जम्मू-कश्मीर सरकार ने फलाह-ए-आम ट्रस्ट (FAT) से जुड़े 58 स्कूलों का प्रशासनिक नियंत्रण ले लिया है। ये स्कूल जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से मान्यता प्राप्त थे और कश्मीर में अच्छी पढ़ाई के लिए जाने जाते थे। ट्रस्ट बैन किए गए जमात-ए-इस्लामी (JeI) का शैक्षणिक संगठन माना जाता है।
फाइल 104 और स्कूलों की निगरानी
श्रीनगर के बेमिना में बोर्ड ऑफिस में एक लॉकर के अंदर ‘फाइल 104’ रखी है। यह इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा चिह्नित स्कूलों की एक सूची है। अगर कोई स्कूल इस फाइल में आ जाता है तो उसकी सरकारी रजिस्ट्रेशन में दिक्कत हो सकती है। बड़गाम का इस्लामिया हाई स्कूल भी इन्हीं में शामिल है।
इस्लामिया हाई स्कूल का उदाहरण
इस्लामिया हाई स्कूल 1992 से बोर्ड से स्वतंत्र रूप से जुड़ा हुआ है। इसमें करीब 1500 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें 700 लड़कियां हैं। स्कूल 13 कनाल जमीन पर फैला है। इसके पुराने छात्रों में कई सीनियर पुलिस अधिकारी और डॉक्टर हैं। हाल के समय में इसका सबसे मशहूर छात्र क्रिकेटर आकिब नबी है। इस साल क्लास 10 में स्कूल का रिजल्ट 95% रहा, जिसमें पांच बच्चों ने 500 में से 490 मार्क्स हासिल किए।
अब इस स्कूल का प्रशासनिक नियंत्रण बुगलोबाग सरकारी हाई स्कूल को दे दिया गया है। उस सरकारी स्कूल में पहले केवल 170 छात्र थे, अब सात और स्कूल जुड़ने के बाद जिम्मेदारी बढ़ गई है।
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ट्रस्ट का इतिहास
फलाह-ए-आम ट्रस्ट 1960 के दशक से स्कूल चलाता रहा। 1967 में जमात-ए-इस्लामी ने 22 स्कूल शुरू किए। 1975 में जब जमात पर बैन लगा तो शेख अब्दुल्ला की सरकार ने सलाह दी कि स्कूल ट्रस्ट के नाम पर चलाए जाएं। ट्रस्ट ने अंग्रेजी माध्यम को बढ़ावा दिया, खासकर गणित और साइंस में, साथ में इस्लामिक स्टडीज और अरबी भी पढ़ाई जाती थी।
ये स्कूल सरकारी स्कूलों का सस्ता और बेहतर विकल्प बने। 2019 में ट्रस्ट के स्कूलों में 80,000 से ज्यादा छात्र थे, जिनमें आधी लड़कियां थीं, और करीब 5000 टीचर काम करते थे। 2022 में ट्रस्ट के 22 मूल स्कूलों पर सरकार ने नियंत्रण लिया। अगस्त 2025 में 150 और स्कूलों को लिया गया। अब हाल ही में बाकी 58 स्कूलों का भी प्रशासनिक नियंत्रण पास के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों को सौंप दिया गया है।
अभी क्या बदलाव हुए हैं
कुछ प्रिंसिपलों का कहना है कि स्वायत्तता कम हो गई है। खाते सील हो गए हैं और हर खर्च, जैसे टीचरों की सैलरी आदि, के लिए नियंत्रण वाले सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल की मंजूरी लेनी पड़ती है। पिछले साल नियंत्रण में आए एक स्कूल के प्रिंसिपल कहते हैं कि जमीनी स्तर पर ज्यादा बदलाव नहीं है। वही छात्र, वही टीचर, भर्ती भी पहले जैसी। सिर्फ क्लास 9 और 10 के छात्र अब नियंत्रण वाले सरकारी स्कूल के नाम से रजिस्टर होते हैं और उसी के तहत परीक्षा देते हैं।

















