ममता बनर्जी का जनादेश मानने से इंकार लोकतंत्र पर आघात
October 3, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत पश्चिम बंगाल

ममता बनर्जी का जनादेश मानने से इंकार लोकतंत्र पर आघात

चुनाव परिणाम के बाद जिस भी मुख्यमंत्री की हार होती है, उसका इस्तीफा देकर सत्ता का हस्तांतरण बहुत ही शांतिप्रिय तरीके होना भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी हैं.

Written byअभय कुमारअभय कुमार
May 6, 2026, 08:07 am IST
inपश्चिम बंगाल
Mamta Banerjee

ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हारने के बाद  ममता बनर्जी अपने पद से इस्तीफा देने से आनाकानी कर रही हैं. आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा देने से इंकार कर रहा हो. चुनाव परिणाम के बाद जिस भी मुख्यमंत्री की हार होती है, उसका इस्तीफा देकर सत्ता का हस्तांतरण बहुत ही शांतिप्रिय तरीके होना भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी हैं.

जनता ने ममता को नकारा

पश्चिम बंगाल की 293 सीटों में से बीजेपी को 207 सीटें मिली हैं, वहीं ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस सिर्फ 80 सीटें ही जीत सकी है. लेकिन ममता बनर्जी अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि वह चुनाव हार चुकी हैं. वह दावा कर रही हैं कि नैतिक रूप से इस चुनाव में उनकी जीत हुई है. पश्चिम बंगाल के 6 करोड़ 37 लाख मतदाताओं में से 3 करोड़ 77 लाख मतदाताओं  ने ममता बनर्जी के खिलाफ मतदान किया है लगभग जो कुल मतदाताओं  का लगभग 60% हैं.

इन दलों ने जनादेश स्वीकार किया

पूर्व में भी कई ऐसे चुनाव परिणाम देखने को मिले हैं जो दल के खिलाफ समय समय पर गया है  मगर तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया था.  उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी बसपा 2012 में 206 सीट से महज 80 सीटों पर सिमट गई थी, भाजपा राजस्थान में 1998 में 95 सीटों से महज 33 सीटों पर आ गई थी, राजस्थान में ही कांग्रेस पार्टी 2013 में 96 सीटों से 21 सीट पर आ गई थी. समाजवादी पार्टी 2017 में 224 से महज 47 सीटों पर आ गई थी. तमिलनाडु में तो करुणानिधि और जयललिता के समय में एक दल के सुनामी के आगे दूसरा दल पूरी तरह से साफ हो गया था.मगर ममता बनर्जी वाली हठधर्मिता देखने को कभी भी नहीं मिली.

ममता बनर्जी ने किया जनादेश का अपमान

ममता बनर्जी  का यह व्यक्त्व ना सिर्फ पश्चिम बंगाल के जनादेश का अपमान है  बल्कि  पश्चिम बंगाल के मतदाताओं  का भी अपमान है. ममता बनर्जी  लोकतंत्र और संविधान  का भी अपमान करके दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनाव व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही हैं.

ममता बनर्जी अपनी हार से बचने के लिए हास्यास्पद बहाना बना रही हैं.  वह चुनाव आयोग को खलनायक बताते हुए अपनी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार घोषित कर रही हैं. इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों, मीडिया के एग्जिट पोल पर भी अपनी हार के लिए दोषी करार दे रही हैं. मगर उनका कथन किसी पार्टी पर नहीं बल्कि भारतवर्ष के परंपरा, भारत के संविधान अर्थात बाबा साहब अंबेडकर के संविधान के ऊपर भी आघात है. यह एक बहुत गंभीर विषय है.

खतरनाक परंपरा की शुरुआत

ममता बनर्जी एक बहुत खतरनाक परंपरा की शुरुआत कर रही हैं जो आगे चलकर भारत के लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक साबित होगा. ममता बनर्जी के आज के इस कदम के बाद हो सकता है कि भविष्य में जब दूसरी विपक्षी पार्टियां भी चुनाव में बुरी तरह हारेंगी तो वह भी अपनी चुनावी हार को स्वीकार करने से यह कहकर इंकार कर दें कि यह  षड्यंत्र  के तहत हुआ है.

