बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन मदरसों में चल रही गतिविधियों को लेकर बड़ी बात कही है। करीब दो दशक बाद कोलकाता पहुंची नसरीन ने मदरसों की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई मदरसे अब जिहादी तैयार करने की फैक्ट्री बन गए हैं।
मदरसों में क्या हो रहा है?
तसलीमा ने कहा कि इन संस्थानों में बच्चों के साथ उत्पीड़न और यौन शोषण जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी सभ्य समाज में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत नहीं है, जो बच्चों के मन में कट्टरता और दूसरे धर्मों के प्रति नफरत पैदा करे।
उन्होंने मांग की कि सभी मदरसों को सरकारी नियंत्रण में लाकर उन्हें धर्मनिरपेक्ष स्कूलों में बदल दिया जाना चाहिए।
सीमांत इलाकों का मुद्दा
तसलीमा ने बताया कि सीमांत क्षेत्रों के मदरसों पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। वहां ज्यादातर मामलों में प्रभावी सरकारी निगरानी नहीं होती। नतीजा यह होता है कि कम उम्र से ही बच्चे एक खास तरह की सोच के साथ बड़े होते हैं।
एक देश, एक कानून की वकालत
तसलीमा नसरीन ने भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में ‘एक देश, एक कानून’ लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि गैर-मुस्लिमों के प्रति नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। वोट बैंक की राजनीति में सरकारें कट्टरपंथियों से समझौता कर रही हैं, जिसका नुकसान पूरा समाज भुगत रहा है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर जोर
उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का समर्थन किया और धार्मिक कानूनों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। तसलीमा नसरीन ने कुल मिलाकर मदरसों की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि बच्चों को कट्टरता की बजाय आधुनिक, वैज्ञानिक और समानता वाली शिक्षा मिलनी चाहिए।

















