भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) देश के युवाओं को केवल सफल करियर की दिशा ही नहीं दे रही है, बल्कि उन्हें राष्ट्रसेवा, नेतृत्व और चरित्र निर्माण की ओर भी प्रेरित कर रही है। वे भुवनेश्वर स्थित शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान विश्वविद्यालय में अभाविप द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक की पूर्व संध्या पर आयोजित भव्य ‘सिविक रिसेप्शन कार्यक्रम’ को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर अभाविप के कार्यकर्ता, पूर्व कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित ओडिशा भर से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ मंच पर अभाविपके राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी, ओडिशा (पूर्व) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. देवेश शंकर होता, ओडिशा (पूर्व) प्रदेश सचिव दीप्तिमयी प्रतिहारी , रिसेप्शन समिति अध्यक्ष प्रबोध मोहंती तथा महासचिव अजय अग्रवाल उपस्थित थे। अभाविपके राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान तथा राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री एस. बालकृष्ण, गोविंद नायक और देवदत्त जोशी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। भुवनेश्वर के अनेक प्रख्यात नागरिक, शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी तथा अभाविपके पूर्व छात्र कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में भाग लिया ।

सीएम माझी ने देशभर से आए प्रतिनिधियों का किया स्वागत
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर में आयोजित अभाविपकी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक के लिए देशभर से आए छात्र प्रतिनिधियों और युवा नेताओं का स्वागत किया।
उन्होंने भुवनेश्वर को ओडिशा की “मंदिर नगरी” तथा भगवान जगन्नाथ, कला, संस्कृति और वैदिक परंपरा की पवित्र भूमि बताते हुए कहा कि यह शहर युवा नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित राष्ट्रीय आयोजन के लिए एक आदर्श स्थल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभाविपअपने “ज्ञान, चरित्र और एकता” के मूल मंत्र के आधार पर निरंतर छात्र हित, राष्ट्रीय हित और सामाजिक जागरूकता के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजनकर्ता बनने की आकांक्षा रखनी चाहिए। उद्यमिता, नवाचार और युवा नेतृत्व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर
मुख्यमंत्री ने अभाविपद्वारा शुरू किए गए उन अभियानों की सराहना की, जो युवाओं को शैक्षणिक और करियर संबंधी आकांक्षाओं से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने संगठन के ‘ स्क्रिन टाइम टू एक्टिविटी टाइम ’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह छात्रों को सामाजिक सेवा, पर्यावरण जागरूकता, खेलकूद और समाज में रचनात्मक सहभागिता की ओर प्रेरित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं में आत्मविश्वास और आत्मरक्षा की भावना विकसित करने पर केंद्रित ‘मिशन साहसी’ पहल की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अभाविपने अपने निरंतर प्रयासों से यह सिद्ध किया है कि ‘छात्र शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है’।
उन्होंने आगे कहा कि 1949 में स्थापना के बाद से अभाविप ने न केवल छात्र नेतृत्व तैयार किया है, बल्कि राष्ट्रवादी नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पित जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में भी योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि आपातकाल से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े मुद्दों तक अभाविपहमेशा राष्ट्रीय आंदोलनों में अग्रणी रही है। आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक की चर्चाओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बैठक में लिए गए विचार-विमर्श और निर्णय, महाप्रभु जगन्नाथ के आशीर्वाद से राष्ट्र और समाज के हित में सकारात्मक योगदान देंगे।
अभाविप ने राष्ट्रीयवादी युवा नेतृत्व का आह्वान किया
इस अवसर पर अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक एक महत्वपूर्ण संगम है, जो राष्ट्रीय हित, छात्र कल्याण और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने भुवनेश्वर को महाप्रभु जगन्नाथ और बाबा लिंगराज की पवित्र भूमि बताते हुए कहा कि ओडिशा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण इस राष्ट्रीय आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करता है। डॉ. सोलंकी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता और बदलते राष्ट्रीय परिदृश्य में भारत को एक संतुलित वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरना होगा। इसके लिए देश के युवाओं और छात्रों को राष्ट्रवाद और सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना के साथ आगे आना होगा।
