चीन की अश्वेत गुड़िया “नताशा”: जैसे ही हम गुड़िया की बात करते हैं तो वैसे ही हम सभी के दिमाग में बस खेलने के लिए गुड़िया का ध्यान आता है। भारतीय परिदृश्य में देखें तो गुड़िया लड़कियों की साथी होती थी। हम लोगों में से लगभग सभी का जीवन गुड़िया और गुड्डे की शादी करते हुए बीता है। पहले कपड़े की गुड़िया आती थीं, उसके बाद प्लास्टिक की हुई और बाद में बार्बी डॉल! मगर गुड़िया का क्रेज़ किसी भी पीढ़ी में कभी कम नहीं हुआ।
मगर चीन में इन दिनों ऐसी गुड़िया का क्रेज़ है, जिसे कई स्कूलों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। जिसे लेकर अंतर्राष्ट्रीय हंगामा हो रहा है। जिसे लेकर चीन पर और चीनी नागरिकों पर नस्लवादी होने के आरोप लग रहे हैं। आखिर क्या है यह मामला? क्या है गुड़िया की कहानी?
क्या है मामला
सोशल मीडिया पर इन दिनों चीनी गुड़िया नताशा छाई हुई है। वह किसी गुण के कारण नहीं, बल्कि अपने रूप के कारण और किस कारण से उसे बनाया गया है, उसके कारण छाई हुई है। दरअसल, चीन में तनाव मिटाने के लिए एक गुड़िया बनाई। इस गुड़िया को ‘नताशा’ नाम दिया गया।
अपना तनाव मिटाने के लिए लोग उसे मार सकते हैं, उसे पीट सकते हैं, उसमें पानी भरकर उसे फुलाकर मार सकते हैं, उसे सड़क पर फेंककर अपना गुस्सा निकाल सकते हैं। यह सॉफ्ट सिलिकॉन से बनी हुई है, जिसके कारण लोग इसे मन के अनुसार खींच सकते हैं और कोई भी आकार दे सकते हैं।
अर्थात यह गुड़िया अपना तनाव निकालने को लेकर है। अब यह कहा जा सकता है कि जब तनाव निकालने के लिए यह है, तो फिर विवाद क्या है?
अश्वेत रूप पर मचा घमासान
विवाद दरअसल, इसके रूप को लेकर है। यह पूरी तरह से अश्वेत गुड़िया है। काले रंग की इस गुड़िया को अश्वेत अफ्रीकी बच्चे के जैसा बनाया गया है। वैसे तो चीन की खबरें बाहर नहीं आती हैं, और उस पर अश्वेत लोगों के साथ चीन में क्या भेदभाव होता है, वह खबरें तो बिलकुल भी बाहर नहीं आती हैं।
चीन में कई विज्ञापन ऐसे बने थे, जिनसे अश्वेतों के प्रति उनकी घृणा दिखाई दी थी। और अब नताशा बनाकर यह घृणा अपने चरम रूप में सामने आई है। मगर इस मामले का तब और खुलकर पता चला, जब चीनी इंफ्लुएंसर्स अफ्रीका गए और उन्होनें वहाँ के अश्वेत बच्चों का यह कहकर वीडियो पोस्ट किया कि “इस नताशा के साथ कौन खेलेगा?” और फिर उन्होनें उन अश्वेत बच्चों के साथ अजीब वीडियो बनाए।
उन बच्चों के रोने, हंसने और नहाने तक के वीडियो बनाए। एक इंफ्लुएंसर के नाइजीरिया जाकर “harm this Natasha” ट्रेंड पर बवाल मचा।
https://Twitter.com/zerobarkthirty/status/2060839086311829700?
