाह कर सकती हैं। इसके अलावा इस द्वीप पर ईरान के विशेष नौसैनिक अड्डे भी हैं, जहां रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस ‘फास्ट-अटैक क्राफ्ट’ तैनात हैं। ये नावें खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के बड़े जहाजों के खिलाफ झुंड के रूप में हमला करने की रणनीति में माहिर हैं।

इसे भी पढें: ‘लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी भारत का हिस्सा हैं’, विदेश मंत्रालय ने नेपाल को चेताया

आम लोगों का जीना हुआ मुहाल

केशम द्वीप के इस अत्यधिक सैन्यीकरण के कारण यहां रहने वाले आम नागरिकों को भी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। युद्ध के शुरुआती चरणों में हुए भीषण हवाई हमलों के दौरान इस द्वीप पर स्थित एक बहुत बड़े डिटेल्सिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने का कारखाना) को गंभीर नुकसान पहुंचा था।

इसके पूरी तरह नष्ट हो जाने से द्वीप के करीब 30 गांवों में पीने के साफ पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई थी। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि अमेरिका और ईरान ने तुरंत संयम नहीं बरता तो यह संकट कच्चे तेल की कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा देगा। इससे पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी और महंगाई का नया दौर आ सकता है।

Topics: ईरानअमेरिकाहोर्मुज जलडमरूमध्यहवाई हमलाईरान केशम द्वीप हमला
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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