गत 10 मई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर नई दिल्ली के विजय एन्कलेव में प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित हुई। इसका शुभारंभ ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ हुआ। मुख्य वक्ता थे विभाग प्रचारक श्री पंकज। उन्होंने संघ की 100 वर्ष की यात्रा, पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण में प्रमुख जन के योगदान एवं दायित्व विषयों पर प्रभावी एवं प्रेरक विचार प्रस्तुत किए।
गोष्ठी के अंत में अनेक श्रोताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हिंदुत्व के बढ़ते प्रभाव, कन्वर्जन, लव जिहाद, गो-हत्या, बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। इस पर वक्ता ने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा जैसे राज्यों में चर्च के लोग लोभ-लालच से हिंदुओं का कन्वर्जन करा रहे हैं। नागालैंड, मिजोरम, मेघालय जैसे अनेक राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं। यह भारत और भारतीयता के लिए ठीक नहीं है।
इतिहास साक्षी है कि देश के जिस भी हिस्से में हिंदू कम हुए हैं, वहां देश-विरोधी तत्व सिर उठाते हैं। 1947 से पहले देश में ऐसी ही स्थिति थी। इसलिए हम हिंदुओं का दायित्व है कि देश के किसी भी हिस्से में जनसांख्यिकी असंतुलन न होने दें और जहां यह असंतुलन पैदा हो गया है, वहां सतर्क और सजग रहें। गोष्ठी में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और अनेक प्रभावशाली व्यक्तित्व उपस्थित थे।
















