रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर मराट खुस्नुल्लिन ने हाल ही में रूसी न्यूज एजेंसी टास से बातचीत में बताया कि रूस भारतीय महासागर तक रेलवे लिंक बनाने की संभावना तलाश रहा है। इसमें भारत तक पहुंच भी एक विकल्प के रूप में शामिल है। उनका कहना है कि बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिम कम करने के लिए यह सोचा जा रहा है।
खुस्नुल्लिन ने क्या कहा
खुस्नुल्लिन ने साफ कहा कि कोई भी ऐसा विकल्प ठीक है जो भारत तक पहुंच दे। उन्होंने संभावित रास्तों का जिक्र किया जिसमें तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान शामिल हो सकते हैं। रेल लिंक से माल ढुलाई के लिए समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम हो सकती है।
उन्होंने रूस के निर्माण क्षेत्र की बात भी की। उनके मुताबिक यह सेक्टर हर साल एक ट्रिलियन रूबल अतिरिक्त काम संभाल सकता है। अगर अगले पांच साल तक इतना फाइनेंसिंग मिल जाए तो क्षमता और बढ़ाई जा सकती है।
होर्मुज और बोस्फोरस का मुद्दा
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। टास की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत और एलएनजी शिपमेंट का करीब 20 प्रतिशत यहीं से गुजरता है। अमेरिकी-ईरानी तनाव की वजह से यहां शिपिंग को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
बोस्फोरस जलडमरूमध्य काला सागर को मारमारा सागर से जोड़ता है। यह तुर्की के नियंत्रण में है। तुर्की ने कहा है कि यह जलमार्ग खुला है।
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हालिया भारत-रूस बैठक
7 अगस्त को नई दिल्ली में भारत-रूस मॉडर्नाइजेशन और इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन वर्किंग ग्रुप की 12वीं बैठक हुई। इसमें रेलवे ट्रांसपोर्ट, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, वंदे भारत ट्रेन प्रोजेक्ट और सिग्नलिंग इक्विपमेंट पर सहयोग की बात हुई। दोनों तरफ ने इन नए क्षेत्रों में काम को सकारात्मक बताया। बैठक में माइनिंग, फर्टिलाइजर, यूएवी, 3डी प्रिंटिंग और रूस के एसजे-100 विमान जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
रूस का मौजूदा रेल नेटवर्क
रूस की फेडरल पैसेंजर कंपनी (एफपीसी) 40 अंतरराष्ट्रीय लंबी दूरी के रूट चलाती है। ये 19 देशों से जुड़ते हैं। इनमें जर्मनी, फ्रांस, इटली, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक, लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया, फिनलैंड, चीन, मंगोलिया, उत्तर कोरिया, अजरबैजान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उजबेकिस्तान, बेलारूस और मोल्दोवा शामिल हैं।
यह पूरा मामला अभी खोजबीन और संभावनाओं के स्तर पर है। खुस्नुल्लिन ने इसे एक विकल्प के रूप में रखा है जो समुद्री रास्तों के जोखिम से बचने में मदद कर सकता है। भारत-रूस के बीच रेलवे सहयोग पहले से चर्चा में है, खासकर हाल की बैठक के बाद।

















