भुवनेश्वर: ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 12 जून को राज्य के भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया तथा विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सरकार की उपलब्धियों का व्यापक रिपोर्ट कार्ड जारी किया। इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी घोषणाएँ की गईं । आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा और मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का विस्तार, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को हर महीने 10 किलोग्राम चावल मुफ्त दिया जाएगा।
भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन के कान्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि उनकी सरकार ने पारदर्शी शासन, संस्थागत सुधार, बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आर्थिक विकास के माध्यम से “समृद्ध ओडिशा” की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य ने भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के तहत तीव्र प्रगति की है और विकास की गति को तेज करने में “डबल इंजन सरकार” मॉडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा
दिन की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक के तहत मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को अब केजी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बाधाएँ किसी भी योग्य छात्र को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित न करें। सरकार का मानना है कि यह योजना उच्च शिक्षा तक पहुँच को बढ़ाएगी और समाज के कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए नए अवसर सृजित करेगी। यह घोषणा राज्य में चल रहे व्यापक शिक्षा सुधारों के अनुरूप है, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन, पंचायत स्तर पर गोदाबरिश मिश्र मॉडल प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना और बड़े पैमाने पर शिक्षक भर्ती अभियान शामिल हैं।
मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का विस्तार: 3.28 करोड़ लाभार्थियों को 10 किलो मुफ्त चावल
ओडिशा में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के विस्तार की घोषणा की। इसके तहत अब लाभार्थियों को हर महीने कुल 10 किलोग्राम चावल मुफ्त दिया जाएगा।
संशोधित योजना के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (SFSS) के अंतर्गत आने वाले सभी लाभार्थियों को अतिरिक्त 5 किलोग्राम चावल मुफ्त मिलेगा। पहले से ही लाभार्थियों को 5 किलोग्राम चावल उपलब्ध कराया जा रहा था। राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता के बाद अब प्रत्येक पात्र व्यक्ति को प्रति माह कुल 10 किलोग्राम चावल प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बढ़ी हुई खाद्य सहायता योजना से लगभग 3.28 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे, जो राज्य की कुल आबादी के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को कवर करेगा। इस विस्तारित मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना को लागू करने के लिए राज्य सरकार को लगभग ₹8,813 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय वहन करना होगा। सरकार ने इसके लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किए हैं ताकि लाभार्थियों को बिना किसी बाधा के खाद्यान्न का वितरण जारी रह सके।
महिला सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में महिलाओं का सशक्तिकरण सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि पहली कैबिनेट बैठक में स्वीकृत सुभद्रा योजना के तहत पिछले दो वर्षों में ₹20,600 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। सरकार ने कन्या विवाह योजना भी शुरू की है, जिसके अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की लगभग 1,300 लड़कियों का सामूहिक विवाह गरिमापूर्ण तरीके से राज्य के सहयोग से संपन्न कराया गया है।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” विजन के अनुरूप कन्या सुमंगला योजना भी प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि चार लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ₹38,795 करोड़ के रियायती बैंक ऋण से जोड़ा गया है। इसके परिणामस्वरूप 23.5 लाख महिलाएँ “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुई हैं।
रिकॉर्ड धान खरीद और किसान कल्याण
किसानों को “अन्नदाता” बताते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025–26 के खरीफ मौसम में राज्य ने 18.83 लाख किसानों से रिकॉर्ड 77.41 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है। इसके अलावा, रबी मौसम में 4.85 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। सरकार ने कृषि विकास के लिए कृषिविज्ञान निधि योजना, मुख्यमंत्री कृषि उद्यम योजना, 100 मॉडल मंडियों की स्थापना जैसी योजनाएँ भी शुरू की हैं।
शिक्षा सुधार और भर्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने केवल सतही सुधारों पर ध्यान दिया, जबकि उनकी सरकार ने वास्तविक शैक्षणिक सुधारों पर जोर दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन और प्रत्येक पंचायत में गोदाबरिश मिश्र मॉडल प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना को ऐतिहासिक कदम बताया।
पहले चरण में प्रस्तावित 2,200 विद्यालयों में से 322 के लिए आधारशिला रखी जा चुकी है।
पिछले दो वर्षों में राज्य में 26,615 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मियों की भर्ती की गई है। अगले तीन वर्षों में 45,000 और शिक्षकों की भर्ती का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। आयुष्मान भारत–गोपालबन्धु जन आरोग्य योजना लागू होने के बाद लगभग 3.46 करोड़ लाभार्थियों को देशभर के 32,000 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। महाराजा जाजति केशरी मेडिकल कॉलेज, पवित्र मोहन प्रधान मेडिकल कॉलेज (तालचेर) और कंधमाल सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। नबरंगपुर में नए मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी गई है, जबकि जगतसिंहपुर, ढेंकानाल और भद्रक में नए मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित हैं। इसके अलावा तीन नए आयुर्वेदिक और दो होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना है। पिछले दो वर्षों में 5,197 डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की भर्ती की गई है।
