ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के जनाजे में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे। ईरानी मीडिया के अनुसार, खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार चार जुलाई से नौ जुलाई के बीच आयोजित किया जाएगा। इस साल 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के ईरान पर किए गए संयुक्त हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी। बाद में उनके बेटे मोजतबा अली खामेनेई को सर्वोच्च नेता घोषित किया गया। खामेनेई के जनाजे को तेहरान से कोम ले जाया जाएगा, जहां लोग उन्हें अंतिम विदाई देंगे। इसके बाद जनाजे को उनकी जन्मभूमि मशहद ले जाया जाएगा, जहां उन्हें इमाम रजा दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा। फरवरी में हुए हमले में मारे गए खामेनेई की बेटी और दामाद को भी उसी दिन दफनाया जाएगा।
पीएम मोदी शामिल नहीं होंगे
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने जून माह की शुरुआत में खामेनेई के जनाजे में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया था। हालांकि, पीएम मोदी इसमें शामिल नहीं होंगे। उन्होंने खुद जाने की बजाय अपने दो प्रतिनिधि बिहार के राज्यपाल जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य पबित्रा मार्गेरिटा को भेजने का फैसला किया है। विदेश राज्य मंत्री अप्रैल में भी खामेनेई की स्मृति में आयोजित शोक सभा में शामिल हुए थे। ईरानी दूतावास ने खामेनेई के मृत्यु के 40वें दिन उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यह सभा आयोजित की थी।
खामेनेई ने तीन दशकों तक ईरान पर शासन किया
ईरान के अधिकारियों को उम्मीद है कि 4 जुलाई से शुरू होने वाले छह दिनों के दौरान लाखों लोग शोक मनाने के लिए सड़कों पर उतरेंगे। ये समारोह अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम शांति समझौते के बाद शुरू हो रहा है। अभी दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे पर हमले रोक दिए हैं। बताया जा रहा है कि खामनेई के जनाजे से जुड़े कार्यक्रम पांच, छह और सात जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किए जाएंगे, जबकि अंतिम कार्यक्रम नौ जुलाई को मशहद शहर में होगा। खामेनेई ने तीन दशकों तक ईरान पर शासन किया।
बता दें कि भारत और ईरान के बीच दशकों से मजबूत साझेदारी रही है। युद्ध के दौरान भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद नई दिल्ली ने तेहरान के साथ अपने संबंध बनाए रखे। इस दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच कई बार बातचीत हुई।

















