केरलम के नवनियुक्त सीएम वी.डी. सतीशन ने रविवार को गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर में वीआईपी (VIP) दर्शन किए थे। उनकी इस यात्रा को लेकर एक विवाद हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री पर मंदिर के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। बीजेपी का दावा है कि इस वीआईपी दर्शन की वजह से न केवल केरल उच्च न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं बल्कि आम श्रद्धालुओं को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
सीएम सतीशन ने रविवार सुबह केरल के मशहूर मंदिर गुरुवायूर में पूजा-अर्चना की और वहां की पारंपरिक ‘तुलाभारम’ रस्म (जिसमें व्यक्ति को उसके वजन के बराबर सामग्री से तौला जाता है) भी पूरी की। उनके इस दर्शन की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की गई थीं, जिन्हें देखने के बाद उन पर हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए नियमों के उल्लंघन का अरोप लगा।
बीजेपी नेता के गंभीर आरोप
भाजपा के वरिष्ठ नेता बी. गोपालकृष्णन ने इस मामले को लेकर गुरुवायूर देवस्वोम अधिकारियों के सामने एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार की सुबह का समय जो कि प्रतिबंधित घंटों के अंतर्गत आता है, मुख्यमंत्री और उनके साथ आए नेताओं को विशेष वीआईपी दर्शन की सुविधाएं दी गईं।
24 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट में बीजेपी नेता ने दावा किया कि केरल उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश जारी कर रखे हैं कि रविवार को सुबह 6 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे के बीच कोई वीआईपी दर्शन नहीं कराया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने मेलपत्तूर ऑडिटोरियम सहित मंदिर परिसर के आसपास वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है।
गोपालकृष्णन का आरोप है कि मुख्यमंत्री और उनके काफिले को सुबह 7:30 बजे से 9:30 बजे के बीच बिना ‘श्रीकोविल नेयविलेक्कू’ की 4,500 रुपये की रसीद कटाए वीआईपी दर्शन की अनुमति दी गई। मंदिर के नियमों के अनुसार, छुट्टियों के दिनों में विशेष दर्शन के लिए यह रसीद लेना अनिवार्य होता है, जिसके बाद ही किसी को गर्भगृह के पास जाने की अनुमति मिलती है।
मंदिर की सुरक्षा को खतरे में डाला
बीजेपी नेता ने केवल मुख्यमंत्री पर ही नहीं बल्कि उनके साथ आए कांग्रेस सांसद हिबी ईडन सहित कई अन्य वीआईपी लोगों पर भी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। शिकायत में कहा गया है कि वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं के विरोध के बावजूद इन नेताओं ने मंदिर परिसर के पास वीडियो रिकॉर्ड किए। गोपालकृष्णन ने अपनी शिकायत में कहा, ‘जिन लोगों पर कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, उन्होंने ही खुद कानून को तोड़ा है।’
उन्होंने यह भी कहा कि यदि देवस्वोम बोर्ड इस मामले में दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में विफल रहता है तो वे इस मामले को लेकर कोर्ट तक जाएंगे।
मंदिर के बोर्ड और चेयरमैन ने क्या कहा?
दूसरी तरफ मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले गुरुवायूर देवस्वोम बोर्ड ने का कहना है कि मुख्यमंत्री के दर्शन पूरी तरह से नियमों के दायरे में रहकर कराए गए थे। हालांकि, देवस्वोम बोर्ड ने अपनी इस पोस्ट में चल रहे राजनीतिक विवाद का कोई सीधा जिक्र नहीं किया।
इस बीच गुरुवायूर देवस्वोम के चेयरमैन ए.वी. गोपीनाथ ने भी इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्वीकार किया कि उच्च न्यायालय का आदेश छुट्टियों के दिन वीआईपी दर्शन को प्रतिबंधित करता है लेकिन प्रथमदृष्टया (प्राइमा फेसी) मुख्यमंत्री और उनकी टीम से किसी भी नियम का उल्लंघन होता नहीं दिख रहा है।
हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं कि मुख्यमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे के कारण कई आम भक्तों को भगवान के दर्शन करने में कठिनाई हुई और वे समय पर प्रार्थना नहीं कर सके। चेयरमैन ने आश्वासन दिया है कि भक्तों की इस शिकायत की पूरी जांच की जाएगी।

