रिकॉर्ड बुनियादी ढांचा निवेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि बुनियादी ढांचा विकास सरकार के रिपोर्ट कार्ड का प्रमुख हिस्सा है। राज्य बजट में पूंजीगत व्यय के लिए ₹72,100 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 6.5 प्रतिशत है और देश में सबसे अधिक है। पिछले दो वर्षों में लगभग ₹17,000 करोड़ की लागत से 9,000 किलोमीटर सड़कें, 57 पुल और 4 रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं। भुवनेश्वर में यातायात सुधार के लिए 36 सड़कों का मास्टर प्लान स्वीकृत किया गया है, जिसके तहत 8 परियोजनाओं के लिए ₹1,200 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। अटल एक्सप्रेसवे, नमो एक्सप्रेसवे, बहरामपुर–जयपुर एक्सप्रेसवे, भुवनेश्वर राइट एक्सेस रोड नेटवर्क और जयदेव विहार–नंदनकानन कॉरिडोर जैसी परियोजनाएँ तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
औद्योगिक विकास और रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिकीकरण राज्य की विकास रणनीति का केंद्र है। उत्कर्ष ओडिशा कॉन्क्लेव और विभिन्न निवेश रोडशो के बाद राज्य को ₹20 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। सिंगल विंडो प्रणाली के तहत ₹8.69 लाख करोड़ की लागत वाली 433 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनसे 5.25 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे।
114 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है और 34 परियोजनाएँ शुरू हो चुकी हैं।
पर्यटन को बढ़ावा
सरकार ने ओडिशा को प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए “थिंक इंडिया, थिंक ओडिशा” टैगलाइन अपनाई है। राज्यभर में 208 पर्यटन परियोजनाएँ ₹678.48 करोड़ की लागत से स्वीकृत की गई हैं। मुख्यमंत्री ने पुरी के शमुक प्रोजेक्ट को एक ऐतिहासिक पहल बताया, जिससे ओडिशा वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा। इसके अलावा, बेंगलुरु, गुवाहाटी और अहमदाबाद में ओडिशा पर्व का आयोजन कर राज्य की संस्कृति को बढ़ावा दिया गया है।
खेल अवसंरचना का विस्तार
सरकार ने खेल अवसंरचना के विकास के लिए ₹4,124 करोड़ के अभूतपूर्व निवेश की घोषणा की है। ओडिशा के सभी 314 ब्लॉकों में आधुनिक स्टेडियमों का निर्माण किया जाएगा, जिसका उद्देश्य खिलाड़ियों को “मैदान से पदक तक” (From Playground to Podium) पहुँचाना है। राज्य ने 2028 के वर्ल्ड इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप और एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी के अधिकार भी प्राप्त किए हैं, जो ओडिशा की खेल महत्वाकांक्षाओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
सामाजिक कल्याण और समावेशन
मधु बाबू पेंशन योजना के तहत वर्तमान में राज्य में 36.75 लाख लाभार्थियों को पेंशन प्रदान की जा रही है। 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों तथा गंभीर रूप से दिव्यांग व्यक्तियों को ₹3,500 प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास सहायता, आरक्षण में वृद्धि तथा शैक्षणिक प्रोत्साहन जैसी पहलों के माध्यम से समर्थन को और मजबूत किया है।
कौशल विकास और रोजगार
मुख्यमंत्री ने बताया कि ओडिशा का कौशल विकास मॉडल भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में देश की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त हुआ है। ₹500 करोड़ के निवेश के साथ पाँच आईटीआई को “उत्कर्ष आईटीआई” के रूप में उन्नत किया जाएगा। इसके अलावा 47 आईटीआई में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं और 13 संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब्स की स्थापना की जा रही है। संबलपुर और ब्रह्मपुर में वर्ल्ड स्किल सेंटर के दो नए परिसर स्थापित किए जाएंगे।
सुशासन, पारदर्शिता और भविष्य की दृष्टि
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जन शिकायतों के प्रत्यक्ष निवारण की व्यवस्था को पुनः शुरू किया है। पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ के माध्यम से 14,651 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत का समाधान किया जा चुका है। 15 रोजगार मेलों के माध्यम से 27 विभागों में 44,128 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी नीति को दोहराते हुए कहा कि उनके प्रशासन को भ्रष्टाचार ने प्रभावित नहीं किया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पिछली बीजेडी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि शासन अत्यधिक केंद्रीकृत था और व्यक्तिगत इच्छाओं के आधार पर संचालित होता था, न कि संस्थागत ढांचे के अनुसार। उन्होंने कहा कि कई प्रमुख परियोजनाओं में संस्थागत जवाबदेही की कमी थी, जिसे उनकी सरकार प्रणालीगत सुधारों के माध्यम से सुधार रही है। इस दिशा में ओडिशा में “स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इनिशिएटिव्स” की स्थापना की गई है, जो नीति निर्माण और शासन सुधारों के लिए दीर्घकालिक संस्थागत सहायता प्रदान करेगा।
अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा वर्ष 2036 तक एक समृद्ध राज्य बनने के लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग, मजबूत संस्थागत शासन तथा कल्याण-उन्मुख विकास के माध्यम से ओडिशा आने वाले वर्षों में व्यापक परिवर्तन हासिल करेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री प्रावती परिदा, राज्यसभा सांसद मनमोहन सामल, विजयपाल सिंह तोमर, मुख्य सचिव अनु गर्ग तथा सूचना व लोक संपर्क विभाग के सचिव हेमंत शर्मा उपस्थित थे।


















