पश्चिम बंगाल की ही तरह पड़ोसी राज्य असम में भी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में हार मिली थी। इसके नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर मची अंदरूनी कलह और असंतोष अब पूरी तरह खुलकर सामने आ रहा है।
दोनों प्रदेशों में हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद पार्टी में इस्तीफों का सिलसिला जारी है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को असम तृणमूल कांग्रेस के एक बेहद प्रमुख चेहरे, पार्टी के प्रदेश सचिव और गुवाहाटी सेंट्रल से उम्मीदवार रहे अभिजीत मजूमदारजय प्रकाश गुप्ता ने टीएमसी को अलविदा कह दिया। उन्होंने सीधे पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा भेजा।
अभिजीत मजूमदार ने टीएमसी से नाता तोड़ा
दरअसल, असम विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम आने के बाद से ही टीएमसी में भारी असंतोष देखा जा रहा था। शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिजीत मजूमदार ने औपचारिक रूप से तृणमूल कांग्रेस से अपनी प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। मजूमदार कोई आम कार्यकर्ता नहीं थे बल्कि वह पार्टी की स्थापना के समय से ही असम में टीएमसी को मजबूत करने में जुटे थे। उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ लंबे समय तक टीएमसी के मीडिया सेल के प्रमुख के रूप में भी काम किया था। इस बार के चुनावों में पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए गुवाहाटी सेंट्रल सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था।
टीएमसी की विचारधारा पर उठाए गंभीर सवाल
टीएमसी को छोड़ने के साथ ही अविजीत मजूमदार ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और उसकी नीतियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब टीएमसी के भीतर वैचारिक रूप से बने रहना किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए असंभव हो गया है जो सनातन या हिंदू हो। मजूमदार ने कहा, तृणमूल कांग्रेस की छवि अब असम के भीतर पूरी तरह से केवल और केवल एक विशेष समुदाय (मुस्लिमों) की पार्टी के रूप में सिमट कर रह गई है। यह स्थिति सिर्फ असम तक सीमित नहीं है बल्कि पश्चिम बंगाल में भी पार्टी का पूरा ध्यान और कामकाज केवल मुस्लिम समुदाय के तुष्टीकरण के इर्द-गिर्द घूमता है। ऐसी स्थिति में मैं अपनी अंतरात्मा और विचारधारा से समझौता करके इस दल में आगे काम नहीं कर सकता।’
‘तृणमूल कांग्रेस’ बन चुकी है ‘तृणमूल मुस्लिम कांग्रेस’
अविजीत मजूमदार ने कहा कि पार्टी के मूल सिद्धांतों में अब भारी गिरावट आ चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए टीएमसी (TMC) का वास्तविक नाम बदलकर ‘तृणमूल मुस्लिम कांग्रेस’ हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में पार्टी का झुकाव अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और मुस्लिम आबादी की तरफ बहुत ज्यादा है। पार्टी के मंचों पर हिंदुओं के हितों या उनकी समस्याओं पर कभी कोई चर्चा नहीं की जाती है। वह खुद एक हिंदू हैं और अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़े हैं, इसलिए इस माहौल में उनका दम घुट रहा था और पार्टी में बने रहना उनके स्वाभिमान के खिलाफ था।
असम में टीएमसी के वजूद पर खड़े किए सवाल
असम में तृणमूल कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे और उसके भविष्य को लेकर मजूमदार ने बात की। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि असम में अब टीएमसी को पूछने वाला कोई नहीं बचा है। अविजीत मजूमदार ने आगे कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा असम में टीएमसी को स्थापित करने और उसे एक पहचान दिलाने में झोंक दिया था, लेकिन आज उन्हें महसूस हो रहा है कि उनका वह फैसला पूरी तरह से गलत था।राज्य की जनता ने पार्टी की नीतियों को पूरी तरह से नकार दिया है।
बता दें कि, अविजीत मजूमदार असम विधानसभा चुनाव 2026 में गुवाहाटी सेंट्रल से टीएमसी के सिंबल पर चुनाव मैदान में उतरे थे। मजूमदार को सिर्फ 1061 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर खिसक गए और उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार विजय कुमार गुप्ता ने शानदार जीत दर्ज की थी।

















