बाड़बंदी से बौखलाया बांग्लादेश
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बाड़बंदी से बौखलाया बांग्लादेश

पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने अपनी पहली ही बैठक में भारत—बांग्लादेश की सीमा पर बाड़बंदी (कंटीले तार) करने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि देने का निर्णय लिया। यह कदम बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत आने से रोकने के लिए जरूरी था, लेकिन बांग्लादेश ने बाड़बंदी का विरोध किया है। यही कारण था कि ममता सरकार ने बाड़बंदी के इस काम को अपने समय में नहीं होने दिया और घुसपैठिए भारत में बसते रहे

Written byविप्लव विकासविप्लव विकास
May 21, 2026, 12:37 pm IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

गत 4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आते ही यह स्पष्ट हो गया था कि राज्य केवल सत्ता परिवर्तन की ओर नहीं बढ़ रहा, बल्कि शासन की पूरी कार्यशैली बदलने वाली है। परिणाम घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने नबान्नो (राज्य सचिवालय) और अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए कठोर आदेश जारी करते हुए महत्वपूर्ण फाइलों को बाहर ले जाने तथा उनकी प्रतिलिपि तैयार करने पर तत्काल रोक लगा दी। सचिवालय में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और प्रशासनिक दस्तावेजों की निगरानी आरंभ हुई। राजनीतिक गलियारों में उसी समय यह चर्चा प्रारंभ हो गई थी कि नई व्यवस्था केवल औपचारिक शासन परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में व्यापक पुनर्गठन का मार्ग खोलेगी।

विकास योजनाओं को मिली गति

10 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुई पहली मंत्रिपरिषद बैठक ने इस संकेत को निर्णायक रूप दे दिया। पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनी जिसे केंद्र में सत्तारूढ़ दल का भी प्रत्यक्ष सहयोग प्राप्त है। ‘डबल इंजन सरकार’ की अवधारणा अब राजनीतिक नारे से आगे बढ़कर प्रशासनिक वास्तविकता के रूप में दिखाई देने लगी है। नई सरकार ने अपने शुरुआती निर्णयों में स्पष्ट किया कि वह केंद्र और राज्य के बीच वर्षों से चले आ रहे टकराव की राजनीति को समाप्त कर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को गति देना चाहती है।

शुभेंदु सरकार ने केंद्र की योजनाओं को राज्य में लागू करने की दिशा में भी तेजी दिखाई। आयुष्मान भारत योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने की प्रक्रिया आरंभ की गई। लंबे समय से पश्चिम बंगाल में इस योजना के लागू न होने को लेकर राजनीतिक विवाद चलता रहा था। सरकार का दावा है कि इससे लाखों परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख की स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

घुसपैठियों पर नकेल

राज्य सरकार ने अपनी पहली मंत्रिपरिषद बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 45 दिन के भीतर 600 एकड़ से अधिक भूमि हस्तांतरित करने की स्वीकृति दी। इसके बाद बांग्लादेश ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि वे ‘कांटेदार तारों से नहीं डरते’ और भारत से सीमा प्रबंधन में ‘मानवीय दृष्टिकोण’ अपनाने का आग्रह किया है। बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को देखते हुए सीमा पर तारबंदी का निर्णय लिया गया है। बांग्लादेश को डर इस बात का है कि तारबंदी के बाद उसके नागरिक अवैध रूप से भारत में प्रवेश नहीं कर सकेंगे और जो बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत में हैं, उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसका एक बड़ा हिस्सा अभी भी खुला है। यहीं से घुसपैठिए भारत आते हैं। इसलिए भारत चहता है कि इस सीमा पर तेजी से तारबंदी हो।

प्रशासनिक फेरबदल

पहली मंत्रिपरिषद बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ववर्ती शासनकाल में विभिन्न बोर्डों, निगमों और गैर-संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्त मनोनीत पदाधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने का था। पश्चिम बंगाल प्रशासन का बड़ा भाग राजनीतिक प्रभाव में कार्य कर रहा था और निर्णय प्रक्रिया में निष्पक्षता प्रभावित हो रही थी। इसके साथ ही बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल प्रारंभ हुआ। कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया तथा कुछ अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई। सरकार ने संकेत दिया कि अब प्रशासनिक व्यवस्था राजनीतिक निकटता नहीं, बल्कि कार्यकुशलता और उत्तरदायित्व के आधार पर चलेगी।