इसमें देखा जा सकता है कि एक चीनी इंफ्लुएंसर एक अश्वेत बच्चे का अपमान कर रही है और वह उसे नताशा गुड़िया की तरह ही देख रही है। चीनी लोग अफ्रीका जाकर इन बच्चों के साथ इस ट्रेड का हिस्सा बन रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह और कुछ नहीं बल्कि अश्वेत समुदाय के प्रति चीनी लोगों की घृणा है।
चीन में अश्वेत लोगों के साथ होता है दुर्व्यवहार
चीन में अश्वेत लोगों के साथ दुर्व्यवहार के कई मामले सामने आते हैं, मगर चीन इसे यह कहकर नकारता है कि यह संस्थागत नहीं है। मगर चीनी मानसिकता अश्वेत लोगों के प्रति कैसी है, यह विज्ञापनों से भी पता चलता है। साल 2016 में चीन में वाशिंग पाउडर के एक विज्ञापन पर काफी हंगामा हुआ था। जिसमें एक अश्वेत व्यक्ति वाशिंग मशीन में जाता है और श्वेत होकर वापस आता है। इसे सबसे घृणित विज्ञापन कहा गया था। अफ्रीका से लेकर हर देश ने इस पर आपत्ति व्यक्त की थी और जब ज्यादा आलोचना हुई थी तो इस विज्ञापन को लेकर माफी तो मांगी गई थी, मगर विदेशी मीडिया को “हाइपर सेंसिटिव” की संज्ञा भी दी गई थी।
जिन्हें अपमानित करना होता है, उन्हें वे अश्वेत दिखाते हैं। चीन में 1970-80 के दशक से ही अफ्रीकी छात्रों के खिलाफ कई घटनाएं सामने आती रही हैं। लोग यह भी आरोप लगाकर इनपर हमला करते थे कि वे चीनी महिलाओं के साथ रिलेशनशिप रखते थे। अफ्रीकी छात्रों को गंदा, आलसी, उग्र और असभ्य माना जाता है।
कोविड के दौरान अफ्रीकी व्यापारियों के साथ भेदभाव चरम पर पहुँच गया था। उन्हें होटल और घरों से निकाल दिया गया था। उन्हें जबरन क्वारंटीन कर दिया गया था और रेस्टोरेंट आदि में भी उनके प्रवेश को रोक दिया गया था। अश्वेत लोगों के प्रति चीनी लोगों की घृणा कई प्लेटफ़ॉर्म पर भी दिखती है। Weibo, Douyin, Bilibili आदि प्लेटफॉर्म्स पर अश्वेत विरोधी कंटेंट आम है। अगर चीनी लड़की और अश्वेत लड़के का संबंध दिखाया जाता है तो इसे रेस कंटैमिनेशन कहा जाता है।
नताशा के माध्यम से घृणा को मिलता है रूप
नताशा के माध्यम से इस अश्वेत घृणा को नया रूप मिला है। इसे लेकर जहां एक तरफ लोग अश्वेत लोगों के प्रति अपनी घृणा दिखा रहे हैं तो वहीं कुछ स्कूलों ने इसे खतरनाक मानते हुए प्रतिबंधित कर दिया है। कुछ वीडियोज़ में इसे cute ugly black baby कहकर प्रसारित किया जा रहा है।
अश्वेत समुदाय ने इस डॉल को लेकर और उसके बाद चीनी लोगों के व्यवहार को लेकर चिंता जताई है और उनका कहना है कि यह अश्वेत समुदाय के प्रति घृणा निकालने का एक षड्यन्त्र है। मगर एक बात समझ नहीं आती है कि चीन में दशकों से फैली इस अश्वेत घृणा को लेकर भारत का वह वामपंथी समाज क्यों बात नहीं करता है, जो लगातार समानता की बात करता है, जो जातिभेद, लिंगभेद और रंगभेद से परे सोच की बात करता है, मगर फिर भी वह चीन में न ही मुस्लिमों के साथ हो रहे अन्याय की बात करता है और न ही अश्वेतों के प्रति!
इस नताशा डॉल, जिस पर पूरा विश्व उबल रहा है, भारत का समानता पेक्षी वामवर्ग चुप है, और वह क्यों चुप है, इसके विषय में अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।











