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क्यों जल रहा है पेरिस और क्यों हो रही हैं गिरफ्तारियाँ?

चैंपियंस लीग जीत पर पेरिस में दंगे: ईफेल टावर के पास आग, दुकानों में तोड़फोड़ और पुलिस पर हमले। मरीन ले पेन बोलीं - केवल फ्रांस में ही ऐसा संभव। PSG फैंस का जश्न हिंसा में क्यों बदला?

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Jun 1, 2026, 11:48 am IST
inविश्व
Paris Chimpions league Violenece

पेरिस को फैशन और कला का गढ़ कहा जाता है और यह भी कहा जाता है कि जो पेरिस में लोग फैशन करते हैं, वहीं पूरी दुनिया के लोग बाद में करते हैं, तो इस कारण से उसे अग्रणी कहा जाता है। मगर इन दिनों पेरिस में जो हो रहा है, यदि वही दुनिया का भविष्य है तो वह काफी भयावह है। वह इस सीमा तक भयावह है कि कोई भी उसे अपनाना नहीं चाहेगा। कोई भी देश नहीं चाहेगा कि ऐसा कुछ भी उनके यहाँ हो।

मगर पेरिस में हो क्या रहा है?

अब सवाल यह उठता है कि पेरिस में हो क्या रहा है? दरअसल, पेरिस में चैंपियन लीग हो रही है और उसमें कई टीमें भाग ले रही हैं। यह फुटबॉल की होती है और यह यूरोप की सबसे प्रतिष्ठित क्लब फुटबॉल प्रतियोगिता है। इस लीग में फ्रांस का मुख्य क्लब पेरिस सेंट जर्मन भी भाग लेता है।

इस लीग के फाइनल में आर्सेनल की टीम को फ्रांस के क्लब पेरिस सेंट जर्मन ने हरा दिया। अब होना यह चाहिए था कि फ्रांस का क्लब जीता तो वहाँ पर खुशियां मनानी चाहिए थीं और लोग एक दूसरे के साथ जश्न मनाते। मगर हुआ यह कि फ्रांस के क्लब की जीत पर फ्रांस की सड़कों पर कथित जश्न मनाने के लिए इकट्ठे हुए लोगों ने अपना शक्ति प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

जो लोग इकट्ठे हुए थे, वे फ्रांस की खुशी में शामिल होना चाहते थे या फिर हिंसा की नदियां बहाना चाहते थे, यह भी एक प्रश्न है और गंभीर प्रश्न है क्योंकि जो हुआ, वह किसी भयावह सपने से कम नहीं है। इस जीत के बाद सड़कों पर लोग उतर आए और उन्होंने दुकानों में तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी। शहर की व्यस्त सड़कों पर खुले में आतिशबाजी करनी शुरू कर दी, जिसके कारण पैदल चलते लोगों के बीच अफरातफरी मच गई।

इसे भी पढ़ें: चीन की अश्वेत गुड़िया ‘नताशा’ पर क्यों मचा विवाद?

वे लोग पुलिस से भिड़ गए और गाड़ियों में आग लगाने लगे और हर तरह की हिंसक गतिविधियां सड़कों पर होने लगीं। देखते ही देखते फ्रांस के कई शहरों में ऐसे जश्न फैल गए।

सरकार को अंदेशा था और पुलिस व्यवस्था भी थी

सरकार को भी कुछ गलत होने का अंदेशा था, इसी कारण फ्रांस की सरकार ने लगभग 22,000 पुलिस कर्मियों की तैनाती पूरे देश में की थी, जिनमें से 8,000 तो केवल पेरिस में ही थे। सार्वजनिक सुरक्षा के लिए फ्रांस में कई मेट्रो स्टेशन और ट्राम लाइनों को कुछ समय के लिए बंद भी कर दिया था।

सरकार के पास सूचना थी कि फ्रांस के कथित समर्थक इस तरह की आगजनी आदि कर सकते हैं, और यह गलत भी नहीं निकला।

फ्रांस में इस तरह के दंगे हैं आम

फ्रांस में यह दंगे आम हैं। पहले भी ऐसे दंगे चैंपियन लीग को लेकर हो चुके हैं। मगर इस बार इसकी व्यापकता अधिक है। जब लोग जश्न मनाने के लिए इकट्ठे हुए, तो वहाँ पर ऐसे लोग आ गए जिनका न ही लीग से कोई नाता था और न ही फुटबॉल से। जश्न में उन इलाकों से लोग आ गए, जहां पर अप्रवासी रहते हैं। जैसे कि उत्तर अफ्रीकी (मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया) और सब-सहारा अफ्रीकी मूल के युवा। और इन लोगों ने जश्न में आकर हंगामा करना शुरू कर दिया। इन्होंने आगजनी और लूटपाट शुरू कर दी।

सोशल मीडिया पर जो वीडियोज़ वायरल हैं, उनमें ट्यूनीशियन, अल्जेरियन औऱ मोरक्कन झंडे भी दिखे। फ्रांस के इंटीरियर मिनिस्टर ने कहा कि अधिकतर लोग बाहर जश्न करने के लिए आए थे और सब कुछ अच्छा चल रहा था। मगर कुछ लोग जो न ही पीएसजी के समर्थक थे और जो मैच देखते भी नहीं थे, वे यहाँ पर हंगामा करने और अशान्ति फैलाने के लिए आए थे। उन्होंने आगे कहा कि सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए मौजूद है और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी।

ऐसा केवल फ्रांस में ही संभव: मरीन ले पेन

फ्रांस की राष्ट्रवादी नेता मरीन ले पेन ने एक्स पर लिखा कि यह केवल फ्रांस में ही हो सकता है कि फ्रांस के एक क्लब के फुटबॉल मैच जीतते ही देश में दंगे फैल जाएं। उन्होंने लिखा कि केवल फ्रांस में ही ऐसा हो सकता है कि जीत का जश्न मनाने का मन रखने वाले लोग घरों में इस कारण कैद हो जाएं कि कहीं वे हिंसा का शिकार न हो जाएं।

सोशल मीडिया पर वीडियो की भरमार

सोशल मीडिया पर अनेक वीडियो इस हिंसा के हैं। सबसे महत्वपूर्ण वीडियो है एफ़िल टावर के पास आग लगाते हुए लोगों का। जरा कल्पना करें कि जिस प्रतीक से फ्रांस की पहचान है, उसे ही जीत के जश्न में जलाने का लोग सोच रहे हों। आतंकियों ने ऐतिहासिक प्रतिमाओं को भी जला दिया। ऐसा लग रहा था कि जैसे सड़कों पर आग ही आग हो। लोगों ने सवाल किये कि क्या शरणार्थियों की तरफदारी करने वाले नेता ऐसी जगहों में, ऐसे जश्नों में अपनी बेटियाँ भेजेंगे?

पेरिस में बाहर से आए पर्यटक भी फंस गए थे। लोग कह रहे हैं कि आप तीसरी दुनिया के लोगों को शरण देते हैं, तो आप खुद ही तीसरी दुनिया बन जाते हैं। हालांकि पहले स्थिति पुलिस के नियंत्रण से बाहर हुई थी, परंतु एक दिन में ही पुलिस ने लगभग 800 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

Topics: PSG चैंपियंस लीग जीत पर दंगेपेरिस दंगापेरिस दंगे 2026फ्रांस चैंपियंस लीग जश्न हिंसा
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