उन्होंने कहा कि अभाविपलगातार अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर उत्पन्न चुनौतियों जैसे मुद्दों को उठाती रही है। उन्होंने आगे कहा कि संगठन के वैचारिक और सामाजिक अभियानों ने देशभर के युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मानसिक स्वास्थ्य और स्क्रीन एडिक्शन पर केंद्रित अभियान
डॉ. सोलंकी ने छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ते मानसिक तनाव और अत्यधिक स्क्रीन टाइम की चुनौती पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ‘आनंदमय सार्थक छात्र जीवन’ और ‘स्क्रिन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ जैसे अभियान विद्यार्थियों को स्वस्थ, सकारात्मक और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये अभियान जनरेशन जेड को भारतीय चेतना, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना से पुनः जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। अभाविपकी विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मिशन साहसी, छात्र संसद, थिंक इंडिया , मेडिविजन, एग्रीविजन और फार्मा विजन जैसे कार्यक्रम नेतृत्व विकास, चरित्र निर्माण, नीति सहभागिता और छात्रों में राष्ट्रवादी व्यक्तित्व निर्माण पर केंद्रित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक संगठन की भविष्य की गतिविधियों को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
महाराजा खारवेल प्रदर्शनी ने आकर्षित किया ध्यान
राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक की तैयारियों और आयोजन के तहत ‘महाराजा खारवेल प्रदर्शनी’ नामक एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन कार्यक्रम स्थल के सभागार परिसर में किया गया। इस प्रदर्शनी में ओडिशा की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत, लोक परंपराएं, शैक्षणिक धरोहर तथा देशभर में अभाविपद्वारा वर्षभर किए गए विभिन्न कार्यों को प्रदर्शित किया गया। 30 छात्रों द्वारा लगभग 120 घंटे के समर्पित प्रयास से तैयार इस प्रदर्शनी ने ओडिशा की सांस्कृतिक समृद्धि और अभाविपकी संगठनात्मक यात्रा दोनों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

प्रदर्शनी में ओडिशा की विरासत और अभाविपगतिविधियों का प्रदर्शन
राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक से पूर्व इस प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम स्थल के भूतल स्थित सभागार में किया गया। इस उद्घाटन समारोह में ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र, रमा देवी महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. ज्योत्स्ना के.बी. राउत, अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी तथा राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान उपस्थित रहे। प्रदर्शनी में ओडिशा की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया गया, जिसमें भगवान जगन्नाथ की आध्यात्मिक परंपराएं, पारंपरिक त्योहार, लोक कला, हस्तशिल्प तथा कोणार्क सूर्य मंदिर के प्रसिद्ध कोणार्क चक्र को प्रमुख रूप से दर्शाया गया। कोणार्क चक्र को ओडिशा की स्थापत्य कला, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सभ्यतागत विरासत के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
इस प्रदर्शनी में अभाविपकी सेवा गतिविधियों, छात्र आंदोलनों, जन-जागरूकता अभियानों तथा देशभर में संचालित संगठनात्मक पहलों को भी विस्तृत रूप से प्रदर्शित किया गया।
रत्नागिरी-प्रेरित प्रवेश द्वार ने दर्शाई ओडिशा की शैक्षिक विरासत
प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षणों में इसका प्रवेश द्वार रहा, जिसे प्राचीन रत्नागिरी विश्वविद्यालय की स्थापत्य शैली में डिजाइन किया गया था। यह डिजाइन ओडिशा की ऐतिहासिक शिक्षा परंपरा, ज्ञान-साधना और बौद्धिक उत्कृष्टता की विरासत का प्रतीक है। आगंतुकों ने ओडिशा की प्राचीन शैक्षिक धरोहर को आधुनिक युवा आंदोलनों और छात्र सहभागिता के साथ जोड़ने के प्रयास की सराहना की। यह प्रदर्शनी एक सांस्कृतिक प्रदर्शन और संगठनात्मक प्रस्तुति दोनों के रूप में सामने आई, जो विरासत, राष्ट्रवाद और युवा भागीदारी के उस समन्वय को दर्शाती है, जिसे अभाविपआगे बढ़ाने का प्रयास करता है।
राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक 29 से 31 मई तक
उल्लेखनीय है कि अभाविप की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक 29 से 31 मई तक भुवनेश्वर में आयोजित की जाएगी। इस तीन दिवसीय बैठक में देशभर के विभिन्न राज्यों से आए कुल 484 कार्यकर्ता प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। बैठक में छात्र हित, शैक्षिक सुधार, राष्ट्रीय मुद्दों और संगठनात्मक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

