अरविंद केजरीवाल ने भी किया था इस्तीफा देने से इंकार

इससे पहले वर्ष 2024 में अरविंद केजरीवाल ने जेल जाने के बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था. केजरीवाल ने भी यही बहाना बनाया था कि उन्हें तो जानबूझकर फंसाया गया है और वह निर्दोष हैं. अभी हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने उसी शराब घोटाले में दिल्‍ली हाईकोर्ट के सामने पेश होने से भी इंकार कर दिया है.

ईवीएम को क्यों दोष दे रहे नेता

इससे पहले राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे बड़े-बड़े नेता भी चुनाव हारने के बाद ईवीएम को दोष दे चुके हैं और  वोट चोरी का मुद्दा उठा चुके हैं. अब यही लोग तय करेंगे कि किसी घोटाले में यह दोषी हैं या नहीं. यही लोग तय करेंगे कि चुनाव में  जीत या हार हुई हैं. यह हमारे देश की लोकतांत्रिक प्रणाली, हमारी न्याय व्यवस्था, हमारी अदालतें और हमारे संविधान के साथ ऐसा भद्दा मजाक है  जिससे पूरी दुनिया में भारत के लोकतंत्र का सिर्फ मजाक उड़ सकता है. अगर इन्हीं में से कोई नेता आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बन गया या देश के किसी बहुत ही महत्वपूर्ण पद प्राप्त कर लेगा तो देश को कितनी खतरनाक स्थिति में पहुंचा देगा.

क्या कहता है संविधान

संविधान के अनुच्छेद 172 के मुताबिक किसी भी राज्य की विधानसभा का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से अगले 5 वर्ष तक होता है और 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद विधानसभा स्वयं ही भंग हो जाती है.  पश्चिम बंगाल की इस विधानसभा के भंग होने की तारीख 7 मई है, इस कारण चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में इससे पहले चुनाव कराकर नतीजे घोषित कर दिए हैं.

लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार नतीजों के बाद मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राज्यपाल के पास जाकर सौंपते हैं और तब राज्यपाल उन्हें नई सरकार बनने तक एक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने के लिए कहते हैं. हालांकि मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं बल्कि सिर्फ एक औपचारिकता भर है.7 मई को इस विधानसभा का  कार्यकाल समाप्त होने के बाद  वैसे भी ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रह सकती हैं.

राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति

राहुल गांधी ने भी ममता बनर्जी का  समर्थन किया है और कहा कि चुनाव आयोग की मदद से ही पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव में वोट चोरी हुई है. राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को राज्य में पिछड़ापन के लिए ममता बनर्जी को पानी पी पीकर कोसा है. मगर अब अपने राजनितिक लाभ के लिए ममता के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं. लेकिन यही राहुल गांधी  केरलम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं.  केरलम में जीत के लिए वह अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बधाई दे रहे हैं और नहीं कह रहे कि यहां उनकी पार्टी कैसे चुनाव जीती.

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी हार गईं और कांग्रेस पार्टी की स्थिति बहुत खराब हो गई  जो राहुल गांधी को स्वीकार नहीं है. कांग्रेस पार्टी का विगत विधानसभा में एक भी सदस्य नहीं था मगर इस बार दो सदस्य निर्वाचित हुए हैं. कांग्रेस पार्टी की स्थिति में पश्चिम बंगाल में सुधार हुआ हैं मगर फिर भी राहुल गांधी ऐसा कर रहे हैं. तमिलनाडु में राहुल गांधी फिल्म स्टार विजय को उनकी जीत की बधाई दे रहे हैं  और उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस पार्टी विजय को समर्थन देकर मुख्यमंत्री बनने के मदद करेगी और खुद भी मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेगी जो स्टालिन ने नहीं किया था.

तमिलनाडु और केरलम पर क्यों मुंह बंद

राहुल के लिए तमिलनाडु और केरलम में  चुनाव आयोग ने अच्छा काम किया और  ईवीएम ने बिल्कुल ठीक काम किया मगर  असम और पश्चिम बंगाल में उन्हें वोट चोरी महसूस हो रही है. तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी 18 सीटों से घटकर 5 सीटों की पार्टी बन गई हैं मगर राहुल गांधी को कोई परेशानी नहीं हैं. अगर तमिलनाडु में भाजपा नीत  एनडीए चुनाव जीती होती तो वहां भी राहुल गांधी मिथ्या आरोप  अवश्य लगाते. केरल में भी एनडीए का प्रदर्शन ख़ास नहीं रहा अतएव राहुल गाँधी के आरोपों से बच गया.

