पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी का राजनीतिक कद और जनता के बीच उनकी पैठ समाप्त हो चुकी है। ममता बनर्जी 2021 और 2026 में विधानसभा का चुनाव हार गई थी। वो देश की पहली मुख्यमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए एक ही व्यक्ति से लगातार दो बार अलग-अलग सीटों से चुनाव हारी हैं। मगर ममता बनर्जी की अलोकप्रियता का आभास इससे होता है कि मुख्यमंत्री रहते हुए वो अपने बूथ से ही हार गई है। यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक तमाचा है। यह स्पष्ट तोर पर बताता है कि अब उनका राजनीतिक जीवन समाप्त हो चुका है।
ममता बनर्जी के अपने मतदान केंद्र भवानीपुर स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन के आसपास के चार बूथों पर भाजपा को बढ़त मिली थी। सिर्फ ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि उनके सबसे विश्वस्त राज्य के पूर्व मंत्री फिरहाद हकीम की भी लोकप्रियता अपने निचले पायदान पर पहुंच चुकी है। फिरहाद हकीम के मतदान केंद्र कोलकाता के चेतला गर्ल्स स्कूल के पांच मतदान केंद्रों पर भी भाजपा को ही बढ़त मिला है।
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ऐसे ही खत्म हो गया था लालू यादव का राजनीतिक जीवन
बिहार के लालू यादव का भी राजनीतिक जीवन कुछ इन्हीं परिस्थितियों में समाप्त हुआ था। 1999 और 2009 के लोकसभा के चुनावों में लालू यादव क्रमशः शरद यादव और रंजन यादव से चुनाव हार गए थे। लालू यादव की पत्नी और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी 2010 के विधानसभा के चुनाव में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए दो सीटों राघोपुर और सोनपुर विधानसभा सीटों से चुनाव हार गई थी। 2014 में राबड़ी देवी सारण लोकसभा की सीट से राजीव प्रताप रूडी से चुनाव हार गई थी। इन हारों के बाद लालू यादव और राबड़ी देवी ने चुनाव लड़ना बंद कर दिया।

















