क्या कांग्रेस ने बंगाल और केरल में आत्मसमर्पण कर दिया है? क्योंकि वर्तमान में देश के पांच प्रदेशों—तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव बाद परिणाम का इंतज़ार है। तमिलनाडु के अलावा सभी प्रदेशों में कांग्रेस पार्टी अकेले अपने नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन से अलग होकर राहुल गांधी के नेतृत्त्व में चुनाव लड़ रही है। जिसमे बंगाल भी शामिल है जहां इंडी गठबंधन में शामिल ममता बनर्जी की TMC के विरुद्ध राहुल गाँधी ने स्वयं आक्रमक तौर पर प्रचार भी किया। वहीं पुडुचेरी और केरल की बात करें तो वहां कांग्रेस पार्टी अपने नेतृत्व में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही है।
वर्तमान में कांग्रेस की स्थिति और राज्यों का गणित
वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के तीन राज्यों—हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में मुख्यमंत्री हैं। इन तीनों राज्यों में कुल 424 विधानसभा की सीटें हैं। वहीं झारखंड, तमिलनाडु और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में कांग्रेस पार्टी की गठबंधन में सरकार है। तमिलनाडु में अभी चुनाव हो रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है कि जम्मू और कश्मीर और तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा तो है, मगर सरकार का हिस्सा नहीं है।
ममता की हार में राहुल की जीत? बंगाल चुनाव में कांग्रेस के ‘अकेले’ लड़ने का असली सच आया सामने!
जम्मू-कश्मीर में निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को उमर अब्दुल्ला ने सरकार में शामिल किया है, मगर कांग्रेस पार्टी को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया है। एक समय पूरे देश में सरकार चलाने वाली कांग्रेस पार्टी अब महज तीन राज्यों तक ही सिमट गई है, यह एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य : दशकों से सत्ता से दूर कांग्रेस
चुनावी पांच प्रदेशों की बात करें तो 1967 के बाद तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर है। तमिलनाडु में आखिरी बार 1967 में एम. भक्तवत्सलम कांग्रेस पार्टी के आखिरी मुख्यमंत्री थे। पश्चिम बंगाल में आखिरी बार 1972 में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी थी। सिद्धार्थ शंकर राय 1972 से 1977 तक मुख्यमंत्री थे। इसके बाद 34 साल तक वाम मोर्चा का शासन रहा और बाद में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस सत्ता में रही।
असम में कांग्रेस पार्टी 2016 से सत्ता से बाहर है और तरुण गोगोई राज्य में पार्टी के आखिरी मुख्यमंत्री थे। असम की ही तरह केरल में भी कांग्रेस पार्टी 2016 से सत्ता से बाहर है और स्वर्गीय ओम्मान चांडी आखिरी मुख्यमंत्री थे। केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस पार्टी 2021 से सत्ता से बाहर है।
चुनावी मैदान में कांग्रेस की रणनीति और चुनौतियां
मगर कांग्रेस पार्टी इन सभी राज्यों में से किसी भी राज्य में मजबूती से सत्ता के लिए नहीं लड़ती दिख रही है। कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे अच्छी संभावना पुडुचेरी में है, मगर कांग्रेस पार्टी इस प्रदेश में भी केवल चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा भर बनकर रह गई है।
लोकसभा 2024 के चुनाव में इस प्रदेश की सभी 30 सीटों में से 28 पर कांग्रेस पार्टी प्रथम पायदान पर रही थी। अतएव कांग्रेस पार्टी इस प्रदेश में मजबूती से चुनाव लड़कर सरकार बनाने का प्रयास करती, मगर ऐसा चुनाव के किसी भी दौर में देखने को नहीं मिला।
क्षेत्रीय दलों का प्रभाव और गठबंधन की विवशता
पुडुचेरी के पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी की स्थिति जम्मू-कश्मीर जैसी ही द्रमुक (DMK) ने बनाकर रख दी है, क्योंकि विगत सरकार में भी द्रमुक ने कांग्रेस को साझीदार नहीं बनाया था और आगामी चुनाव बाद अगर सरकार फिर से द्रमुक के नेतृत्व में बनती है, तो इस प्रकार का कोई भी वादा द्रमुक ने नहीं किया है।
केरल में कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF), माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के खिलाफ मुख्य मुकाबले में है, मगर कांग्रेस पार्टी किसी भी तरह से एलडीएफ को मजबूत लड़ाई देती नज़र नहीं आ रही है।
केरल का ‘गुप्त समझौता’ और गांधी परिवार
इसका कारण गांधी परिवार और केरल के मुख्यमंत्री के परिवार में एक कथित गुप्त समझौता है। 2019 के बाद केरल में इस गुप्त समझौते के तहत गांधी परिवार विधानसभा का चुनाव कमजोरी से लड़कर पी. विजयन को मुख्यमंत्री बने रहने में मदद करेगा, वहीं पी. विजयन गांधी परिवार को वायनाड लोकसभा सीट जीतने के साथ केरल से कांग्रेस पार्टी को ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जिताकर दिल्ली में गांधी परिवार को मजबूत करेंगे।
गांधी परिवार को अपना राजनीतिक वजूद बनाये रखने के लिए सुरक्षित लोकसभा सीटों की जरूरत है। दूसरी ओर केरल के मुख्यमंत्री का एकमात्र उद्देश्य अपने दामाद मोहम्मद रियास को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपना है।
पश्चिम बंगाल और असम : खोने के लिए कुछ नहीं
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी का एकमात्र उद्देश्य ममता बनर्जी को चुनाव हराकर इंडि (I.N.D.I.A.) गठबंधन की कमान कांग्रेस पार्टी को अपने हाथों में रखना है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी का कोई भी विधायक नहीं है, अतएव पार्टी के पास कुछ भी खोने के लिए नहीं है। असम में भी कांग्रेस पार्टी केवल चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा भर बन रही है। अतएव इन पांच प्रदेशों के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के लिए पाने के लिए कुछ भी विशेष नजर नहीं आ रहा है।

