तब विपक्ष क्यों मना रहा था जश्न

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ 240 सीटें आई थी तब विपक्षी नेतागण  जश्न मना रहे थे और किसी ने सवाल नहीं उठाया कि भाजपा की 2019 में  303 से 2024 में 240 सीट कैसे हो गई. तब विपक्ष को लगा था कि भाजपा की कहानी अब खत्म हो रही है, लेकिन जैसे ही भाजपा विधानसभा के चुनावों में फिर से मजबूत हो रही है तो विपक्षी नेतागण चुनाव में बेईमानी का फिर से प्रलाप कर रहे हैं. तमिलनाडु में स्टालिन की पार्टी भी बुरी तरह से चुनाव हारी है मगर वो जनादेश को स्वीकार कर रहे है. स्टालिन अपनी सीट भी हार गए हैं मगर  वो ईवीएम को दोष नहीं दे रहे हैं.  केरल और तमिलनाडु की सरकार हारी है और इसके  बाद एमके स्टालिन और पिनराई विजयन दोनों अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं. ये दोनों नेता  ममता बनर्जी की तरह मिथ्या प्रलाप नहीं कर रहे हैं.

 

Topics: चुनाव आयोगबंगाल चुनावभारतीय लोकतंत्रममता बनर्जी इस्तीफापश्चिम बंगाल चुनाव 2026ममता बनर्जी की हार
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

जेपी नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

जेपी नड्डा ने SIR विवाद पर राहुल गांधी और विपक्ष को लताड़ा, कहा- ‘झूठ सौ बार दोहराने से सच नहीं बनता’

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

संवैधानिक संस्थाओं पर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों पर बात करे कांग्रेस : मुख्यमंत्री धामी

eci revises schedule for SIR of electoral rolls in delhi and maharashtra

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण : SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, मीडिया रिपोर्ट्स को किया खारिज

eci revises schedule for SIR of electoral rolls in delhi and maharashtra

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR का संशोधित शेड्यूल जारी, जानें नई तारीखें

कौन फैला रहा चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर मतभेद का झूठ? EC ने कहा- सुझाव विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया

स्वतंत्रता के 79 साल: चुनौतियों से आत्मनिर्भरता और वैश्विक शक्ति तक की सशक्त यात्रा

Load More

ताज़ा समाचार

काशी में पाकिस्तानेश्वर महादेव का नाम सिंधु गंगेश्वर करने को लेकर सिंधी समाज ने सौंपा ज्ञापन।

काशी में पाकिस्तानेश्वर महादेव का नाम सिंधु गंगेश्वर महादेव करने की मांग, जानिये पाकिस्तान से काशी कैसे पहुंचा शिवलिंग

प्रतीकात्मक चित्र

एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता

Madhav Srishti Naturopathy Centre Solan Inauguration Governor Vidya Bharti Panchjanya

सोलन में ‘माधव सृष्टि’ प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का शुभारंभ: राज्यपाल ने की सराहना, जानें केंद्र की बड़ी बातें!

Mangarh Dham National Monument Demand Vanvasi Kalyan Ashram Satyendra Singh Bhilwara Panchjanya

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करे केंद्र: अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की भीलवाड़ा बैठक में बड़ा प्रस्ताव!

प्रतीकात्मक तस्वीर

Fact Check: गोवा सीईओ रिपोर्ट, इंडियन एक्सप्रेस के 97 ‘वैध वोटर’ दावे का सच क्या है?

IRCTC होटल टेंडर मनी लॉन्ड्रिंग केस: लालू-राबड़ी-तेजस्वी कोर्ट में पेश, अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को

natural oil source found in Andman sea

Explainer: भारत के तेल आयात में बढ़ोतरी, जानिए क्या है कारण?

UCC

राष्ट्रपति ने गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 को मंजूरी दी, उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य

किशनगंज के 40 हिंदुओं ने एसपी से मांगी सुरक्षा, जानिए क्या है कारण ?

उत्तराखंड में मानसून की विदाई करीब, अगले दिनों मौसम शुष्क रहेगा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies