कर्णावती (गुजरात) । राष्ट्र सेविका समिति – गुजरात प्रांत का ‘प्रवेश एवं घोष वर्ग’ हाल ही में समिति की प्रमुख संचालिका आदरणीया शांता अक्का जी की गरिमामयी उपस्थिति में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सेविकाओं को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र रक्षा के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला।
“स्वरक्षण के साथ-साथ राष्ट्र और समाज का रक्षण हमारा कर्तव्य”
शांता अक्का जी ने सेविकाओं में ऊर्जा का संचार करते हुए कहा कि हमें केवल अपने तक सीमित नहीं रहना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सेविका का कर्तव्य केवल स्वरक्षण (Self-defense) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र एवं समाज का रक्षण करना भी हमारा परम कर्तव्य है।

संस्कारों का जीवन में प्रकटीकरण: प्रमुख संचालिका जी ने जोर देते हुए कहा कि
“राष्ट्र सेविका समिति के संस्कार केवल शाखा या प्रशिक्षण वर्ग की परिधि तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि वे हमारे दैनिक जीवन और सामान्य व्यवहार में स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं।”
भारतीय संस्कृति: एक पुण्य प्रवाह
भारतीय संस्कृति की महानता को रेखांकित करते हुए प्रमुख संचालिका जी ने इसे एक अविरल और पवित्र धारा बताया।
“भारतीय संस्कृति एक पुण्य प्रवाह है, जिसमें कुटुंब (परिवार), आत्मीयता, मर्यादा एवं श्रेष्ठ व्यवहार को सबसे विशेष स्थान प्राप्त है। इसी संस्कृति को सहेजना और आगे बढ़ाना हमारा लक्ष्य है।”
राष्ट्र सेविका समिति का मूल ध्येय
कार्यक्रम के समापन की ओर बढ़ते हुए इस बात पर बल दिया गया कि समाज, राष्ट्र एवं स्वयं के संरक्षण तथा उत्थान के लिए सदैव सजग और तत्पर रहना ही राष्ट्र सेविका समिति का अंतिम ध्येय है। इस वर्ग में शामिल सेविकाओं ने घोष (Band) और शारीरिक व मानसिक प्रशिक्षण के माध्यम से राष्ट्र सेवा का दृढ़ संकल्प लिया।




















