जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार गर्मी बढ़ती जा रही है। इसका असर दुनियाभर में पड़ रहा है। स्पेन से लेकर फ्रांस तक गर्मी से झुलस रहे हैं। इसी तरह के दक्षिण कोरिया में है। वहां, पिछले एक सदी से ज्यादा पुराने मौसम रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों को चेतावनी दी है कि प्रभावित इलाकों में तुरंत सारी बाहरी गतिविधियां रोक दें।
42.5 डिग्री का नया रिकॉर्ड
कोरिया मेटियोरोलॉजिकल एडमिनिस्ट्रेशन (KMA) के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी शहर यांगसान में रविवार दोपहर तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह 1904 से अब तक का सबसे ऊंचा तापमान है। यांगसान में यह लगातार पांचवां दिन था जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा। दूसरे कई शहरों जैसे दाएगू और बुसान में भी तापमान ऊंचे 30 के दशक में पहुंच रहा था।
इमरजेंसी अलर्ट जारी
रविवार को 20 से ज्यादा जगहों पर इमरजेंसी हीटवेव अलर्ट जारी किया गया। यह नया प्रकार का अलर्ट इस साल शुरू किया गया है। जब किसी इलाके में महसूस होने वाला तापमान 38 डिग्री या असली तापमान 39 डिग्री तक पहुंचने की आशंका हो तो यह अलर्ट दिया जाता है।
मौसम एजेंसी ने साफ कहा कि बिना एयरकंडीशनिंग वाली बंद जगहें भी खतरनाक हो सकती हैं। उन्होंने सलाह दी कि लोग तुरंत ठंडी जगह पर चले जाएं, जैसे कूलिंग सेंटर या छायादार जगह, और आराम करते हुए खूब पानी पिएं।
लोगों की दिनचर्या पर असर
लोग गर्मी से बचने के लिए एयरकंडीशंड शॉपिंग मॉल और कैफे में जमा हो रहे थे। सियोल के 27 साल के ऑफिस वर्कर जू डोंग-येओल ने बताया कि बाहर कुछ भी करने लायक गर्मी नहीं है। उनके माता-पिता के साथ वे स्टारबक्स में शरण लिए हुए थे। उन्होंने कहा, “घर, मॉल या कैफे जैसी एयरकंडीशंड जगहों के अलावा और कुछ सूझ नहीं रहा।”
खेल और काम पर प्रभाव
चांगवोन शहर में तापमान 39.5 डिग्री तक पहुंचने के कारण प्रोफेशनल बेसबॉल लीग को एक मैच रद्द करना पड़ा। यह उस शहर में लगातार दूसरा मैच कैंसल था। कोरिया बेसबॉल ऑर्गेनाइजेशन ने कहा कि दर्शकों और खिलाड़ियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है।
हीटवेव कितनी आम हो गई
KMA के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में देश में औसतन हर साल हीटवेव वाले दिनों की संख्या दोगुनी से ज्यादा होकर 19 हो गई है। हीटवेव का दिन तब माना जाता है जब अधिकतम तापमान कम से कम 33 डिग्री सेल्सियस हो।किसान भी प्रभावित हैं। मिरयांग इलाके में स्ट्रॉबेरी तोड़ने वाले मजदूर छाता लगाकर काम कर रहे थे ताकि तेज धूप से बच सकें।
कारण क्या हैं
वैज्ञानिकों के अनुसार, मानव गतिविधियों से होने वाले जलवायु परिवर्तन की वजह से हीटवेव जैसी घटनाएं ज्यादा बार और ज्यादा तेज हो रही हैं। इस साल एल नीनो का वापस आना भी इस गर्मी को बढ़ा रहा है। एल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जो प्रशांत महासागर के पानी को गर्म करती है और हर दो से सात साल में होती है।

















