जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) प्रशासन ने 10 अगस्त को आयोजित होने वाली एक सार्वजनिक चर्चा के लिए बुक किए गए एसएसएस-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग को अचानक रद्द कर दिया। यह चर्चा यहां के पूर्व छात्र उमर खालिद की किताब फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज पर आधारित थी। इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय की छात्र यूनियन (JNUSU) द्वारा ट्राइबल डे के अवसर पर दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक किया जाना था। उमर खालिद पर देशद्रो का आरोप है। आरोप इतने गंभीर हैं कि उसे कोर्ट से जमानत तक नहीं दी जा रही है। दिल्ली दंगे में भी वह आरोपी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या वजह बताई?
यह बुकिंग क्यों रद्द की गई, इसका जवाब जेएनयू प्रशासन ने एक आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। इसके अनुसार, ऑडिटोरियम की बुकिंग इसलिए रद्द की गई क्योंकि वेन्यू रिक्वेस्ट फॉर्म में प्रस्तावित कार्यक्रम से जुड़ी पूरी और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। यूनिवर्सिटी ने कहा कि कैंपस के ऑडिटोरियम और अन्य जगहों के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इसलिए यह कदम उठाया गया। बुकिंग रद्द करने का पत्र संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया गया, जिसे स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) के डीन की मंजूरी मिली थी।
कौन-कौन से वक्ता आने वाले थे?
10 अगस्त को आयोजित होने वाले इस संवाद में प्रोफेसर प्रभु महापात्रा, प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, हर्ष मंदर और बानो ज्योत्स्ना लाहिरी को बुलाया गया था। इस ऑडिटोरियम को सेंटर फॉर इंटरनेशनल लीगल स्टडीज के डॉ. अविनाश कुमार ने बुक किया था।
उमर खालिद की किताब किस विषय पर है?
उमर खालिद की यह किताब इसी साल जून 2026 में संस्थान जग्गनॉट द्वारा प्रकाशित की गई है। किताब उमर खालिद के उस शोध पर आधारित है जिसे उसने जुलाई 2018 में जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में जमा किया था।
सोशल मीडिया पर JNU का बयान
यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। JNU ने कहा कि वह एक ‘लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान’ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम की अनुमति एसएसएस के डीन द्वारा ही दी गई थी और तथ्यों को छिपाने की बात सामने आने पर उन्होंने ही नियमानुसार इसे रद्द करने की कार्रवाई की है। यूनिवर्सिटी ने सभी संबंधित पक्षों से ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द होने के आदेश को संज्ञान में लेने का आग्रह किया है।
ISKCON के कार्यक्रम पर भी हुआ था विवाद
कुछ ही दिन पहले विश्वविद्यालय परिसर में एक और विवाद देखने को मिला था जब इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) के एक प्रतिनिधि से जुड़े कार्यक्रम को छात्रों के भारी विरोध के बाद रद्द करना पड़ा था।
















