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परिवार बचाने की पहल

कम से कम तीन संतान पैदा करने वाले माता-पिता को ‘मंगलमय परिवार’ ने किया सम्मानित। ‘मंगलमय परिवार’ का मानना है कि एक बच्चे की नीति देश और हिंदू समाज के लिए ठीक नहीं है

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
Jul 9, 2026, 03:57 pm IST
in भारत, कुटुम्ब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य
एक दंपति को सम्मानित करते कुछ वरिष्ठ जन

एक दंपति को सम्मानित करते कुछ वरिष्ठ जन

आज हिंदुओं की प्रजनन दर तेजी से कम हो रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, हिंदुओं की प्रजनन दर 1.94 हो गई है। यह दर जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए आवश्यक ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ (2.1) से भी कम है। 1992-93 में हिंदुओं की प्रजनन दर 3.3 थी। यानी हिंदुओं की जन्म दर 1.36 गिर चुकी है। स्वाभाविक रूप से यह गिरावट पूरे हिंदू समाज के लिए चिंता की बात है। इसे देखते हुए कई संगठन हिंदुओं की जन्म दर को स्थिर रखने या फिर उसे बढ़ाने के प्रयास में लगे हैं। ऐसा ही एक संगठन है- ‘मंगलमय परिवार।’

गत 28 जून को मंगलमय परिवार ने नोएडा के सेक्टर 12 स्थित भाऊराव देवरस विद्या मंदिर के सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया। ‘मंगलमय परिवार’, नोएडा के महामंत्री श्री प्रवीण शर्मा के अनुसार, “कार्यक्रम में 31 ऐसे माता-पिता को सम्मानित किया गया, जिनकी आयु 50 वर्ष है और जिनकी तीन संतानें हैं। इनका सम्मान उन माता-पिता ने किया, जो 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं और जिनके पास तीन बच्चे हैं।’’

उन्होंने यह भी कहा, “जिन माता-पिता को सम्मानित किया गया वे ऐसे परिवार से हैं, जिन्हें मध्यम वर्ग कहा जाता है। यह अनुभव हो रहा है कि मध्यम वर्ग ‘हम दो, हमारे दो’ की नीति को भी छोड़ रहे हैं। इस वर्ग के अधिकतर दंपति अब एक बच्चे ही पैदा कर रहे हैं। यह न तो हिंदू समाज के लिए ठीक है और न ही देश के लिए ठीक है। इस माहौल में भी जो माता-पिता तीन बच्चे पैदा कर रहे हैं, वे सम्मान के पात्र हैं और इसलिए उन्हें सम्मानित किया गया।’’ कार्यक्रम में प्रख्यात कथावाचक श्री विजय कौशल जी महाराज विशेष रूप से पधारे और उन्होंने सम्मानित माता-माता को आशीर्वाद दिया। अपने आशीर्वचन में श्री विजय कौशज जी महाराज ने कहा, “भारत परिवारों का देश है। परिवारों से ही देश और समाज बनता है, लेकिन कुछ समय से भारतीय परिवार व्यवस्था पर आक्रमण हो रहा है। पहले यह आक्रमण ‘हम दो, हमारे दो’ के रूप में हुआ। कुछ वर्षों से एक बच्चे का चलन चल रहा है। और अब तो कुछ दंपति बच्चा ही पैदा नहीं करना चाहते हैं। यह हमारी परिवार व्यवस्था और भारत देश के लिए खतरनाक संकेत है।’’ उन्होंने कहा, “एक बच्चे की नीति से कुछ वर्षों में पूरी परिवार व्यवस्था बिगड़ जाएगी। ऐसे बच्चों को चाचा-चाची, बुआ-फूफा, मौसा-मौसी, भाई-भाभी जैसे संबंधों से वंचित होना पड़ रहा है। जब संबंध ही नहीं बचेंगे, तो तीज-त्योहार कैसे मनाए जाएंगे! और जब तीज-त्योहार नहीं होंगे, तो फिर हमारी संस्कृति कैसे बचेगी!’’ उन्होंने कहा कि लोग एक बच्चा पैदा कर रहे हैं और लिख-पढ़कर वह अकेला बच्चा भी विदेश में नौकरी करने लगता है और वहीं बस जाता है। दूसरी ओर उसके वृद्ध माता-पिता नौकरों के भरोसे भारत में जैसे-तैसे जीवन गुजार रहे होते हैं। उन्हें न तो समय पर खाना मिलता है और बीमार होने पर दवाई खिलाने वाला भी कोई नहीं होता है। ऐसे में बुजुर्ग वृद्धाश्रमों की शरण ले रहे हैं। यह भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि जीवन में सब कुछ पैसा ही नहीं होता। जीवन-यापन के लिए पैसा आवश्यक है, लेकिन परिवार व्यवस्था को चलाना भी हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए देश और परिवार व्यवस्था को चलाने के लिए सक्षम दंपति अनेक बच्चे पैदा करें। इस अवसर पर कई संगठनों के वरिष्ठ कार्यकर्ता और समाजसेवी उपस्थित थे।

Topics: मंगलमय परिवारतीन संतानहिंदू जन्म दरपरिवार संरक्षणहिंदू समाजपरिवार और समाजभारतीय संस्कृतिसम्मानित दंपतिसंयुक्त परिवारहिंदू प्रजनन दरपाञ्चजन्य विशेषपारिवारिक मूल्य
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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