इस समय असम के अनेक जिले विनाशकारी बाढ़ की चपेट में हैं। शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिले में सर्वाधिक जान-माल का नुकसान हुआ है। मरने वालों की संख्या 70 से अधिक पहुंच गई है। बाढ़ से 5.24 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। कहा जा रहा है कि लगभग पांच दशक के बाद असम में ऐसी भारी बारिश हुई कि जहां कभी बाढ़ नहीं आती थी, वहां भी बाढ़ आई।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि जैसे-जैसे बाढ़ का पानी कम हो रहा है, सरकार ने अपना ध्यान बिजली बहाली और पुनर्वास पर केंद्रित कर दिया है। चार जिलों में 354 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चल रहे हैं, जहां विस्थापित हुए 37,724 लोगों को आश्रय और मदद दी जा रही है। सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ), फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज और असम पुलिस द्वारा बचाव और राहत कार्य किए जा रहे हैं।
इनके साथ ही सेवा भारती के कार्यकर्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं। सेवा भारती के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री सुरेंद्र कुमार ने बताया कि 18 जुलाई को भारी बारिश हुई। इसके बाद कई जिलों में बाढ़ आ गई और करीब 1,000 गांव प्रभावित हुए। कई घंटे तक पानी का बहाव इतना तेज रहा कि सेना और एनडीआरएफ के जवान ही बचाव कार्य में जा सके। पानी का बहाव कम होेने के बाद सेवा भारती के कार्यकर्ता और संघ के स्वयंसेवक बचाव कार्य में जुटे।
राहत कार्य चलाने के लिए जोरहाट, शिवसागर और मोरान में तीन केंद्र शुरू किए गए हैं। लोगों की मदद से राहत सामग्री जमा कर इन केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। यहीं से कार्यकर्ता राहत सामग्री लेकर गांवों में जा रहे हैं। इस समाचार के लिखे जाने तक इन कार्यकर्ताओं ने लगभग 350 टन ब्लीचिंग पाउडर, 2000 मच्छरदानी, मोमबत्ती, राशन किट, पानी की बोतलें आदि का वितरण किया है। कई जगह चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। राहत कार्य में लगभग 200 कार्यकर्ता दिन-रात लगे हैं।
श्री सुरेंद्र कुमार ने यह भी बताया कि सबसे बड़ी दिक्कत पीने के पानी की है। अब तक कार्यकर्ताओं ने प्लास्टिक की करीब 5 लाख पानी की बोतलें बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाई हैं। इस कारण पर्यावरण संकट भी पैदा हो रहा है। इसको देखते हुए सेवा भारती ने पानी शुद्ध करने का एक संयंत्र लगाने का निर्णय लिया है और उसका पानी 20-20 लीटर के जार में पीड़ितों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि बाढ़ के बीच एक अच्छी बात यह है कि लोग बढ़-चढ़ कर राहत सामग्री दे रहे हैं। इस कारण पीड़ितों की मदद करने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है।

















