वरं पर्वत-दुर्गेषु भ्रन्तं वनचरैः सह।
न मूर्खजनसम्पर्कः सुरेन्द्रभवनेष्वपि ।।
भावार्थ-
पहाड़ों के स्थानों में वनचरों (जंगली जानवरों) के साथ घूमना अच्छा है, किन्तु मूर्खों के साथ इन्द्र के महलों में भी रहना अच्छा नहीं है।

