बसों में नि:शुल्क यात्रा

नई सरकार ने प्रशासनिक कठोरता के साथ सामाजिक योजनाओं पर भी तेजी दिखाई है। 1 जून, 2026 से राज्य की महिलाओं के लिए सरकारी बसों में नि:शुल्क यात्रा की घोषणा की गई। सरकार का कहना है कि इससे कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाली महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसी प्रकार ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 3,000 रुपए की सहायता देने का निर्णय लिया गया है। सरकार इसे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए राहतकारी कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया। राज्य में पहले से दिए जा रहे 1,000 रुपए मासिक वृद्धा भत्ते को बढ़ाकर 2,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया। बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त सहायता देना आवश्यक था। इन निर्णयों ने ग्रामीण क्षेत्रों और निम्न आय वर्ग में सरकार के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाया है। यह सरकार प्रशासनिक सख्ती और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।

कानून-व्यवस्था के लिए नए कदम

अवैध वसूली और ‘तोलाबाजी’ के विरुद्ध भी सरकार ने आक्रामक अभियान चलाया है। विभिन्न राजमार्गों और व्यापारिक मार्गों पर कथित अवैध टोल वसूली को समाप्त करने के लिए विशेष कार्रवाई की गई। व्यापारिक संगठनों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की शिकायत थी कि कई स्थानों पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त समूह जबरन धन वसूलते थे। सरकार ने पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसी गतिविधियों को तत्काल रोका जाए। निर्माण कार्यों और बाजार क्षेत्रों में भी कई स्थानों पर छापे और गिरफ्तारियां हुईं।

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी सरकार ने शुरुआती दिनों में तीव्र सक्रियता दिखाई। चंद्रनाथ रथ हत्याकांड (सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक) में पुलिस और जांच एजेंसियों (एसआईटी और सीबीआई) ने उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन मुख्य पेशेवर शार्प शूटरों को गिरफ्तार किया है। इसी के साथ एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाला, पौर निगम भर्ती अनियमितताओं और अन्य मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने का निर्णय लिया गया है। वर्षों से भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर असंतोष झेल रहे युवाओं के बीच इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) ने सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में 2016 की शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी नियुक्ति परीक्षा (एसएलएसटी) की लगभग 22 लाख ओएमआर (ओएमआर) शीट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी हैं। यह कदम केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा बरामद की गई हार्ड डिस्क से प्राप्त ओएमआर डेटा के आधार पर उठाया गया है। राज्य में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने के उद्देश्य से इन उत्तर पुस्तिकाओं को लाइव किया गया है।

भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्रवाई

पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी और गर्ग चट्टोपाध्याय के विरुद्ध कार्रवाई ने यह संदेश और स्पष्ट किया कि नई सरकार प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों के विरुद्ध भी जांच आगे बढ़ाने को तैयार है। 13 मई को तिलजला में चला बुलडोजर अभियान भी सरकार की इसी कार्यशैली का प्रतीक बना। प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई अवैध निर्माण और अपराध से जुड़े ढांचों के विरुद्ध थी। भारी पुलिस बल की उपस्थिति में कई अवैध संरचनाएं हटाई गईं और सरकार ने इसे कानून व्यवस्था तथा नगर प्रशासन को व्यवस्थित करने की दिशा में आवश्यक कदम बताया। पश्चिम बंगाल की नई सरकार के शुरुआती दिनों की सबसे बड़ी विशेषता उसकी गति, स्पष्ट नीति और निर्णयों का त्वरित क्रियान्वयन रही है। यही कारण है कि राज्य के एक बड़े वर्ग में यह धारणा तेजी से बन रही है कि पश्चिम बंगाल अब केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन प्रणाली के व्यापक पुनर्गठन के दौर में प्रवेश कर चुका है।

पश्चिम बंगाल : सीमाओं से हटा ‘ममता’ का साया

Topics: सीमा सुरक्षासत्ता परिवर्तनपारदर्शिताबाड़बंदीशुभेंदु अधिकारीभूमि हस्तांतरणममता सरकारअन्नपूर्णा भंडार योजनासीमा सुरक्षा बलनि:शुल्क बस यात्राडबल इंजन सरकारवृद्धा भत्ताआयुष्मान भारत योजनाभारत-बांग्लादेशपाञ्चजन्य विशेषबांग्लादेशी घुसपैठ
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विप्लव विकास
विप्लव विकास लेखक और स्तंभकार हैं। समकालीन सामाजिक, राजनीतिक और भारतीय विमर्श के मुद्दों पर स्पष्ट व तर्कसंगत लेखन के लिए जाने जाते हैं। अपने लेखों के माध्यम से जटिल विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत कर पाठकों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देते हैं। [Read more]
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