‘भारत माता की जय’ से मिट जाते हैं सारे भेद! पुणे में भय्याजी जोशी ने कहा- संकुचित नहीं है हिन्दुत्व...
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‘भारत माता की जय’ से मिट जाते हैं सारे भेद! पुणे में भय्याजी जोशी ने कहा- संकुचित नहीं है हिन्दुत्व…

पुणे में रमेश पतंगे की पुस्तक 'समाज संघटनेचा वारसा आणि संघ' के विमोचन पर भय्याजी जोशी ने कहा कि हिन्दू और हिन्दुत्व की अवधारणा सार्वकालिक और वैश्विक है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 27, 2026, 10:11 pm IST
inभारत, सामाजिक समरसता, पुस्तकें, संघ @100, महाराष्ट्र
Bhaiyaji Joshi Hindutva Ramesh Patange Book Pune



पुणे, पश्चिम महाराष्ट्र। “हिन्दू और हिन्दुत्व की अवधारणा सार्वकालिक और वैश्विक है। उन्हें किसी संप्रदाय की संकुचित सीमा में बिठाना कतई उचित नहीं है। हम वास्तव में कौन हैं, जिस दिन इस ‘स्वत्व’ का बोध हिन्दुओं को हो गया, उस दिन समाज में व्याप्त सभी भेदभाव अपने आप समाप्त हो जाएंगे।”

यह प्रभावशाली विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने व्यक्त किए।

वे मंगलवार, 26 मई को पुणे के भारत इतिहास संशोधक मंडल के वि. का. राजवाडे सभागार में प्रख्यात विचारक एवं लेखक रमेश पतंगे द्वारा लिखित पुस्तक ‘समाज संघटनेचा वारसा आणि संघ’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस समारोह का आयोजन भारतीय विचार साधना प्रकाशन द्वारा किया गया था।

‘विदेशी आक्रमणों ने भुलाई हमारी व्यापक दृष्टि’

भय्याजी जोशी ने अपने संबोधन में इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि लगातार हुए विदेशी आक्रमणों के कारण हम अपनी व्यापक जीवन दृष्टि भूल गए और संकुचितता के भंवर में फंस गए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि, “इस भूली हुई नींव को फिर से मजबूत बनाकर समाज में एकात्मता निर्माण करने का भगीरथ कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है। हिन्दू कोई संप्रदाय नहीं, बल्कि एक जीवन दृष्टि है। इस पर आधारित जीवन मूल्य कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक सबके लिए एक जैसे हैं।”

‘भारत माता की जय’ से मिट जाते हैं सारे भेद

पुस्तक की सराहना करते हुए भय्याजी ने कहा कि रमेश पतंगे जैसे कर्मठ व्यक्ति ने संघ स्थापना की एक अलग और अध्ययनशील प्रस्तुति इस पुस्तक के जरिए की है। यह भविष्य के लिए एक बेहतरीन संदर्भ ग्रंथ साबित होगा।

  • विभाजन का कारण: ‘हम किसी एक विशिष्ट जाति के हैं’, इसी संकुचित भावना के कारण समाज विभाजित हुआ।
  • संतों का योगदान: समाज रूपी इमारत का क्षरण रोकने का कार्य समय-समय पर हमारे संतों ने किया।
  • डॉ. हेडगेवार का विजन: संतों की उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए डॉ. हेडगेवार ने संघ के माध्यम से ‘हम सब एक हैं’ की भावना समाज में स्थापित की।
  • उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘भारत माता की जय’ की एक घोषणा से ही सभी प्रांतीय व जातीय भेदभाव समाप्त हो जाते हैं। संघ कोई अलग संगठन नहीं, बल्कि समाज का ही अभिन्न अंग है।

बुद्ध से लेकर डॉ. हेडगेवार तक की वैचारिक यात्रा

पुस्तक के लेखक रमेश पतंगे जी ने अपनी रचना की पृष्ठभूमि साझा करते हुए कहा कि यह पुस्तक उनकी पिछली पुस्तक ‘आम्ही संघात का आहोत?’ का ही अगला हिस्सा है। सामाजिक समरसता मंच पर काम करते हुए उन्हें संघ कार्य की गहराई का अहसास हुआ।

पतंगे जी ने एक बेहद अहम तुलना करते हुए कहा, “भगवान बुद्ध ने जिस तरह ज्ञान प्राप्त कर सारनाथ में धम्मचक्र प्रवर्तन किया और गिने-चुने लोगों के साथ ‘संघ’ शुरू किया, वही समानता डॉ. हेडगेवार की संघ स्थापना में भी दिखती है।”

उन्होंने बताया कि बुद्ध के बाद जो खालीपन आया उसे गोरखनाथ और वारकरी-धारकरी संप्रदाय ने दूर किया। यही वैचारिक यात्रा गुरु नानकदेव, स्वामी दयानंद, वीर सावरकर, डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर से होते हुए डॉ. हेडगेवार तक पहुंची। जनसाधारण को इसी संपूर्ण वैचारिक परंपरा का दर्शन कराने के लिए उन्होंने इस पुस्तक का लेखन किया है।

वारकरी और धारकरी परंपरा से टिका है हमारा समाज

मंच पर उपस्थित भारत इतिहास संशोधक मंडल के अध्यक्ष प्रदीप (दादा) रावत ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के संघ विचार के पीछे दो मुख्य स्रोत हैं— प्राचीन विचार और प्रबोधन युग के विचार।

दादा रावत ने कहा, “हमारी यह परंपरा वारकरी और धारकरी परंपरा के कारण ही टिकी हुई है। इसी के बल पर हम 1000 वर्षों तक प्रदीर्घ संघर्ष कर पाए। दूरदर्शी महापुरुषों के कारण ही हिन्दू समाज और हिन्दुत्व आज तक टिका हुआ है।”

कार्यक्रम के मंच पर भारतीय विचार साधना के अध्यक्ष डॉ. गिरीश आफळे और कार्यवाह काशीनाथ देवधर भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शहर के कई प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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