कांग्रेस में कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री पद के लिए निर्णय टलता जा रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद हुए ग्यारह प्रदेशों के विधानसभा के चुनावों में पहली बार कांग्रेस पार्टी को अपने सहयोगियों के साथ केरल में सफलता मिली है। मगर इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी राज्य में मुख्यमंत्री का चयन नहीं कर पा रही है। यह कांग्रेस पार्टी में आपसी कलह और अनिर्णय को दर्शाता है। केरल एक साथ सम्पन्न हुए सभी प्रदेशों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मुख्यमंत्री शपथ ले चुके हैं, मगर केरल में अभी तक मामला उलझा हुआ है। केरल में लगातार दो बार विपक्ष में रहने के बाद कांग्रेस पार्टी गठबंधन को जीत मिली है।
केरल में कांग्रेस पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के तीन प्रमुख दावेदारों में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और विगत विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन का नाम है। खबरों के मुताबिक, के.सी. वेणुगोपाल को राहुल गांधी का समर्थन प्राप्त है। वहीं कांग्रेस पार्टी के सहयोगी और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के दूसरी सबसे बड़ी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने वी.डी. सतीशन का नाम प्रस्तावित किया है। कल बुधवार को नई दिल्ली में संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर हुई उच्च स्तरीय बैठक बिना किसी नाम के घोषणा के ही बैठक ख़त्म हो गई। यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर काफी अंतर्द्वंद है।
कांग्रेस के अंदर ही चल रहा सिर फुटौवल
कांग्रेस पार्टी के इस अंतर्द्वंद पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस की योजना ‘राज्य को पांच साल में पांच मुख्यमंत्री देने की है। उन्होंने एएनआई से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वी डी. सतीशन का नाम आगे बढ़ा रही हैं, जबकि राहुल गांधी के. सी. वेणुगोपाल का नाम ले रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री पद के चयन में हो रही देरी से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव हैं और वायनाड जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय के पास राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ पोस्टर लगाए गए हैं।
विदित हो कि वायनाड से 2019 और 2024 में राहुल गांधी और 2024 के उपचुनाव में प्रियंका गांधी वाड्रा सांसद चुनी गई है। वहां लगाए गए पोस्टरों में पार्टी के नेताओं का गुस्सा सामने आ रहा है और एक पोस्टर के मार्फ़त राहुल और प्रियंका वाड्रा को वायनाड से दोबारा चुनाव नहीं लड़ने की हिदायत तक दी गई है।
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कांग्रेस पर है मुस्लिम लीग का दबाव
मगर असल में कांग्रेस पार्टी पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का दवाब है। आईयूएमएल ना सिर्फ मुख्यमंत्री पद के चयन में अपनी भूमिका चाहती है, बल्कि अपने लिए महत्वपूर्ण मंत्रालयों का भी आवंटन चाहती है। वायनाड लोकसभा सीट के अंतर्गत आनेवाली कुल सीट में से दो सीट थिरुवम्बाडी और एरंड विधानभा सीटों पर आईयूएमएल ने जीत दर्ज़ किया है। अतएव वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी को भय है कि अगर आईयूएमएल की मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की मांग को पूरा नहीं किया गया तो 2029 में उनका जीतना मुश्किल हो जाएगा।
इस बार लगातार दो बार के एलडीएफ के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर के कारण केरल में यूडीएफ अवश्य जीत गई है। मगर 2029 में ऐसा माहौल नहीं रहेगा और भाजपा मजबूत टक्कर देगी। पाञ्चजन्य ने चुनाव से पहले ही कांग्रेस पार्टी को आईयूएमएल के आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कर दिया था।

















