ओडिशा सरकार ने जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप के साथ 67,000 करोड़ के समझौते पर हस्ताक्षर किए
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ओडिशा सरकार ने जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप के साथ 67,000 करोड़ के समझौते पर हस्ताक्षर किए

वैश्विक निवेश आकर्षित करने और राज्य में औद्योगिक परिवर्तन को गति देने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत, ओडिशा सरकार ने गुरुवार को जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jul 4, 2026, 12:12 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: वैश्विक निवेश आकर्षित करने और राज्य में औद्योगिक परिवर्तन को गति देने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत, ओडिशा सरकार ने गुरुवार को जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य राज्य में बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत औद्योगिक परियोजनाओं का विकास करना है।

प्रस्तावित सहयोग में कुल ₹67,000 करोड़ का निवेश शामिल है और इससे लगभग 7,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। यह समझौता भुवनेश्वर में आयोजित “जापानी व्यापार प्रतिनिधियों के साथ संवाद” कार्यक्रम के दौरान संपन्न हुआ, जिसमें वरिष्ठ नीति-निर्माता, वैश्विक उद्योग जगत के दिग्गज और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर ओडिशा में भविष्य के निवेश अवसरों पर विस्तृत चर्चा की गई।

स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और सतत विकास पर केंद्रित समझौता
इस समझौता ज्ञापन में ओडिशा सरकार, आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप की साझा दृष्टि को रेखांकित किया गया है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। अधिकारियों ने बताया कि यह साझेदारी ओडिशा के मजबूत संसाधन आधार, विस्तारित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और निवेश-अनुकूल नीतियों का लाभ उठाकर प्रौद्योगिकी आधारित निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगी।

यह सहयोग प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, औद्योगिक विविधीकरण और सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा, जिससे ओडिशा भारत में हरित ऊर्जा उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकेगा। यह पहल राज्य की उस व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य ओडिशा को भविष्य-उन्मुख उद्योगों, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा और रासायनिक मूल्य श्रृंखलाओं का एक प्रमुख केंद्र बनाना है।

प्रमुख निवेश परियोजनाएं घोषित
इस प्रस्तावित ढांचे के तहत ओडिशा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कई बड़ी परियोजनाओं की पहचान की गई है। गोपलपुर–टाटा एसईजेड में 0.4 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता की ग्रीन अमोनिया परियोजना स्थापित की जाएगी, जिसमें ₹20,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इस परियोजना से लगभग 3,400 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके साथ ही एक जेटी-रहित फ्लोटिंग टर्मिनल अवसंरचना का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिस पर अतिरिक्त ₹1,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसी प्रकार, पारादीप में 0.8 एमटीपीए ग्रीन अमोनिया परियोजना प्रस्तावित है, जिसमें ₹34,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा और इससे लगभग 3,600 रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, ₹12,000 करोड़ की एक ग्रीन मेथेनॉल परियोजना भी प्रस्तावित है, जिससे राज्य की हरित ईंधन उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजार में निर्यात संभावनाओं को और मजबूती मिलेगी। अधिकारियों ने कहा कि ये परियोजनाएं न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देंगी, बल्कि ओडिशा को ग्रीन केमिकल्स और औद्योगिक ईंधन के निर्यात केंद्र के रूप में भी स्थापित करेंगी।

भारत और जापान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी
इस उच्च-स्तरीय कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाई, मुख्य सचिव सुश्री अनु गर्ग, ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विश्व बैंक समूह के प्रतिनिधि और जापान दूतावास के अधिकारी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। जापानी प्रतिनिधिमंडल में आईएचआई कॉर्पोरेशन, मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी इंक. और भारत में कार्यरत या निवेश की संभावनाएं तलाश रही अन्य प्रमुख जापानी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

एसीएमई ग्रुप के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में भाग लिया। इसके अलावा टीआरएल क्रोसाकी , टी.वाई.के कॉर्पोरेशन, इंडो निसिन सहित कई वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने पूर्वी भारत में ओडिशा की बढ़ती निवेश क्षमता को रेखांकित किया।

वैश्विक वित्तीय संस्थानों का समर्थन
कार्यक्रम में विश्व बैंक समूह, अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उनकी उपस्थिति ने ओडिशा की औद्योगिक विकास दिशा और सतत अवसंरचना निर्माण प्रयासों में वैश्विक विश्वास को दर्शाया। अधिकारियों ने कहा कि इन बहुपक्षीय संस्थानों की भागीदारी से परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता और निवेश स्थिरता को और मजबूती मिलेगी। ओडिशा को उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि जापान लंबे समय से भारत का एक भरोसेमंद विकास साझेदार रहा है, जो अपनी तकनीकी उत्कृष्टता, नवाचार और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ओडिशा के औद्योगिक सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह राज्य को वैश्विक प्रतिस्पर्धी उद्योग केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री ने जापानी कंपनियों को ओडिशा में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि यह साझेदारी “समृद्ध ओडिशा 2036” और “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह सहयोग गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन, तकनीकी हस्तांतरण और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में ओडिशा की स्थिति को मजबूत करेगा।

निवेश-अनुकूल वातावरण का आश्वासन
उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वांई ने कहा कि ओडिशा अपनी प्रगतिशील नीतियों, मजबूत अवसंरचना और कुशल प्रशासनिक प्रणाली के कारण वैश्विक निवेशकों के लिए एक अत्यंत अनुकूल गंतव्य बना हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी, ताकि निवेश प्रस्ताव शीघ्र ही वास्तविक औद्योगिक विकास में परिवर्तित हो सकें। उन्होंने कहा कि जापानी उद्योगों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी राज्य के भविष्य के औद्योगिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जापानी उद्योगों का ओडिशा पर भरोसा आईएचआई कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष हिरोशी आइडे ने कहा कि ओडिशा में औद्योगिक क्षमता, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों का अनूठा संयोजन मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग जापानी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और ओडिशा की औद्योगिक शक्ति को जोड़कर भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान देगा। एसीएमई ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष मनोज उपाध्याय ने कहा कि यह साझेदारी सरकारी समर्थन, वैश्विक तकनीक और निष्पादन क्षमता को जोड़कर नई पीढ़ी की हरित ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में सहायक होगी। उन्होंने ओडिशा के मजबूत नीति ढांचे और औद्योगिक आधार पर विश्वास व्यक्त किया।

भविष्य के उद्योग क्षेत्रों में रुचि
मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी इंक. और अन्य जापानी एवं वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, एयरोस्पेस, शिपबिल्डिंग, उन्नत विनिर्माण, मशीनरी, इस्पात, रसायन, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने ओडिशा सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों की सराहना की और कहा कि इससे राज्य में व्यापार सुगमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एमएसएमई और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ अधिकारियों ने बताया कि इस निवेश से एमएसएमई, सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय उद्यमों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। यह परियोजनाएं एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेंगी, जिससे कौशल विकास, उद्यमिता और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार ने यह भी कहा कि स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय आर्थिक विकास को अधिकतम किया जा सके। ₹67,000 करोड़ के इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर ओडिशा और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह पहल राज्य में औद्योगिक परिवर्तन को तेज करेगी, स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को मजबूत करेगी और ओडिशा को भारत में उन्नत विनिर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

Topics: CM Mohan MajhiIHI CorporationACME GroupOdisha NewsjapanOdisha
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